राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना : छत्तीसगढ़ में बीस हजार से ज्यादा मरीजों को मिली 9.13 करोड़ की सहायता
कार्ड और इलाज में दिक्कत होने पर तत्काल शिकायत करने की अपील
डायल करें : 0771-2236341 और 4255948
रायपुर 09 नवम्बर 2010
राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत छत्तीसगढ़ में अब तक गरीबी रेखा श्रेणी के बीस हजार 650 मरीजों को नौ करोड़ 13 लाख रूपए की चिकित्सा सहायता विभिन्न पंजीकृत अस्पतालों में दी जा चुकी है। राज्य में इस योजना के तहत लगभग बाईस लाख गरीब परिवारों के पंजीयन का लक्ष्य है, जबकि करीब डेढ़ साल पहले शुरू हुई इस योजना में अब तक दस लाख 70 हजार परिवारों को स्मार्ट कार्ड जारी किए जा चुके हैं। इस कार्ड के आधार पर प्रत्येक परिवार को एक वर्ष में तीस हजार रूपए तक नि:शुल्क इलाज की सुविधा दी जा रही है। योजना के क्रियान्वयन में केन्द्र सरकार की ओर से छत्तीसगढ़ को पूरे देश में प्रथम पुरस्कार से नवाजा गया है।
इस बीच राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ में गरीब परिवारों को जारी किए गए राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के स्मार्ट कार्डों का समुचित लाभ नहीं मिलने के बारे में प्राप्त कुछ शिकायतों को बहुत गंभीरता से लिया है। स्वास्थ्य मंत्री श्री अमर अग्रवाल ने हितग्राहियों से कहा है कि इस कार्ड से संबंधित किसी भी प्रकार की समस्या होने अथवा इलाज में किसी भी प्रकार की दिक्कत होने पर वे राजधानी रायपुर स्थित स्वास्थ्य संचालनालय में हेल्प लाईन दी गयी है। आवेदक इस हेल्प लाईन में अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी को टेलीफोन नम्बर 0771-2236341 और 4255948 पर सूचित कर अपनी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं। अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी को इस बीमा योजना के लिए नोडल अधिकारी बनाया गया है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा है कि प्राप्त होने वाली शिकायतों को तत्काल संज्ञान में लेकर विभाग द्वारा जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई होगी। साथ ही समस्या का निराकरण कर संबंधित हितग्राहियों को इसका समुचित लाभ दिलाया जाएगा। हितग्राही इस बारे में इन्टरनेट के माध्यम से ई-मेल के जरिए भी अपनी समस्या अथवा शिकायत आरएसबीवाईसीजी/जीमेलडॉटकाम ( rsbycg/gmail.com) पर भी भेज सकते हैं। स्मार्ट कार्ड में खराबी अथवा किसी प्रकार की शिकायत के लिए संबंधित जिला अस्पताल के डिस्ट्रिक्ट कियोसक से भी सम्पर्क किया जा सकता है।
श्री अग्रवाल ने कहा कि यह व्यवस्था इसलिए की गयी है कि हितग्राहियों को योजना के तहत जिला अस्पतालों में स्थापित डिस्ट्रिक्ट कियोसक और अस्पतालों में इलाज के दौरान कोई परेशानी ना होने पाए। इस योजना में हितग्राहियों को इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश के 316 अस्पतालों को चिन्हित किया गया है। इनमें 170 शासकीय और 148 निजी अस्पताल शामिल हैं। जो अस्पताल इस नेटवर्किंग में शामिल हैं, उन अस्पतालों में इस योजना का बोर्ड भी लगाया गया है। ज्ञातव्य है कि इस योजना के तहत अब तक ग्यारह लाख से अधिक गरीबों को स्मार्ट कार्ड दिए जा चुके हैं। इस कार्ड के माध्यम से अब तक 20 हजार 650 गरीबों को नौ करोड़ 13 लाख रूपए की चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि स्मार्ट कार्ड के निर्माण और इलाज के बाद भुगतान की पूरी प्रक्रिया में आधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल किया गया है। इससे किसी स्मार्ट कार्ड में तकनीकी दिक्कत हो सकती है। इलाज के बाद भुगतान के समय हितग्राही के फिंगर प्रिंट का मिलान नहीं होने के कारण अथवा परिवार के सदस्य का नाम उसमें दर्ज नहीं होने के कारण भी इसमें परेशानी हो सकती है। इस तरह की दिक्कतों को दूर करने के लिए सभी जिला अस्पतालों में 'डिस्ट्रिक्ट कियोसक' की स्थापना की गई है, जहां इस तरह की त्रुटि को सुधरवाया जा सकता है। यहां परिवार के अन्य सदस्यों के नाम भी जोड़े जा सकते हैं। त्रुटिपूर्ण स्मार्ट कार्ड के कारण किसी गरीब को इलाज से वंचित ना होना पड़े, इसके लिए बीमा कम्पनी द्वारा सभी नेटवर्किंग अस्पतालों को हाल ही में बिजनेस निरंतरता प्लान जारी किया गया है। इससे कार्डधारियों को योजना का लाभ निरंतर मिलता रहेगा। नेटवर्क अस्पतालों को स्मार्ट कार्डधारकों के इलाज और दवाईयों पर हुए व्यय का भुगतान बीमा कम्पनी द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप सीधे किया जाता है। नेटवर्किंग अस्पतालों को बीमा कम्पनी द्वारा अब तक 5 करोड़ 77 लाख रूपए का भुगतान किया जा चुका है।
विभागीय अधिकारियों ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा स्मार्ट कार्डधारकों को कार्ड के माध्यम से इलाज के दौरान कुछ सावधानियां बरतने की अपील की गई है। अधिकारियों ने बताया कि अक्सर यह देखने में आता है हितग्राही इलाज पर हुए व्यय की राशि पहले ही नगद चुका देता है और अस्पताल से डिस्चार्ज के दौरान अस्पताल को स्मार्ट कार्ड की जानकारी देता है। इससे पैसे वापसी में परेशानी होती है। किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए हितग्राही को अस्पताल में भर्ती होने से पहले ही स्मार्ट कार्ड की जानकारी दे देनी चाहिए। राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना में शामिल अस्पतालों में सभी प्रकार के इलाज के लिए शुल्क निर्धारित है। हितग्राही को निर्धारित शुल्क से अधिक राशि का भुगतान अस्पताल को नहीं करना चाहिए। अधिकारियों ने बताया कि पंजीकृत शासकीय अथवा निजी अस्पतालों में योजना के तहत इलाज के लिए स्मार्ट कार्ड के अलावा किसी अन्य दस्तावेजों की आवश्यकता नहीं होती। स्मार्ट कार्ड होना ही इलाज कराने के लिए पर्याप्त है। किसी शासकीय अस्पताल में स्मार्ट कार्ड काम नहीं करने पर ही बीपीएल कार्ड की मांग की जाती है, ताकि उसका नि:शुल्क इलाज किया जा सके। पंजीकृत अस्पतालों में स्मार्ट कार्ड प्रस्तुत करने पर ही योजना का लाभ लिया जा सकता है।

