मुख्यमंत्री बाल हृदय सुरक्षा योजना से सैकड़ों बच्चों को मिली सुरक्षा
अब तक सोलह सौ बच्चों के हृदय का सफल आपरेशन
रायपुर 10 दिसम्बर 2010
मुख्यमंत्री बाल हृदय सुरक्षा योजना के माध्यम से हृदय रोग से पीड़ित सैकड़ों बच्चे अब सामान्य जीवन यापन कर रहे हैं। इस योजना के तहत दो वर्षों के भीतर एक हजार छह सौ बच्चों के हृदय का कामयाब आपरेशन हो चुका है। इन बच्चों के आपरेशन के लिए राज्य सरकार द्वारा 12 करोड़ 93 लाख से अधिक राशि का भुगतान अस्पतालों को किया गया है।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि अब तक जिन बच्चों के हृदय का आपरेशन हुआ है, उनमें रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल रायपुर में 374, बी.एस.आर. भिलाई में 498, अपोलो बिलासपुर में 250 और एस्कार्ट हॉस्पिटल रायपुर में 386 बच्चों के हृदय का आपरेशन हुआ है। इसके अलावा 75 बच्चों के हृदय का आपरेशन राज्य के बाहर के अस्पतालों में हुआ है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की पहल पर 14 जुलाई 08 को मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना शुरू की गई थी। गरीब और जरूरतमंदो के लिए इस तरह की योजना शुरू करने वाला छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है। बच्चों के हृदय के आपरेशन के लिए राज्य शासन द्वारा चार निजी अस्पतालों बी.एस.आर. अपोलो अस्पताल भिलाई, अपोलो अस्पताल बिलासपुर, रामकृष्ण अस्पताल रायपुर और एस्कार्ट अस्पताल रायपुर से अनुबंध किया गया है। योजना के तहत दिल से संबंधित सात प्रकार की बीमारियों का इलाज किया जाता है। इस योजना के तहत हृदय रोग से पीड़ित एक से पन्द्रह वर्ष के बच्चों के हृदय का नि:शुल्क आपरेशन इन निजी अस्पतालों में किया जाता है। हृदय की शल्य क्रिया के साथ ही हृदय के वाल्व भी इस योजना के अन्तर्गत बदले जाते हैं।
इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें गरीबी रेखा की सीमा का कोई बंधन नहीं रखा गया है। राज्य शासन द्वारा हृदय के सामान्य अथवा साधारण सर्जरी के लिए अधिकतम एक लाख तीस हजार और यदि हृदय का वाल्व बदला जाता है, तो उसके लिए अलग से अधिकतम 50 हजार रूपए की राशि अस्पताल प्रबंधन को दी जाती है। मरीज के पंजीयन और भर्ती की प्रक्रिया से लेकर इलाज तक अधिकतम 20 दिन तक की जिम्मेदारी भी अस्पताल प्रबंधन की होती है। योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन पत्र सभी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, सिविल सर्जन सह अस्पताल अधीक्षक अथवा स्वास्थ्य संचालनालय से प्राप्त किए जा सकते हैं। आवेदन पत्र में गरीबी रेखा में नाम होने की सूची अथवा आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने का प्रमाण और बीमारी के संबंध में सिविल सर्जन के प्रमाण पत्र के पश्चात आवेदक को चार दिनों के भीतर इलाज के लिए उनकी सुविधा अनुसार अनुबंधित अस्पतालों में भेज दिया जाता है।

