मलेरिया से बचाव के लिए रणनीति तैयार गंभीर मरीजों को तत्काल अस्पताल पंहुचाया जाए: खर्च सरकार देगी
मलेरिया के तत्काल जांच के लिए तीस हजार पैकेट जिलों को भेजे जाएंगे
वीडियो कान्फ्रेसिंग में स्वास्थ्य सचिव ने दिए निर्देश
रायपुर 16 नवम्बर 2010

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में मलेरिया से निपटने के लिए व्यापक रणनीति बनाकर काम करना शुरू कर दिया है। स्वास्थ्य मंत्री श्री अमर अग्रवाल भी विभागीय अधिकारियों के साथ स्थिति की लगातार समीक्षा कर रहे हैं। इस सिलसिले में स्वास्थ्य विभाग के सचिव श्री विकासशील ने आज शाम यहां मंत्रालय में वीडियो कान्फे्रसिंग के जरिए प्रदेश के जिला कलेक्टरों और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों की आपात बैठक ली। उन्होंने इन अधिकारियों को जिला, विकासखंड और ग्राम स्तर पर मलेरिया के रोकथाम के लिए समुचित कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि सबसे पहले मलेरिया के गंभीर मरीजों को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया जाए। इसके लिए विकासखंड स्तर पर उपलब्ध सरकारी अथवा निजी एम्बुलेंस का उपयोग किया जा सकता है। निजी एम्बुलेंस का उपयोग किए जाने की स्थिति में ग्राम स्वच्छता समिति, उप स्वास्थ्य केन्द्र के अनटाईड फंड अथवा प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र की जीवनदीप समिति से उसका भुगतान किया जाए। उन्होंने कहा कि कहीं भी दवाईयों की कमी नहीं होने दी जाएगी। कहीं दवाईयों की कमी होने पर तत्काल स्थानीय स्तर पर दवाईयां खरीद ली जाए। मलेरिया के जांच के लिए आरडी किट के तीस हजार बॉक्स कल जिलों को रवाना कर दिए जाएंगे। मलेरिया की सूचना देने के लिए राज्य स्तर पर नियंत्रण कक्ष की भी स्थापना की गई है, जिसका नम्बर 0771-2220011 है। यह कक्ष चौबीसों घंटे खुला रहेगा। उन्होंने जिला स्तर पर भी नियंत्रण कक्ष स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। संचालक स्वास्थ्य सेवाएं श्री पी.अन्बलगन भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि वर्तमान सीजन मलेरिया के लिए अनुकूल है, इसलिए आगामी तीन महीनों तक एक सुनियोजित रणनीति के तहत मलेरिया के रोकथाम और बचाव के लिए कार्य करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इसके लिए चार तरह की रणनीति बनाई है। इसके तहत सबसे पहले मलेरिया के गंभीर मरीजों को तत्काल अस्पतालों में भर्ती कराया जाएं, फिर उसके उपचार, स्वास्थ्य कर्मचारियों के प्रशिक्षण और प्रचार-प्रसार पर ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि सभी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और मितानिनों को आरडी किट उपलब्ध कराया जाए। प्रभावित गांवों में तत्काल स्वास्थ्य कार्यकर्ता जाकर आरडी किट से मलेरिया की जांच करें और मलेरिया के लक्षण पाए जाने पर एसीटी से उपचार करें। आरडी किटस से मलेरिया की जांच के साथ ही पीड़ितों की स्लाईड भी बनायी जाए और यह सुनिश्चित करें कि उसकी रिर्पोट दो दिन के भीतर आ जाए। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर तैनात टी.बी. कुष्ठ और अन्य स्वास्थ्य कार्यक्रमों के तहत नियुक्त लेब तकनीशियनों को तैनात किया जाए। इसके बाद भी जरूरत पड़ने पर निजी लैब तकनीशियनों की सेवाएं भी ली जा सकती है।
स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि दो दौर तक मच्छरनाशक दवाईयों का छिड़काव हो चुका है। इसके बाद भी मलेरिया के प्रकरण पाए जा रहे हैं। इसलिए प्रभावित गांवों में तीसरे दौर का छिड़काव कराया जाए। उन्होंने कहा कि दवाईयों के छिड़काव के लिए जिला मलेरिया अधिकारी अपने स्तर पर टीम का गठन कर सकते हैं। जिन गांवों में तीसरे दौर में दवाईयों का छिड़काव किया जाएगा, वहां मलेरिया पीड़ितों का रेपिड सर्वे भी किया जाए और आरडी किट से मलेरिया की जांच कर उनका तत्काल उपचार किया जाए। उन्होंने कलेक्टरों से कहा कि मलेरिया से बचाव के लिए स्वास्थ्य अमला काफी नहीं है इसलिए राजस्व विभाग अमले को भी इस काम में सक्रिय किया जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि प्रभावित गांवों में मच्छरनाशक दवा के छिड़काव के साथ ही प्रभावित गांव के नजदीक यदि कोई उच्च जोखिम गांव है, तो वहां भी अनिवार्य रूप से मच्छरनाशक दवा का छिड़काव हो। इस दौरान गांव में मच्छरदानियों को भी मेडिकेटेड किया जाए। साथ ही ग्रामीणों को मच्छरदानियों के उपयोग की सलाह दी जाए। गर्भवती महिलाएं और बच्चे में प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, इसलिए जिस गांव में मलेरिया के एक भी प्रकरण पाए जाते हैं, उस गांव की गर्भवती महिलाओं को मलेरिया से बचाव के लिए प्रति सप्ताह क्लोरोक्वीन की दो गोलियां दी जाए। स्वास्थ्य मितानिनों को यह जवाबदारी दी जाए कि जिस मलेरिया पीड़ित को दवाईयां वितरित की गई है, उसका वह अनिवार्य रूप से सेवन करे।
श्री विकासशील ने कहा कि मलेरिया से निपटने के लिए स्वास्थ्य अमले को तत्काल प्रशिक्षण देने की आवश्यकता है। इसलिए विकासखंड स्तर पर स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का तत्काल प्रशिक्षण आयोजित कर उन्हें आरडी किटस के उपयोग और मलेरिया के उपचार का प्रशिक्षण दिया जाए। उन्होंने कहा कि गांव में बीमार पड़ने पर व्यक्ति सबसे पहले बैगा और गुनिया के पास जाता है। इसलिए सभी कलेक्टर विकासखंड स्तर पर बैगा और गुनियों का भी सम्मेलन आयोजित कर उन्हें यह समझाईश दें कि वे किसी भी प्रकार के बुखार का इलाज ना करें और उनके पास आने वाले मरीजों को स्वास्थ्य कार्यकर्ता अथवा अस्पताल में जाने के लिए प्रेरित करें। इसी तरह विकासखंड स्तर पर पंचायत पदाधिकारियों का भी सम्मेलन आयोजित करें और उन्हें बताएं कि उनके गांव में बुखार पीड़ितों को वे अस्पताल में उपचार के लिए भेजें। यदि किसी गांव में कोई मलेरिया से गंभीर रूप से पीड़ित हैं तो पंचायत प्रतिनिधि उन्हें एम्बुलेंस से प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र अथवा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र तत्काल भेजें। एम्बुलेंस अथवा अन्य वाहन पर होने वाले व्यय का भुगतान ग्राम स्वच्छता समिति से किया जा सकता है।

