सिकलसेल को राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम में शामिल कराने के प्रस्ताव के साथ चतुर्थ अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का समापन
तीन वर्ष के भीतर छत्तीसगढ़ के सभी बच्चों और महिलाओं की स्क्रीनिंग होगी-श्री अमर अग्रवाल
सिकलसेल मरीजों के लिए डॉ. भीमराव अम्बेडकर अस्पताल में अलग वार्ड बनेगा
रायपुर 26 नवम्बर 2010
सिकलसेल को राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम में शामिल कराने के प्रस्ताव के साथ सिकलसेल पर पांच दिनों से चल रहे चतुर्थ अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आज यहां समापन हो गया। समापन समारोह के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री श्री अमर अग्रवाल ने कहा कि सिकलसेल को राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम में शामिल कराने के लिए राज्य शासन की ओर से हर संभव प्रयास किए जाएंगे। इसके लिए प्रधानमंत्री और केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री को प्रस्ताव भेजा जाएगा। इसके साथ वे स्वंय स्वास्थ्य मंत्रियों की राष्ट्रीय स्वास्थ्य समिति में भी इसकी मांग करेंगे। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन के माध्यम से राज्य सरकार को जो भी सुझाव प्राप्त हुए हैं, उसका उपयोग सिकलसेल के लिए नीति बनाने में किया जाएगा। अंतर्राष्ट्रीय सिकलसेल संगठन फ्रांस की अध्यक्ष मेडम इवाइज ई. बदासंयू भी इस अवसर पर विशेष रूप से उपस्थित थीं।
श्री अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ सहित अनेक राज्यों में लाखों लोग सिकलिंग से पीड़ित हैं। इसलिए सिकलसेल से बचाव के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम होना ही चाहिए। जिन देशों में सिकलसेल को राष्ट्रीय कार्यक्रमों में शामिल किया गया है, वहां बेहतर नतीजे सामने आए हैं। भारत में भी यदि इसे राष्ट्रीय कार्यक्रम में शामिल कर लिया जाता है, तो लाखों सिकलिंग पीड़ितों को बड़ी राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की घोषणा के अनुरूप छत्तीसगढ़ में सिकलसेल से बचाव के लिए एकीकृत कार्यक्रम बनाया जाएगा और तीन वर्ष के भीतर राज्य के सभी बच्चों, युवाओं और महिलाओं की स्क्रीनिंग का काम पूरा किया जाएगा। सिकलसेल के मरीजों की काउंसलिंग और उपचार के लिए रायपुर के डॉ. भीमराव अम्बेडकर अस्पताल में एक अलग वार्ड भी बनाया जाएगा, जहां मरीजों को नियमित सेवाएं मिलेगी। इसके साथ ही जागरूकता अभियान चलाया जाएगा और सिकलसेल के मरीजों को आपस में विवाह के लिए हतोत्साहित किया जाएगा, ताकि भावी पीढ़ी इस बीमारी से मुक्त हो।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सम्मेलन के शुभारंभ अवसर पर भारत के पूर्व राष्ट्रपति ने 2030 तक सिकलसेल के पूरी तरह निदान की बात कही है। इस दिशा में राज्य सरकार आगे बढ़ेगी। राज्य में सिकलसेल पर अनुसंधान को बढ़ावा दिया जाएगा। उन्होंने आशा व्यक्त की कि जिस तरह जीन थेरापी और स्टेमसेल पर अनुसंधान हो रहे हैं, उससे आने वाले समय में निश्चित रूप से सिकलसेल के इलाज का कोई कामयाब उपचार संभव हो सकेगा। इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्री अग्रवाल ने विभिन्न देशों से आए प्रतिभागियों के लिए सिकलसेल पर आयोजित पोस्टर प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित किया। जैमेका के सिकलसेल विशेषज्ञ डॉ. जी.आर. सर्जेंट ने इस अवसर पर कहा कि इस अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन में सिकलसेल पर पहली बार विस्तृत चर्चा हुई है और इसके बेहतर परिणाम देखने को मिलेंगे। उन्होंने कहा कि भारत में सिकलसेल से बड़ी संख्या में लोग प्रभावित है। इसलिए इसे राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम में शामिल कर व्यापक स्तर पर इस बीमारी के खिलाफ अभियान छेड़ना चाहिए। राष्ट्रीय कार्यक्रम में शामिल होने के बाद आर्थिक मदद भी मिलेगी।
इसके पहले सम्मेलन के आयोजन समिति के सचिव और बायोकेमेस्ट्री विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. पी.के.पात्रा ने सम्मेलन में पांच दिनों तक हुए विचार-विमर्श के निष्कर्षों की जानकारी दी। इस अवसर पर संचालक स्वास्थ्य सेवाएं श्री पी.अन्बलगन, चिकित्सा शिक्षा संचालक डॉ. सुबीर मुखर्जी, पन्द्रह देशो के प्रतिनिधि और देश के विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधि उपस्थित थे। अंत में गुजरात के डॉ. ज्योतिष पटेल ने सम्मेलन आए प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

