एड्स की रोकथाम के लिए तीन जिलों में सेलून संचालकों को बनाया जाएगा मितान
रायपुर के सेलून संचालकों का प्रशिक्षण सम्पन्न
अच्छा काम करने वाले को मिलेगा ईनाम
छत्तीसगढ़ में एड्स कीे रोकथाम में सेलून चलाने वाले नाईयों की मदद ली जाएगी। इसके लिए रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर जिले के 150 नाईयों को एड्स मितान बनाया जा रहा है। इसके तहत आज यहां कालीबाड़ी स्थित राज्य स्वास्थ्य संसाधन केन्द्र में रायपुर के 40 नाईयों को एच.आई.वी. संक्रमण के कारणों और उससे बचने के उपायों के संबंध में प्रशिक्षण दिया गया। छत्तीसगढ़ राज्य एड्स नियंत्रण समिति के परियोजना संचालक श्री अजय पाण्डेय की अध्यक्षता में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में नाईयों को एच.आई.वी. की रोकथाम के विभिन्न उपायों की जानकारी दी गई। प्रशिक्षत नाई अब अपने सेलून में जाकर ग्राहकों को एच.आई.वी. एड्स के बारे में जानकारी देंगे। जो एड़स मितान एक वर्ष में सबसे अधिक व्यक्तियों को एच.आई.वी. जांच के लिए जांच एवं परामर्श केन्द्र भेजेगा, उन्हें नगद पुरस्कार दिया जाएगा।

परियोजना संचालक श्री पाण्डेय ने प्रशिक्षणार्थियों से कहा कि वे अपने सेलून में बाल अथवा सेविंग कराने आने वाले ग्राहकों को एड्स की रोकथाम की जानकारी दें। उन्हें यह बताया जाए कि एच.आई.वी. एड्स केवल असुरक्षित यौन संबंधों, संक्रमित खून चढ़ाने, संक्रमित सुई के उपयोग से फैलता है। इसके अलावा एच.आई.वी. संक्रमित गर्भवती से होने वाले बच्चे को संक्रमण का खतरा रहता है। सेलूनों में उपरोक्त तीन कारणों से बचने की सलाह ग्राहकों को दी जाए। उन्होंने कहा कि इस कार्य के लिए प्रोत्साहन स्वरूप सेलून संचालकों को एड्स से बचाव के संदेश लिखे कुर्सी, टेबल, मिरर,एप्रेन और प्र्रचार सामग्री दी जाएगी। श्री पाण्डेय ने कहा कि सेलून में आने वालों को एच.आई.वी. टेस्ट के लिए एकीकृत जांच एवं परामर्श केन्द्र (आई.सी.टी.सी.) में भेंजे। छत्तीसगढ़ के सभी मेडीकल कॉलेज, जिला अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों एच.आई.वी. जांच के लिए एक सौ एकीकृत जांच एवं परामर्श केन्द्र की स्थापना की गई है। सबसे अधिक व्यक्तियों को एच.आई.वी. जांच के लिए एकीकृत जांच एवं परामर्श केन्द्र भेजने वाले एड्स मितान को नगद ईनाम दिया जाएगा। इसके लिए उन्हें रिफरल कार्ड दिए जाएंगे। श्री पाण्डेय ने बताया कि रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर और अम्बिकापुर में ए.आर.टी. (एन्टी रिट्रो वायरल थेरापी) केन्द्र स्थापित हैं, जहां एच.आई.वी. संक्रमित मरीजों को नि:शुल्क दवाईयां और परामर्श दिया जाता है। सेलून संचालक संक्रमित मरीज मिलने पर उन्हें इन केन्द्रों में भेजें।
श्री पाण्डेय ने एड्स मितानों की शंकाओं का समाधान करते हुए बताया कि बाल अथवा सेविंग बनवाने के दौरान एक से अधिक व्यक्तियों द्वारा एक ही ब्लेड का उपयोग किए जाने से एच.आई.वी. का संक्रमण नहीं होता। एच.आई.वी. का संक्रमण केवल चार मान्य कारणों से ही होता है। उन्होंने बताया कि रायपुर के अलावा दुर्ग, कोरबा और बिलासपुर में नाईयों को एड्स मितान बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा एच.आई.वी. संक्रमितों को अंत्योदय योजना के तहत 35 किलो चावल मुफ्त दिया जा रहा है। इसकी जानकारी भी सेलून में प्रभावितों को दी जाए। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में लगभग छह हजार लोग एच.आई.वी. संक्रमित हैं।

