छत्तीसगढ़ के चार जिलों में पोषण पुनर्वास केन्द्र शुरू
सोलह स्थानों पर खोलने की तैयारी
रायपुर 18 अगस्त 2010
बच्चों में कुपोषण दूर करने के लिए छत्तीसगढ़ के चार जिला अस्पतालों रायपुर, धमतरी, कोरबा और जांजगीर-चापा में पोषण पुनर्वास केन्द्र शुरू हो गए हैं। इन केन्द्रों में कुपोषित बच्चों के इलाज और पौष्टिक आहार प्रदान करने के लिए प्रशिक्षित चिकित्सक की नियुक्ति के अलावा अलग कक्ष, रसोई, आहार विशेषज्ञ और पांच बिस्तर कुपोषित बच्चों के लिए आरक्षित किया गया है। 
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री श्री अमर अग्रवाल ने बताया कि छत्तीसगढ़ में बच्चों में कुपोषण की दर अधिक है। बच्चों में कुपोषण दूर करने के लिए ही प्रदेश के बीस स्वास्थ्य केन्द्रों में पोषण पुनर्वास केन्द्रों की स्थापना की जा रही है। इसके तहत अब तक चार जिला अस्पतालों में पोषण पुनर्वास केन्द्र की स्थापना की गई है। इन केन्द्रों के माध्यम से कुपोषण दूर करने में मदद मिलेगी। उन्होंने डॉक्टरों से कहा है कि वे बच्चों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण करें और कुपोषण के शिकार बच्चों को समुचित पोषण आहार प्रदान करें। कुपोषित बच्चों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण करने के साथ ही जरूरत पड़ने पर उन्हें बड़े अस्पतालों में रिफर किया जाएगा। रिफर किए जाने की स्थिति में बच्चे को लाने-ले-जाने का खर्चा भी राज्य शासन द्वारा दिया जाएगा। कुपोषित बच्चों के समुचित देखभाल के लिए प्रत्येक केन्द्र में पांच-पांच बिस्तर आरक्षित करने के साथ ही बच्चों को सही मात्रा में पोषण आहार प्रदान करने के लिए आहार विशेषज्ञ और रसोईयों की भी भर्ती की जा रही है। इन केन्द्रों में बच्चों के साथ उनकी माताओं को भी पोषण आहार प्रदान किया जाएगा।
ज्ञातव्य है कि जांजगीर-चांपा, रायपुर, धमतरी और कोरबा के अलावा जिला अस्पताल अम्बिकापुर, बिलासपुर, दंतेवाड़ा, दुर्ग, जशपुर, कांकेर, कवर्धा, कोरिया, महासमुंद, रायगढ़ और जिला अस्पताल राजनांदगांव में पोषण्ा पुनर्वास केन्द्र की स्थापना की जा रही है। इसके अलावा पांच सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पेण्ड्रारोड, बीजापुर, नारायणपुर, कोण्डागांव और गरियाबंद को पोषण पुनर्वास केन्द्र के लिए चयन किया गया है। उपस्वास्थ्य केन्द्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र और आंगनवाड़ी केन्द्रों में बच्चों के वजन, कुपोषण के लक्षण और परीक्षण के आधार पर कुपोषित बच्चों को चिन्हांकित किया जाएगा। आंगनबाड़ी केन्द्र में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता द्वारा कुपोषित बच्चों का चिन्हांकन किए जाने पर उन्हें प्रति प्रकरण पचास रूपए की प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी। बच्चों के चिन्हांकन के बाद उन्हें उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, जिला अस्पताल अथवा मेडिकल कॉलेज भेजा जाएगा। कुपोषित बच्चों को प्रथम संदर्भन इकाई याने सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र भेजे जाने पर बच्चे के अभिभावक को आने-जाने के लिए दो सौ रूपए, कुपोषित बच्चों को द्वितीय संदर्भन इकाई याने जिला अस्पताल भेजे जाने पर 750 रूपए आने-जाने का खर्चा दिया जाएगा।

