छत्तीसगढ़ : संस्थागत प्रसव दो गुनी से ज्यादा हुई
वर्ष 2010-11 में 2.64 लाख से अधिक महिलाओं ने
अस्पतालों में कराया सुरक्षित प्रसव
रायपुर 15 अप्रैल 2011
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा जननी सुरक्षा योजना के माध्यम से संस्थागत प्रसव को बढ़ाने के लिए किए जा रहे लगातार प्रयासों के फलस्वरूप अस्पतालों में प्रसव कराने वाली महिलाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। यह राज्य शासन द्वारा चलाए जा रहे जागरूकता अभियान का ही नतीजा है कि पिछले पांच वर्षों में राज्य में संस्थागत प्रसव की संख्या लगभग दो-गुनी से ज्यादा हो गई है। संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2005 में छत्तीसगढ़ में जननी सुरक्षा योजना लागू की गई्र थी, तब राज्य में संस्थागत प्रसव की संख्या केवल 23.55 प्रतिशत थी, जो वर्ष 2010-11 में बढ़कर 53.23 प्रतिशत हो गई है। बीते वित्तीय वर्ष में अप्रैल 10 से लेकर फरवरी 2011 में दो लाख 64 हजार 485 गर्भवती माताओं ने अस्पतालों में सुरक्षित प्रसव कराया है, जो निर्धारित लक्ष्य का 53.23 प्रतिशत है। अस्पताल में प्रसव कराने वाली महिलाओं को दस करोड़ रूपए से अधिक की राशि प्रोत्साहन स्वरूप दी गई है।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री श्री अमर अग्रवाल ने बताया कि सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा देने के साथ ही मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए केन्द्र सरकार की सहयोग से वर्ष 2005 से जननी सुरक्षा योजना लागू की गई है। इस योजना के लागू होने के बाद छत्तीसगढ़ में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में काफी कमी आई है और यहां शिशु मृत्यु दर 79 प्रति हजार से घटकर 54 प्रति हजार हो गई है। इसी तरह मात्ृ मृत्यु दर भी 335 प्रति लाख हो गई है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में वर्ष 2012 तक शिशु मृत्यु दर तीस प्रति हजार और मातृ मृत्यु दर एक सौ प्रति लाख लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष अप्र्रैल 2010 से फरवरी 2011 तक कबीरधाम जिले में पांच हजार 293, राजनांदगांव जिले में पन्द्रह हजार 047, दुर्ग जिले में 32 हजार 177, रायपुर जिले में 53 हजार 148 , महासमुंद जिले में बारह हजार एक, बिलासपुर जिले में 29 हजार 495, जांजगीर-चांपा जिले में दस हजार 098, कोरबा जिले में ग्यारह हजार 221, रायगढ़ जिले में चौदह हजार 233, कोरिया में जिले में पांच हजार 742, सरगुजा जिले में तीस हजार 698, जशपुर जिले सात हजार 133, धमतरी जिले में नौ हजार 751, उत्तर बस्तर कांकेर जिले में सात हजार 495, बस्तर जिले में पन्द्रह हजार 956, दंतेवाड़ा जिले में तीन हजार 334, नारायणपुर जिले में 859 और बीजापुर जिले में 800 महिलाओं ने अस्पतालों में सुरक्षित प्रसव कराया है।
ज्ञातव्य है कि जननी सुरक्षा योजना के अन्तर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में तैनात मितानिनों द्वारा अस्पताल में प्रसव कराने के लिए गर्भवती महिलाओं को प्रोत्साहित किया जाता है और उन्हें प्रसव के लिए अस्पताल ले जाया जाता है। गर्भवती माताएं स्वंय भी प्रसव के लिए सीधे अस्पताल जा सकती हैं। अस्पताल पहुंचने पर उन्हें चार सौ रूपए परिवहन खर्च दिया जाता है। इसके अलावा अस्पताल में प्रसव कराने पर ग्रामीण महिला को एक हजार 400 रूपए तथा शहरी महिला को एक हजार रूपए की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। इसी प्रकार यदि ग्रामीण महिला मितानिनों की देखरेख में अपने घर में प्रसव कराती हैं, तो उन्हें पांच सौ रूपए की राशि दी जाती है। गर्भवती माताओं द्वारा योजना के तहत मान्यता प्राप्त निजी अस्पतालों में प्रसव कराने पर भी उन्हें प्रोत्साहन राशि दी जाती है। इसके अलावा गर्भवती माताओं को अस्पताल में प्रसव के लिए प्रोत्साहित करने वाली मितानिनों को भी प्रति प्रकरण दौ सौ रूपए की प्रोत्साहन राशि दी जाती है।

