जननी सुरक्षा योजना के अन्तर्गत दो लाख से अधिक महिलाओं ने कराया सुरक्षित प्रसव
माताओं को मिला 21 करोड़ 22 लाख रूपए से अधिक की प्रोत्साहन राशि
रायपुर 21 फरवरी 2010
छत्तीसगढ़ में माताओं को सुरक्षित प्रसव की सुविधा प्रदान करने के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत संचालित जननी सुरक्षा योजना के अन्तर्गत अप्रैल 2009 से दिसम्बर 2009 तक नौ महीनों में दो लाख एक हजार 160 गर्भवती माताओं ने संस्थागत प्रसव कराया है। इनमें एक लाख 42 हजार 409 माताओं ने अस्पतालों में और 58 हजार 751 माताओं ने अपने घरों में स्वास्थ्य मितानिनों की देखरेख में सुरक्षित प्रसव कराया है। संस्थागत प्रसव कराने पर इन महिलाओं को प्रोत्साहन स्वरूप 21 करोड़ 22 लाख 20 हजार रूपए की प्रोत्साहन राशि दी गई है।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री श्री अमर अग्रवाल ने बताया कि सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा देने के साथ ही मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाना जननी सुरक्षा योजना का मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में इस योजना के लागू होने के बाद मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में काफी कमी आई है और छत्तीसगढ़ शिशु मृत्यु दर के राष्ट्रीय औसत 55 प्रति हजार के बिलकुल नजदीक आ गया है। इसी तरह मात्ृ मृत्यु दर में भी काफी कमी आई है। उन्होंने बताया कि संस्थागत प्रसव कराने वालों को दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि के फलस्वरूप अस्पतालों में प्रसव कराने वालों की संख्या लगातार बढ़ी है। उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2007-08 में एक लाख एक हजार, वर्ष 2008-09 में एक लाख 34 हजार और वित्तीय वर्ष 2009-10 में एक अप्रैल 2009 से 31 दिसम्बर 2009 तक दो लाख एक हजार 160 महिलाओं ने सुरक्षित प्रसव कराया। योजना के तहत एक अप्रैल 2009 से 31 दिसम्बर 2009 तक नौ महीनों में बस्तर और नारायणपुर जिले में 17 हजार 852, बिलासपुर जिले में 28 हजार 386, दंतेवाड़ा और बीजापुर जिले में 457, धमतरी जिले में नौ हजार 741, दुर्ग जिले में 17 हजार 372 और जांजगीर-चांपा जिले में नौ हजार 274 महिलाओं ने सुरक्षित प्रसव कराया। इसी तरह जशपुर जिले में तीन हजार 857, कांकेर जिले में छह हजार 656, कबीरधाम जिले में आठ हजार 823, रायगढ़ जिले में बारह हजार 149, रायपुर जिले में 23 हजार 597, राजनांदगांव जिले में नौ हजार 525 और सरगुजा जिले में 25 हजार 520 लोगों ने सुरक्षित प्रसव कराया।
उल्लेखनीय है कि जननी सुरक्षा योजना के अन्तर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में तैनात मितानिनों द्वारा अस्पताल में प्रसव कराने के लिए महिलाओं को प्रोत्साहित किया जाता है और उन्हें प्रसव के लिए अस्पताल ले जाया जाता है। गर्भवती माताएं भी प्रसव के लिए सीधे अस्पताल जा सकती हैं। अस्पताल पहुंचने पर उन्हें चार सौ रूपए परिवहन व्यय दिया जाता है। इसके अलावा संस्थागत प्रसव पर ग्रामीण महिला को एक हजार 400 रूपए तथा शहरी महिला को एक हजार रूपए की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। इसी प्रकार यदि ग्रामीण महिला मितानिनों की देखरेख में अपने घर में प्रसव कराती हैं, तो उन्हें पांच सौ रूपए की राशि दी जाती है। इसके अलावा गर्भवती माताओं को अस्पताल में प्रसव के लिए प्रोत्साहित करने वाली मितानिनों को भी प्रति प्रकरण दौ सौ रूपए की प्रोत्साहन राशि दी जाती है।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री श्री अमर अग्रवाल ने बताया कि सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा देने के साथ ही मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाना जननी सुरक्षा योजना का मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में इस योजना के लागू होने के बाद मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में काफी कमी आई है और छत्तीसगढ़ शिशु मृत्यु दर के राष्ट्रीय औसत 55 प्रति हजार के बिलकुल नजदीक आ गया है। इसी तरह मात्ृ मृत्यु दर में भी काफी कमी आई है। उन्होंने बताया कि संस्थागत प्रसव कराने वालों को दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि के फलस्वरूप अस्पतालों में प्रसव कराने वालों की संख्या लगातार बढ़ी है। उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2007-08 में एक लाख एक हजार, वर्ष 2008-09 में एक लाख 34 हजार और वित्तीय वर्ष 2009-10 में एक अप्रैल 2009 से 31 दिसम्बर 2009 तक दो लाख एक हजार 160 महिलाओं ने सुरक्षित प्रसव कराया। योजना के तहत एक अप्रैल 2009 से 31 दिसम्बर 2009 तक नौ महीनों में बस्तर और नारायणपुर जिले में 17 हजार 852, बिलासपुर जिले में 28 हजार 386, दंतेवाड़ा और बीजापुर जिले में 457, धमतरी जिले में नौ हजार 741, दुर्ग जिले में 17 हजार 372 और जांजगीर-चांपा जिले में नौ हजार 274 महिलाओं ने सुरक्षित प्रसव कराया। इसी तरह जशपुर जिले में तीन हजार 857, कांकेर जिले में छह हजार 656, कबीरधाम जिले में आठ हजार 823, रायगढ़ जिले में बारह हजार 149, रायपुर जिले में 23 हजार 597, राजनांदगांव जिले में नौ हजार 525 और सरगुजा जिले में 25 हजार 520 लोगों ने सुरक्षित प्रसव कराया।
उल्लेखनीय है कि जननी सुरक्षा योजना के अन्तर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में तैनात मितानिनों द्वारा अस्पताल में प्रसव कराने के लिए महिलाओं को प्रोत्साहित किया जाता है और उन्हें प्रसव के लिए अस्पताल ले जाया जाता है। गर्भवती माताएं भी प्रसव के लिए सीधे अस्पताल जा सकती हैं। अस्पताल पहुंचने पर उन्हें चार सौ रूपए परिवहन व्यय दिया जाता है। इसके अलावा संस्थागत प्रसव पर ग्रामीण महिला को एक हजार 400 रूपए तथा शहरी महिला को एक हजार रूपए की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। इसी प्रकार यदि ग्रामीण महिला मितानिनों की देखरेख में अपने घर में प्रसव कराती हैं, तो उन्हें पांच सौ रूपए की राशि दी जाती है। इसके अलावा गर्भवती माताओं को अस्पताल में प्रसव के लिए प्रोत्साहित करने वाली मितानिनों को भी प्रति प्रकरण दौ सौ रूपए की प्रोत्साहन राशि दी जाती है।
क्रमांक-4124/कुशराम

