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तबाही की ओर ले जाता है नशा

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When Feb 18, 2010
from 04:15 PM to 04:15 PM
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 विशेष-लेख

 18 फरवरी 2010

  शराब, गांजा और भांग सहित हर प्रकार के मादक द्रव्यों का नशा इंसान को तबाही की ओर ले जाता है। कहा भी गया है कि जीवन अनमोल है। नशे के सेवन से इंसान का यह अनमोल जीवन समय से पहले ही मौत का शिकार हो जाता है।

  नशा एक ऐसी बुराई है जो व्यक्ति को तन-मन-धन से खोखला कर देता है। इससे व्यक्ति के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और उसके परिवार की आर्थिक स्थिति दिन-ब-दिन बिगड़ती जाती है। इस बुराई को समाप्त करने के लिए शासन के साथ ही समाज के हर तबके को आगे आना होगा। यह चिंतनीय है कि जबसे बाजार में गुटका पाउच का प्रचलन हुआ है, तबसे नशे की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। आज बच्चे से लेकर बुजुर्ग भी गुटका पाउच के चपेट में है। यह अत्यंत दुखद है कि नशा करने वाला हर व्यक्ति जानता है कि नशे की आदत उसके लिए नुकसानदायक है, बावजूद इसके इस प्रवृत्ति में लगातार बढ़ोतरी देखी जा सकती है। राज्य शासन द्वारा नशे के विरूध्द जागरूकता लाने के लिए विगत छह जून को नशामुक्ति महारैली का आयोजन किया गया था, जिसमें प्रदेश के 18 जिले के 146 विकासखंड और उससे संबध्द गांवों के जनप्रतिनिधि, शैक्षिक संस्थाएं, महिला स्वसहायता समूह और जनसामान्य बड़ी संख्या में सम्मिलित हुए थे।

  नशे के लिए समाज में शराब, गांजा, भांग, अफीम और धूम्रपान सहित चरस, स्मैक, कोकिन, ब्राउन शुगर जैसे घातक मादक दवाओं और पदार्थों का उपयोग किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में ज्यादातर तम्बाखू के विभिन्न रूप- जर्दा, गुटखा, खैनी, तंबाखू पेस्ट, मंजन, बीड़ी, सिगरेट, हुक्का, चिलम और शराब का प्रचलन देखने को मिलता है।  इन जहरीले और नशीले पदार्थों से व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक और आर्थिक हानि के साथ-साथ सामाजिक वातावरण भी प्रदूषित होता है। समाज में पनप रहे विभिन्न प्रकार के अपराधों का एक कारण नशा भी है। नशे की प्रवृत्ति में वृध्दि के साथ-साथ अपराधियों की संख्या में भी वृध्दि हो रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार शराब को छोड़कर दुनिया में लगभग पांच करोड़ लोग मादक पदार्थों के सेवन से जुड़े हैं। एक अनुमान के अनुसार छत्तीसगढ़ में भी लगभग 70 प्रतिशत जनसंख्या किसी न किसी प्रकार के नशापान करने की आदि है।

   नशा किसी भी प्रकार का हो उससे शरीर को भारी नुकसान होता है, पर आजकल के नवयुवक शराब और धूम्रपान को फैशन और शौक के लिए उपयोग में ला रहे हैं, यह अत्यंत गंभीर और चिंतनीय विषय है। इन युवाओं को अपने स्वास्थ्य की चिंता करते हुए यह जानना चाहिए कि धूम्रपान से फेफडे नष्ट हो जाते हैं और इसके सेवन से कैंसर तक होता है। इसी तरह तंबाखू के सेवन से तपेदिक, निमोनिया और सांस की बीमारियों सहित मुख फेफडे और गुर्दे में कैंसर होने की संभावनाएं रहती हैं। इससे चक्रीय हृदय रोग और उच्च रक्तचाप की शिकायत भी रहती है। अधिक शराब सेवन से लिवर खराब हो जाता है, जबकि अफीम, चरस, हेरोइन तथा स्मैक आदि से व्यक्ति पागल तथा सुप्तावस्था में हो जाता है। कोकीन, चरस, अफीम से ऐसे उत्तेजना लाने वाले पदार्थ है जिसके प्रभाव में व्यक्ति अपराध कर बैठता है। यदि हमारे आस-पास कोई व्यक्ति धूम्रपान करता है तो उसका बुरा प्रभाव भी हमारे शरीर पर पड़ता है। इसलिए न खुद धूम्रपान करें और न ही किसी को करने दे।

