हिस्टे्रक्टॉमी एण्ड इट्स अल्टरनेटिव पर दो दिवसीय राज्य स्तरीय सम्मेलन 4 सितम्बर से
राज्यपाल श्री शेखर दत्त करेंगे सम्मेलन का शुभारंभ
हिस्टे्रक्टॉमी आपरेशन का होगा जीवंत प्रदर्शन
रायपुर 03 सितम्बर 2010
छत्तीसगढ़ के पंडित जवाहर लाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय, डॉ. भीमराव अम्बेडकर अस्पताल और आब्स्टेट्रिक्स एवं गायनेकोलॉजिकल सोसायटी द्वारा हिस्टे्रक्टामी एण्ड इट्स अल्टरनेटिव पर चार सितम्बर से दो दिवसीय छटवें राज्य स्तरीय सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। राज्यपाल श्री शेखर दत्त शनिवार 4 सितम्बर को दोपहर दो बजे जेल रोड स्थित होटल 'बेबीलोन इन' में इस सम्मेलन का शुभारंभ करेंगे।
डॉ. भीमराव अम्बेडकर अस्पताल की स्त्री रोग विभाग की विभागाध्यक्ष और ऑब्स्टेट्रिक्स एवं गायनेकोलॉजीकल सोसायटी की अध्यक्ष डॉ. आभा सिंह ने बताया कि सम्मेलन के शुभारंभ से पहले चार सितम्बर को सवेरे जीवंत कार्यशाला का आयोजन किया गया है, जिसमें महिलाओं की हिस्टे्रक्टामी आपरेशन के विभिन्न तरीकों का जीवंत प्रदर्शन होगा। लाईव हिस्टे्रक्टामी की विभिन्न पध्दतियों के बारे में भी बताया जाएगा। इसमें डॉ. पी.सी.महापात्रा, डॉ. आर. के. पुरोहित, डॉ.मेहुल सुखाड़िया, डॉ. आभा सिंह द्वारा आपरेशन किए जाएंगे। इसी दिन दोपहर में डॉ. आभा सिंह द्वारा बिना चीरफाड़ के बच्चेदानी निकालने का आपरेशन पर व्याख्यान दिया जाएगा। ये सभी कार्यक्रम डॉ. भीमराव अम्बेडकर चिकित्सालय के टेलीमेडिसीन हॉल में होंगे। कार्यशाला के उद्देश्य के बारे में डॉ. आभा सिंह ने बताया कि कई महिलाएं अत्यधिक रक्तस्राव एवं अनियमित रक्तस्राव की शिकायत से ग्रसित होती हैं, इनमें से कई महिलाएं कम उम्र की भी होती हैं, जिनका उचित उपचार दवाईयों और अन्य पध्दतियों से किया जा सकता है। लेकिन आज ज्यादातर महिलाएं बच्चेदानी निकलवाने का आपरेशन हिस्टे्रक्टामी को ज्यादा आसान रास्ता मानकर चुनती है। स्त्री रोग विशेषज्ञ जब आवश्यक समझे तभी हिस्टे्रक्टॉमी आपरेशन कराना चाहिए। कम उम्र में हिस्टे्रक्टॉमी आपरेशन करवाना बिल्कुल भी न्यायोचित नहीं है। इस कार्यशाला का मूल उद्देश्य ही हिस्टे्रक्टॉमी आपरेशन की दर को कम करना है। उन्होंने बताया कि महिलाओं में बच्चेदानी की उपयोगिता परिवार पूर्ण करने पश्चात भी होती है और यह शरीर का अति आवश्यक अंग है। एक उम्र के बाद ही बहुत जरूरी होने पर आपरेशन कराना चाहिए। अत्यधिक एवं अनियमित रक्तश्राव जैसी बीमारी के लिए आज के आधुनिकतम मेडिकल युग में बिना हिस्टे्रक्टॉमी आपरेशन के अलावा इलाज के लिए विभिन्न नई-नई पध्दतियां निजात हो चुकी है। इसलिए आपरेशन को अंतिम इलाज के रूप में ही इस्तेमाल करना चाहिए।
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में नवजात शिशुओं में होने वाले जन्मजात विकृतियों के बारे में बताया जाएगा। साथ ही गर्भावस्था में ही इनसे बचने के उपायों के बारे में जानकारी दी जाएगी। यदि विकृतियां हो गई हैं, तो उसके निदान के बारे में बताया जाएगा। इसके अलावा कास्मेटोलॉजी एवं गायनेकोलॉजिस्ट के अन्तर्गत महिलाओं में होने वाली त्वचा से संबंधित रोग, केश से संबंधित बीमारियों, बाल झड़ना, कील मुंहासे, अत्यधिक मोटापा आदि विषयों पर भी चर्चा होगी। आब्स्टेट्रिक्स एवं गायनेकोलॉजीकल सोसायटी के सचिव डॉ.मनोज चेलानी ने छत्तीसगढ़ के सभी स्त्री रोग विशेषज्ञों और शिशु रोग विशेषज्ञों से इस कार्यशाला में शामिल होने की अपील की है।

