संजीवनी ने संजीव को दिया नया जीवन
रायपुर 23 नवम्बर 2011
संजीवनी एक्सप्रेस ने छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले के विकासखण्ड सहसपुर लोहारा के ग्राम छोटे पीपरटोला की आंगनबाड़ी सहायिका जयश्री के नवजात शिशु को नया जीवन दिया है, जिससे प्रभावित होकर शिशु का नाम ही 'संजीव' रख दिया गया। उल्लेखनीय है कि प्रसव से पहले गर्भवती जयश्री की जटिलता काफी बढ़ गई थी। ऐसी स्थिति में उनके परिवार वालो ने 108 नंबर पर डायल कर मदद की गुहार लगायी। सूचना मिलते ही सहसपुर लोहारा के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में काम कर रहे संजीवनी एक्सप्रेस की टीम तत्काल आधे घंटे के भीतर जयश्री के घर के चौखट पर पहुंच गयी। संजीवनी एक्सप्रेस ने गर्भवती महिला को तत्काल भिभौरी के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में दाखिला कराया। 
प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में दाखिल होने के बाद 10 मिनट के भीतर जयश्री ने बालक को जन्म दिया, लेकिन जन्म के बाद बच्चे की निष्क्रियता देखकर परिवारवालों के चेहरे से खुशियां गायब हो गयी। बच्चे की दादी के साथ ही परिवार के अन्य सदस्यों ने रोना-बिलखना शुरू कर दिया। हालांकि संजीवनी एक्सप्रेस का काम गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाने के साथ ही पूरा हो गया था लेकिन संजीवनी की टीम ने बच्चे के शरीर को नीला देखकर एवं परिवार के सदस्यों को हतोत्साहित देखकर नवजात को अपने हाल पर वहां छोड़कर जाना उचित नहीं समझा। आपात स्थिति को देखकर संजीवनी एक्सप्रेस से ही बच्चे को पूरी रफ्तार से सहसपुर लोहारा के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पहुंचाया गया। इस प्रकार समय पर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पहुंचने से बच्चे का वहां बेहतर ईलाज हुआ और उसकी जान बच गयी। बच्चे को नवजीवन मिलने से जयश्री के परिवार वाले संजीवनी से इतना प्रभावित हुये कि बच्चे के नामकरण संस्कार का इंतजार नहीं करते हुए नवजात का नाम संजीव रख दिया ।
उल्लेखनीय है कि कबीरधाम जिले में विगत 3 नवम्बर से शुरू हुए संजीवनी एक्सप्रेस सेवा ने अल्प अवधि में ही अब तक 160 लोगों को अस्पताल पहुंचाकर उनकी जान बचाई है। संजीवनी एक्सप्रेस के जिला प्रबंधक ने बताया कि संजीवनी एक्सप्रेस ने ग्रामीण क्षेत्र की 68 गर्भवती माताओं को सुरक्षित प्रसव के लिये अस्पताल पहुंचाया है। सर्पदंश से पीड़ित 5 लोगों को अस्पताल पहुंचाकर जीवन दान दिया गया। सड़क एवं अन्य दुर्घटनाओं के 52 मामले और 33 अन्य आपात स्थितियों में संजीवनी ने लोगों को अस्पताल की दहलीज पर पहुंचाया। इस प्रकार राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग द्वारा छत्तीसगढ़ में संचालित संजीवनी एक्सप्रेस गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्रसव के लिये अस्पताल तक पहुंचाने में जीवन रेखा साबित हो रही है। इसके अलावा ''108 संजीवनी एक्सप्रेस'' ने गंभीर दुर्घटना, सर्पदंश से पीड़ित और अचानक हुए बीमार लोगों की जान बचाकर अल्प समय में ही अपनी उपयोगिता साबित की है।
प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में दाखिल होने के बाद 10 मिनट के भीतर जयश्री ने बालक को जन्म दिया, लेकिन जन्म के बाद बच्चे की निष्क्रियता देखकर परिवारवालों के चेहरे से खुशियां गायब हो गयी। बच्चे की दादी के साथ ही परिवार के अन्य सदस्यों ने रोना-बिलखना शुरू कर दिया। हालांकि संजीवनी एक्सप्रेस का काम गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाने के साथ ही पूरा हो गया था लेकिन संजीवनी की टीम ने बच्चे के शरीर को नीला देखकर एवं परिवार के सदस्यों को हतोत्साहित देखकर नवजात को अपने हाल पर वहां छोड़कर जाना उचित नहीं समझा। आपात स्थिति को देखकर संजीवनी एक्सप्रेस से ही बच्चे को पूरी रफ्तार से सहसपुर लोहारा के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पहुंचाया गया। इस प्रकार समय पर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पहुंचने से बच्चे का वहां बेहतर ईलाज हुआ और उसकी जान बच गयी। बच्चे को नवजीवन मिलने से जयश्री के परिवार वाले संजीवनी से इतना प्रभावित हुये कि बच्चे के नामकरण संस्कार का इंतजार नहीं करते हुए नवजात का नाम संजीव रख दिया ।
उल्लेखनीय है कि कबीरधाम जिले में विगत 3 नवम्बर से शुरू हुए संजीवनी एक्सप्रेस सेवा ने अल्प अवधि में ही अब तक 160 लोगों को अस्पताल पहुंचाकर उनकी जान बचाई है। संजीवनी एक्सप्रेस के जिला प्रबंधक ने बताया कि संजीवनी एक्सप्रेस ने ग्रामीण क्षेत्र की 68 गर्भवती माताओं को सुरक्षित प्रसव के लिये अस्पताल पहुंचाया है। सर्पदंश से पीड़ित 5 लोगों को अस्पताल पहुंचाकर जीवन दान दिया गया। सड़क एवं अन्य दुर्घटनाओं के 52 मामले और 33 अन्य आपात स्थितियों में संजीवनी ने लोगों को अस्पताल की दहलीज पर पहुंचाया। इस प्रकार राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग द्वारा छत्तीसगढ़ में संचालित संजीवनी एक्सप्रेस गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्रसव के लिये अस्पताल तक पहुंचाने में जीवन रेखा साबित हो रही है। इसके अलावा ''108 संजीवनी एक्सप्रेस'' ने गंभीर दुर्घटना, सर्पदंश से पीड़ित और अचानक हुए बीमार लोगों की जान बचाकर अल्प समय में ही अपनी उपयोगिता साबित की है।
क्रमांक-3793/सुनीता