   धुआं रहित तंबाकू अर्थात् सुंघनी, गुड़ाखू, गुटका वाले तम्बाखू की आदत से हृदय रोग हो सकता है जबकि धूम्रपान छोड़ने के एक वर्ष बाद धमनी के हृदय रोग का खतरा 50 प्रतिशत तक कम हो जाता है और इसका लाभ जारी रहता है। फेफड़े के कैंसर, पुराने अवरोधक, फेफड़े के रोगों और आघात का खतरा अपेक्षाकृत घट जाता है। पर घटने का क्रम बहुत ही धीरे-धीरे होता है। इसी तरह धूम्रपान बंद करने के 10 से 14 वर्षों के बाद कैंसर से मृत्यु का खतरा काफी कम हो जाता है। नशीले पदार्थों के सेवन से शारीरिक, मानसिक, नैतिक और आर्थिक दुष्प्रभाव हो रहे हैं। इन पदार्थों से छुटकारा दिलाने के लिए पीड़ित व्यक्तियों का उपचार आवश्यक है। इसके लिए शासन के सहयोग से स्वैच्छिक संस्थाओं द्वारा राजधानी रायपुर में संकल्प व्यसन मुक्ति केंद्र तथा माँ डिंडेश्वरी नशा मुक्ति केंद्र बिलासपुर के नजदीक सिरगिट्टी में संचालित है। इन केंद्रों में मादक द्रव्य अथवा मादक पदार्थों का सेवन करने वाले व्यक्तियों को छुटकारा दिलाने के लिए नि:शुल्क परामर्श सहित उपचार किए जाते हैं। इन केंद्रों में कार्यरत सामाजिक कार्यकर्ता एवं परामर्शदाता घर-घर जाकर नशे के दुष्परिणामों और लक्षणों से परिवारों को अवगत कराते हैं तथा नशे से पीड़ित व्यक्तियों की पहचान कर नशे की आदत को छोड़ने का परामर्श और उपचार की नि:शुल्क व्यवस्था करते हैं। नशामुक्ति के लिए इन केंद्रों में अब काफी लोग आने लगे हैं। इन केंद्रो का विस्तार अब छत्तीसगढ़ राज्य के प्रत्येक जिले में करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

  राज्य सरकार द्वारा विभिन्न सूचना तंत्रों के माध्यम से नशापान के विरूध्द लोगों में जनजागरूकता लाई जा रही है। राज्य के विभिन्न महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थानों में नशा करने से होने वाले हानिे को प्रदर्शित करते हुए होर्डिंग्स लगाए गए हैं। विकासखंड एवं जिला स्तर पर नशामुक्ति पर आधारित लोक नाटय, लोकगीत, लोकनृत्य प्रतियोगिताएं आयोजित की गई और जिला स्तरों पर प्रथम स्थान प्राप्त दलों को राज्य स्तरीय लोकोत्सव में प्रस्तुति का अवसर प्रदान कर पुरस्कृत किया गया। नशामुक्ति के लिए 30 जनवरी को नशामुक्ति संकल्प और शपथ दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसी प्रकार 31 मई अंतर्राष्ट्रीय धूम्रपान निषेध दिवस, 26 जून नशा निवारण्ा दिवस, 2 से 8 अक्टूबर मद्यनिषेध सप्ताह और 18 दिसम्बर को मद्य निषेध दिवस के रूप में मनाया जाता है। पर नशे को जड़ से मिटाने के लिए हमें केवल कुछ दिवसों पर ही संकल्प नहीं लेना है। अपितु इसके लिए हर दिवस को नशामुक्ति दिवस के रूप में मनाना चाहिए।

   मादक पदार्थों का सेवन करने वाले या बेचने वालों के लिए दंड का भी प्रावधान है। यदि कोई युवक मादक पदार्थों के साथ पकड़ा जाता है तो उसे आर्थिक दंड या सजा दिए जाने का विधान है। यह सजा न्यायालय द्वारा छह माह से एक वर्ष तक हो सकती है। एक बार मादक पदार्थों के साथ पकड़े जाने पर उस व्यक्ति का नाम अपराधी की फाईल में दर्जा करा दिया जाता है। यदि कोई व्यक्ति मेडिकल ड्रग लाईसेंस के बिना बेहोशी की हालत में अथवा नशीली दवाओं की बिक्री-खरीदीे, आयात-निर्यात करते हुए अथवा लायसेंस के बीना उसका उत्पादन करते हुए पकड़ा जाता हो, तो उसे कठोर दंड दिया जाता है। पहली बार इस अपराध के लिए न्यूनतम 10 वर्ष की कठोर सजा और एक लाख रूपए जुर्माने तथा अधिकतम 30 साल की सजा व तीन लाख रूपए जुर्माने का प्रावधान है।  

   नशा मुक्ति के लिए चाहे कितने ही प्रयास क्यों न किए जाए लेकिन नशे से मुक्ति पाने के लिए स्वयं नशा पीड़ितों को दृढ़ संकल्पित होना होगा, तभी नशा मुक्त राज्य की स्थापना का सपना साकार होगा। इन मादक द्रव्यों पर पैसा और जीवन नष्ट करना सर्वथा अनुचित है। इसलिए नशे की बुरी आदत को छोड़कर देश-प्रदेश के विकास और स्वस्थ समाज के निर्माण में रचनात्मक भूमिका निभा सकते हैं।

    . सुनीता केशरवानी

 विशेष लेख क्र. 4089/18 फरवरी 2010

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