छत्तीसगढ़ में दो साल में खुले 119 नये सरकारी अस्पताल
गांवों में आसान हुई स्वास्थ्य सेवाएं
बारह लाख से ज्यादा गरीब परिवारों को मिली स्वास्थ्य बीमा सुरक्षा
छत्तीसगढ़ में पिछले दो वर्षों में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार गांवों तक हुआ है। दिसम्बर 2008 से लेकर दिसम्बर 2010 तक दो वर्षों में ग्रामीण क्षेत्रों में जहां 119 नये अस्पताल खोले गए वहीं भवनविहीन 723 स्वास्थ्य केन्द्रों का भवन निर्माण कराया गया है। स्वास्थ्य अधोसंरचनाओं के विकास के साथ ही गरीबों के स्वास्थ्य की समुचित देखभाल के लिए अनेक अभिनव योजनाएं भी राज्य सरकार द्वारा इस दौरान शुरू की गई है। मुख्यमंत्री बाल हृदय सुरक्षा योजना, मुख्यमंत्री बाल श्रवण योजना जैसी अभिनव योजनाएं शुरू करने वाला छत्तीसगढ़ देश का इकलौता राज्य बन गया है। गरीबों की स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए शुरू की राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा सुरक्षा के क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ देश में पहले स्थान पर है। छत्तीसगढ़ रूरल मेडिकल कोर योजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सकों की कमी को दूर करने का प्रयास किया गया है। सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में त्रिवर्षीय चिकित्सा पाठयक्रम उत्तीर्ण साढ़े सात सौ से अधिक छात्रों की तैनाती कर उन्हें रोजगार का अवसर उपलब्ध कराया गया है।स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि पिछले दो वर्षों में नवगठित बीजापुर और
नारायणपुर जिले में दो नये जिला अस्पताल, सत्रह सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, आठ प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र और 82 नये उप स्वास्थ्य केन्द्र खोले गए हैं। इस दौरान एक जिला अस्पताल, छह सिविल अस्पताल, 65 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, 56 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र और 596 उप स्वास्थ्य केन्द्र भवनों का निर्माण कराया गया है। स्वास्थ्य केन्द्रों में पैरामेडिकल स्टॉफ और प्रशिक्षित नर्सों की कमी को दूर करने के लिए 22 महिला बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता प्रशिक्षण केन्द्र, आठ जनरल नर्सिंग प्रशिक्षण केन्द्र और 26 पुरूष बहु उद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता प्रशिक्षण्ा केन्द्र खोले गए हैं। राजधानी रायपुर स्थित पंडित जवाहर लाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय में एम.बी.बी.एस. में प्रवेश के लिए पचास सीटों की बढ़ोतरी की गई है, इससे अब यहां हर वर्ष 150 छात्र-छात्राएं एम.बी.बी.एस. में प्रवेश ले सकेंगे। इसके साथ ही इस महाविद्यालय से संबंध्द डॉ. भीमराव अम्बेडकर अस्पताल में मरीजों के लिए पचास अतिरिक्त बिस्तरों की वृध्दि की गई है, इससे इस अस्पताल में बिस्तरों की संख्या सात सौ से बढ़कर सात सौ पचास हो गई है। राज्य शासन द्वारा डॉ.भीमराव अम्बेडकर अस्पताल को सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल बनाया जा रहा है। यहां सीटी स्केन, कलर डाप्लर, वेन्टिलेटर, एम.आर.