अस्पतालों में प्रसव की संख्या दो गुनी से ज्यादा हुई:सात माह में डेढ़ लाख से अधिक महिलाओं ने कराया प्रसव
21 करोड़ 56 लाख रूपए की प्रोत्साहन राशि का भुगतान
रायपुर 29 नवम्बर 2010
छत्तीसगढ़ के सरकारी और निजी क्षेत्र के अस्पतालों में प्रसव कराने वाली महिलाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। यह राज्य शासन द्वारा चलाए जा रहे जागरूकता अभियान का ही नतीजा है कि पिछले पांच वर्षों में राज्य में संस्थागत प्रसव की संख्या दो-गुनी से ज्यादा हो गई है। संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2005 में छत्तीसगढ़ में जननी सुरक्षा योजना लागू की गई्र थी, तब राज्य में अस्पतालों में प्रसव की संख्या केवल 23.55 प्रतिशत थी, जो वर्ष 2009-10 में बढ़कर 50 प्रतिशत से अधिक हो गई है। चालू वित्तीय वर्ष में अप्रैल 10 से लेकर 31 अक्टूबर 2010 तक एक लाख 56 हजार माताओं ने जननी सुरक्षा योजना के तहत अस्पतालों और घरों में महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की देखरेख में सुरक्षित प्रसव कराया है। योजना के तहत अस्पताल और घरों में सुरक्षित प्रसव कराने वाली इन महिलाओं को 21 करोड़ 55 लाख रूपए की प्रोत्साहन राशि का भुगतान किया गया है।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री श्री अमर अग्रवाल ने बताया कि सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा देने के साथ ही मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए केन्द्र सरकार की सहयोग से वर्ष 2005 से जननी सुरक्षा योजना लागू की गई है। इस योजना के लागू होने के बाद मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में काफी कमी आई है और यहां शिशु मृत्यु दर 57 प्रति हजार हो गई है, जो राष्ट्रीय औसत 55 प्रति हजार के बिलकुल नजदीक है। इसी तरह मात्ृ मृत्यु दर भी 335 प्रति लाख हो गई है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में वर्ष 2012 तक शिशु मृत्यु दर तीस प्रति हजार और मातृ मृत्यु दर एक सौ प्रति लाख लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष एक अप्र्रैल से 31 अक्टूबर 2010 तक कबीरधाम जिले में तीन हजार 897, राजनांदगांव में सात हजार 391, दुर्ग में ग्यारह हजार 505, रायपुर में 26 हजार 236, महासमुंद में सात हजार 060, बिलासपुर में 25 हजार 652, जांजगीर-चांपा में नौ हजार 713, कोरबा में एक हजार 311, रायगढ़ में आठ हजार 430, कोरिया में पांच हजार 156, सरगुजा में 23 हजार 572, जशपुर में दो हजार 306, धमतरी में सात हजार 130, उत्तर बस्तर (कांकेर) में चार हजार 405, बस्तर में नौ हजार 944, दक्षिण बस्तर (दंतेवाड़ा) एक हजार 605, नारायणपुर में 493 और बीजापुर जिले में 725 महिलाओं ने अस्पतालों और घरों में बहुउद्देशीय महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की देखरेख में सुरक्षित प्रसव कराया है।
ज्ञातव्य है कि जननी सुरक्षा योजना के अन्तर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में तैनात मितानिनों द्वारा अस्पताल में प्रसव कराने के लिए महिलाओं को प्रोत्साहित किया जाता है और उन्हें प्रसव के लिए अस्पताल लाया जाता है। गर्भवती माताएं भी प्रसव के लिए सीधे अस्पताल जा सकती हैं। अस्पताल पहुंचने पर उन्हें चार सौ रूपए परिवहन खर्च दिया जाता है। इसके अलावा अस्पताल में प्रसव कराने पर ग्रामीण महिला को एक हजार 400 रूपए तथा शहरी महिला को एक हजार रूपए की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। इसी प्रकार यदि ग्रामीण महिला मितानिनों अथवा बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की देखरेख में अपने घर में प्रसव कराती हैं, तो उन्हें पांच सौ रूपए की राशि दी जाती है। गर्भवती माताओं द्वारा योजना के तहत मान्यता प्राप्त निजी अस्पतालों में प्रसव कराने पर भी उन्हें प्रोत्साहन राशि दी जाती है। इसके अलावा गर्भवती माताओं को अस्पताल में प्रसव के लिए प्रोत्साहित करने वाली मितानिनों को भी प्रति प्रकरण दौ सौ रूपए की प्रोत्साहन राशि दी जाती है।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री श्री अमर अग्रवाल ने बताया कि सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा देने के साथ ही मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए केन्द्र सरकार की सहयोग से वर्ष 2005 से जननी सुरक्षा योजना लागू की गई है। इस योजना के लागू होने के बाद मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में काफी कमी आई है और यहां शिशु मृत्यु दर 57 प्रति हजार हो गई है, जो राष्ट्रीय औसत 55 प्रति हजार के बिलकुल नजदीक है। इसी तरह मात्ृ मृत्यु दर भी 335 प्रति लाख हो गई है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में वर्ष 2012 तक शिशु मृत्यु दर तीस प्रति हजार और मातृ मृत्यु दर एक सौ प्रति लाख लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष एक अप्र्रैल से 31 अक्टूबर 2010 तक कबीरधाम जिले में तीन हजार 897, राजनांदगांव में सात हजार 391, दुर्ग में ग्यारह हजार 505, रायपुर में 26 हजार 236, महासमुंद में सात हजार 060, बिलासपुर में 25 हजार 652, जांजगीर-चांपा में नौ हजार 713, कोरबा में एक हजार 311, रायगढ़ में आठ हजार 430, कोरिया में पांच हजार 156, सरगुजा में 23 हजार 572, जशपुर में दो हजार 306, धमतरी में सात हजार 130, उत्तर बस्तर (कांकेर) में चार हजार 405, बस्तर में नौ हजार 944, दक्षिण बस्तर (दंतेवाड़ा) एक हजार 605, नारायणपुर में 493 और बीजापुर जिले में 725 महिलाओं ने अस्पतालों और घरों में बहुउद्देशीय महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की देखरेख में सुरक्षित प्रसव कराया है।
ज्ञातव्य है कि जननी सुरक्षा योजना के अन्तर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में तैनात मितानिनों द्वारा अस्पताल में प्रसव कराने के लिए महिलाओं को प्रोत्साहित किया जाता है और उन्हें प्रसव के लिए अस्पताल लाया जाता है। गर्भवती माताएं भी प्रसव के लिए सीधे अस्पताल जा सकती हैं। अस्पताल पहुंचने पर उन्हें चार सौ रूपए परिवहन खर्च दिया जाता है। इसके अलावा अस्पताल में प्रसव कराने पर ग्रामीण महिला को एक हजार 400 रूपए तथा शहरी महिला को एक हजार रूपए की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। इसी प्रकार यदि ग्रामीण महिला मितानिनों अथवा बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की देखरेख में अपने घर में प्रसव कराती हैं, तो उन्हें पांच सौ रूपए की राशि दी जाती है। गर्भवती माताओं द्वारा योजना के तहत मान्यता प्राप्त निजी अस्पतालों में प्रसव कराने पर भी उन्हें प्रोत्साहन राशि दी जाती है। इसके अलावा गर्भवती माताओं को अस्पताल में प्रसव के लिए प्रोत्साहित करने वाली मितानिनों को भी प्रति प्रकरण दौ सौ रूपए की प्रोत्साहन राशि दी जाती है।
क्रमांक-3953/कुशराम

