दाहिने दिल का हुआ कामयाब ऑपरेशन : देश का पहला मामला छत्तीसगढ़ में
हृदयाघात के बाद राज्य सरकार के संजीवनी कोष की मदद से हुआ इलाज
रायपुर 24 नवम्बर 2010
मनुष्य का दिल छाती के बायीं ओर होता है, लेकिन रायपुर के राजेन्द्र नगर निवासी पचपन वर्षीय श्री कृष्णा खंदार का दिल छाती के दाहिनीं ओर धड़कता है और उन्हें इस बात की जानकारी अपने उम्र के पचपनवें पड़ाव पर हृदयाघात होने पर हुई। श्री कृष्णा को नवम्बर के पहले सप्ताह में हार्टअटैक आने पर डॉ. भीमराव अम्बेडकर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत गंभीर होने पर नजदीक के एस्कार्ट हार्ट सेंटर रिफर कर दिया गया। डॉक्टर भी श्री कृष्णा का दिल दाहिनीं ओर होने पर अचंभित थे। एस्कार्ट हार्ट सेंटर के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. सतीश सूर्यवंशी ने दिल्ली के अन्य विशेषज्ञ डॉक्टरों से सलाह लेकर 9 नवम्बर को श्री कृष्णा के हृदय का सफलतापूर्वक आपरेशन कर दिया। आपरेशन के बाद मरीज पूरी तरह स्वस्थ है। इस आपरेशन का पूरा खर्च राज्य शासन द्वारा संजीवनी कोष से दिया गया है।
डॉ. सूर्यवंशी ने बताया कि श्री कृष्णा खंदार का केवल हृदय ही नहीं बल्कि उनका लीवर भी उल्टे स्थान पर है। सामान्यत: व्यक्ति का लीवर दाहिनीं ओर होता है, लेकिन उनका लीवर बायीं ओर है। उन्होंने बताया कि साठ हजार व्यक्तियों में से किसी एक का हृदय अपने स्थान से दूसरी ओर होता है। छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि पूरे देश में यह पहला प्रकरण है, जिनका दिल दाहिनीं ओर हो और हार्टअटैक आने के बाद उनका सफलतापूर्वक आपरेशन किया गया हो। चिकित्सा विज्ञान की भाषा में इसे 'डेक्सट्रोकाडिया विथ साइट्स इनवर्सेस' कहा जाता है। ऐसे मरीज को हृदयाघात होने पर आपरेशन में काफी दिक्कतें होती है। डॉ. सूर्यवंशी ने बताया कि मरीज श्री कृष्णा को गंभीर हालत में एस्कार्ट में लाया गया था। परीक्षण में पाया गया कि मरीज का दिल दाहिनी ओर है और हृदय की मुख्य नली में ब्लॉकेज था। मरीज के दिल की धड़कन बहुत धीमी थी, जिसे सामान्य करने के लिए तुरंत तार डालकर धड़कन सामान्य किया गया। इसके बाद उनकी तुरंत एंज्योप्लास्टी की गई। दिल की धड़कन को सामान्य बनाये रखने के लिए उनके हृदय में पेसमेकर भी लगाया गया है। इस पूरे आपरेशन के लिए मरीज से कोई पैसा नहीं लिया गया है। मरीज गरीबी रेखा श्रेणी के होने के कारण पूरा खर्च राज्य शासन उठा रहा है।
घर में ही कारपेंटरी करके गुजारा चलाने वाले श्री कृष्णा खंदार ने बताया कि उसे तो पता ही नहीं था, कि उनका दिल दाहिनीं ओर है। हार्ट अटैक आने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दिल दूसरे स्थान पर होने पर भी उसे कभी कोई परेशानी नहीं हुई। आपरेशन के खर्च के बारे में पूछने पर श्री कृष्णा ने बताया कि उन्हें कोई पैसा नहीं लगा है। गरीबी रेखा कार्ड दिखाने पर डॉक्टरों ने राज्य सरकार की संजीवनी कोष की सहायता से आपरेशन कर दिया है। मरीज के बड़े बेटे ने बताया कि हम लोग गरीब हैं, लेकिन पिता जी के हृदय का हरहाल आपरेशन कराने का हमने फैसला ले लिया था, इसके लिए हमने अपने घर को बेचने अथवा गिरवी रखने का भी निर्णय ले लिया था, लेकिन यहां डॉक्टरों से राज्य सरकार की संजीवनी कोष योजना की जानकारी मिली और योजना के तहत स्वीकृति लेने का काम भी डॉक्टरों ने ही किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की मदद से उनका घर बिकने से बच गया।