आई., एण्डोस्कोपिक सर्जरी यूनिट, कैंसर के इलाज के लिए कोबाल्ट मशीन एवं ब्रेकीथेरेपी, बच्चों के लिए पीडियाट्रिक्स नियोनेटल केयर यूनिट, बर्न यूनिट, ट्रामा यूनिट और मार्डन ब्लड बैंक सहित वे तमाम सुविधाएं उपलब्ध है, जो किसी भी रोग के इलाज के लिए आवश्यक है। हृदय रोग की जांच के लिए बहुप्रतीक्षित कैथ लैब और किडनी के मरीजों के लिए हीमोडायलिसिस की सुविधा उपलब्ध हो गई है। कैंसर के इलाज के लिए डॉ. भीमराव अम्बेडकर चिकित्सालय में अत्याधुनिक लीनियर एक्सीलेरेटर और सीटी सिम्युलेरेटर मशीन लगाई गई है। इसके साथ ही राज्य शासन द्वारा हाल ही में डॉ. भीमराव अम्बेडकर अस्पताल में 28 करोड़ रूपए की लागत से न्यूरो साइंस सेंटर की स्वीकृति प्रदान की गई है। पिछले दो वर्षों की सबसे बड़ी उल्लेखनीय उपलब्धि प्रदेश के 24 लाख गरीब परिवारों को बीमा सुरक्षा प्रदान करना है। राष्ट्रीय बीमा सुरक्षा योजना के तहत अब तक प्रदेश के 12 लाख से अधिक गरीबों का स्मार्ट कार्ड बन गया है, इससे वे हर वर्ष तीस हजार रूपए तक अपने परिवार का नि:शुल्क इलाज करा रहे हैं। भारत सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ को इस योजना के उत्कृष्ट क्रियान्वयन के लिए प्रथम पुरस्कार से नवाजा जा चुका है। इन दो वर्षों में हृदय रोग से पीड़ित बच्चों के इलाज के लिए मुख्यमंत्री बाल हृदय सुरक्षा योजना शुरू की गई। इसके माध्यम से अब तक डेढ़ हजार से अधिक बच्चों के हृदय का सफल आपरेशन हो चुका है। इस योजना के तहत बच्चों के हृदय के आपरेशन के लिए अधिकतम एक लाख अस्सी हजार रूपए की सहायता राज्य सरकार देती है। इसी तरह श्रवण बाधित बच्चों के लिए मुख्यमंत्री बाल श्रवण योजना शुरू की गई है। जन्म से श्रवण बाधित बच्चों को सामान्य जीवन व्यतीत करने के लिए योजना के तहत बच्चों के कान के भीतर काक्लियर इम्प्लांट किया जाता है। छत्तीसगढ़ में केवल रायपुर के डॉ. भीमराव आम्बेडकर अस्पताल में इस आपरेशन की सुविधा है। यह काफी खर्चीला आपरेशन है। इसमें अधिकतम छह लाख रूपए का खर्च आता है। राज्य सरकार गरीब बच्चों के आपरेशन के लिए पूरे छह लाख रूपए की सहायता उपलब्ध कराती है, जबकि सामान्य वर्ग के बच्चों के लिए अधिकतम चार लाख रूपए की सहायता इस योजना के तहत दी जाती है।
छत्तीसगढ़ में सिकलसेल रोग के निदान के लिए राज्य सरकार के सहयोग से 22 से 27 नवम्बर तक 'चतुर्थ अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन' का आयोजन किया गया, जिसमें पन्द्रह देशों और भारत के लगभग तीन सौ विशेषज्ञों ने भागीदारी की। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने सम्मेलन के शुभारंभ अवसर पर सिकलसेल मरीजों की पहचान के लिए ' सिकलसेल प्रबंधन कार्यक्रम' शुरू करने की घोषणा की है। इसके तहत तीन वर्ष के भीतर प्रदेश की सभी महिलाओं और बच्चों की स्क्रीनिंग की जाएगी। ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सकों की कमी को दूर करने के लिए राज्य सरकार द्वारा 'छत्तीसगढ़ रूरल मेडिकल कोर' के नाम से नई योजना शुरू की गई है। इसके तहत लगभग पांच सौ अस्पतालों को कठिन और कठिनतम दो वर्गों में विभाजित कर इन अस्पतालों में तैनात चिकित्सकों को उनके वेतन के अलावा अलग से प्रोत्साहन राशि का प्रावधान किया गया है। राष्ट्रीय राजमार्गों पर दुर्घटनाओं में घायलों को त्वरित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे स्थित बीस प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों को एक-एक ट्रामा एम्बुलेंस उपलब्ध कराया गया है। इससे सड़क दुर्घटनाओं में घायलों को तुरंत चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना संभव हुआ है। इसके साथ ही प्रदेश के सभी 146 विकासखंडों में एक-एक एम्बुलेंस की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। छत्तीसगढ़ में बच्चों में कुपोषण दूर करने के लिए बीस शासकीय अस्पतालों में बाल पोषण और पुनर्वास केन्द्रों की स्थापना की गई है। इसके तहत इन अस्पतालों में कुपोषित बच्चों के लिए अलग वार्ड बनाए गए हैं, जहां उनके समुचित इलाज के साथ ही उन्हें पौष्टिक आहार भी प्रदान किया जाता है। क्रमांक- 5237/कुशराम

