छत्तीसगढ़ को मोतियाबिंद मुक्त राज्य बनाने में निजी संस्थाओं की भागीदारी जरूरी
'अंधत्व निवारण में भागीदारी एवं गुणवत्ता सुधार' पर
दो दिवसीय कार्यशाला शुरू
रायपुर 28 अप्रैल 2010
छत्तीसगढ़ को मोतियाबिंद मुक्त राज्य बनाने में निजी क्षेत्र और समाज सेवी संस्थाओं के चिकित्सकों की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। इसके लिए यह जरूरी है कि एक सुविचारित रणनीति के साथ सरकारी और निजी क्षेत्र के चिकित्सकों में बेहतर तालमेल हो। अधंत्व निवारण में भागीदारी एवं गणवत्ता सुधार विषय पर आज यहां आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला के शुभारंभ सत्र में वक्ताओं ने इस आशय के विचार व्यक्त किए। कार्यशाला का आयोजन स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग द्वारा राज्य स्वास्थ्य संसाधन केन्द्र और साईट सेवर्स इन्टरनेशनल के सहयोग से किया जा रहा है। कार्यशाला का शुभारंभ स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के सचिव श्री विकासशील ने किया।

श्री विकासशील ने कार्यशाला के शुभारंभ सत्र को सम्बोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय अंधत्व निवारण कार्यक्रम में निजी संस्थाओं की भागीदारी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है, क्योंकि प्रदेश में कुल 176 नेत्र सर्जनों में 65 सरकारी और 115 नेत्र सर्जन स्वयं सेवी संस्थाओं और निजी क्षेत्र में है। अधंत्व निवारण कार्यक्रम को हम तभी शतप्रतिशत सफल बना सकते हैं, जब दोनों क्षेत्र के चिकित्सकों की पूरी भागीदारी हो। श्री विकासशील ने कहा कि छत्तीसगढ़ में अधंत्व का दर 1.6 प्रतिशत है और इसमें से 71 प्रतिशत प्रकरण मोतियाबिंद के हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में पिछले चार-पांच वर्षों में अंधत्व निवारण की दिशा में काफी प्रगति हुई है। प्रतिवर्ष अस्सी से नब्बे हजार मोतियाबिंद के आपरेशन हो रहे हैं, लेकिन इतने आपरेशन के बावजूद मोतियांबिद के मरीज छूट जाते हैं और प्रति वर्ष इनका बैकलॉग बढ़ते जाता है। इसके लिए यह आवश्यक है कि बैकलॉग के साथ ही प्रति वर्ष नये प्रकरणों में शतप्रतिशत आपरेशन किए जाएं।
श्री विकासशील ने कहा कि छत्तीसगढ़ को मोतियाबिंद मुक्त राज्य बनाने के लिए एक सुनियोजित रणनीति और नई सोच के साथ काम करने की आवश्यकता है। सभी अस्पतालों में सप्ताह का एक दिन आंखों के आपरेशन के लिए निर्धारित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अभी वर्ष में केवल छह से आठ महीने ही मोतियाबिंद के आपरेशन किए जा रहे हैं, जहां सुविधा है वहां वर्ष भर आपरेशन किए जा सकते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि मोतियाबिंद, ग्लूकोमा आदि के आपरेशन के लिए मरीजों के परीक्षण के बाद एक व्हाऊचर कार्ड भी दिया जा सकता है, जिससे वे अपनी सुविधा अनुसार अपना आपरेशन करा सकते हैं। यदि वे निजी अस्पताल में आपरेशन कराते हैं तो उसी के आधार पर उनका भुगतान किया जा सकता है। इससे निजी क्षेत्र के चिकित्सकों को उनके फीस भुगतान की समस्या समाप्त हो सकती है।
कार्यशाला के शुभारंभ सत्र में राज्य अंधत्व निवारण प्रकोष्ठ के प्रभारी डॉ. आर.एन. वर्मा ने राज्य में अंधत्व निवारण की दिशा में किए गए कार्यों और उपलब्ध संसाधनों का प्रस्तुतिकरण दिया। उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2009-10 में छत्तीसगढ़ में एक लाख मोतियाबिंद आपरेशन के लक्ष्य के विरूध्द 90 हजार 452 आपरेशन किए गए हैं। इसके पहले 2008-09 में 87 हजार मोतियाबिंद के आपरेशन किए गए थे। उन्होंने बताया कि वर्तमान में राज्य में तीन आई बैंक (नेज बैंक) सक्रिय रूप से संचालित हैं। इन आई बैंक में वर्ष 2009-10 में दानदाताओं से 177 नेत्र एकत्रित किए गए थे, जिसमें से 136 नेत्र जरूरतमदों को प्रत्यारोपित किए गए। कार्यशाला में स्वास्थ्य विभाग के सचिव श्री विकासशील ने मोतियाबिंद आपरेशन में सबसे अच्छा काम करने वाले जिलों, शासकीय चिकित्सकों और निजी एवं समाजसेवी संस्थाओं के चिकित्सकों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। कार्यशाला में संचालक स्वास्थ्य सेवाएं श्री पी.अन्बलगन, राज्य स्वास्थ्य संसाधन केन्द्र रायपुर के संचालक डॉ. के.आर.एन्टोनी, गुजरात के सेवा संस्थान के डॉ. उदय गाजीवाला, साईट सेवर्स इन्टरनेशनल की चिकित्सक डॉ. अर्चना भाम्बल ने भी अपना प्रस्तुतिकरण्ा दिया। इस अवसर पर जिलों से आए नेत्र चिकित्सक, निजी क्षेत्र और समाजसेवी संस्थाओं के नेत्र चिकित्सक और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारीगण उपस्थित थे। कार्यशाला का समापन 29 अप्रैल को होगा।

