आठ माह के बच्चे के हृदय का बिना शल्य क्रिया के हुआ सफल इलाज
मुख्यमंत्री बाल हृदय सुरक्षा योजना के तहत हुआ नि:शुल्क इलाज
मध्यभारत का पहला प्रकरण
रायपुर 07 जनवरी 2011
छत्तीसगढ़ में अब चिकित्सा विज्ञान की नवीन तकनीकों के माध्यम से जटिल बीमारियों का इलाज होने लगा है। एक ऐसा ही प्रकरण रायपुर के एस्कार्ट हार्ट सेंटर में देखने को मिला जब एक आठ माह के बच्चे के हृदय की अतिरिक्त नली से खून के रिसाव को बिना शल्य क्रिया के बंद कर दिया गया। एस्कार्ट हार्ट
सेंटर के चीफ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. सतीश सूर्यवंशी ने कल आठ माह के बच्चे मास्टर गगन के हृदय में पी.डी.ए. के माध्यम से एक कृत्रिम डिवाईस डालकर खून के रिसाव को बंद कर दिया। बच्चे के पिता श्री रूपेश नेताम मजदूरी करते हैं और इलाज के लिए पैसे नहीं होने के कारण डॉक्टरों द्वारा मुख्यमंत्री बाल हृदय सुरक्षा योजना के तहत बच्चे का इलाज का किया गया। इस इलाज पर लगभग एक लाख तीस हजार रूपए का व्यय आया है। राज्य शासन द्वारा योजना के तहत पूरा खर्च वहन किया गया है।
डॉ. सूर्यवंशी ने बताया कि मध्य भारत का यह पहला प्रकरण है, जिसमें एक छोटे बच्चे के हृदय की अतिरिक्त नली से होने वाले रक्तस्राव को बिना शल्य क्रिया के बंद किया गया है। इसके पहले इस तरह के इलाज के लिए शल्य क्रिया करना जरूरी होता था। नई तकनीक से बच्चे के पैर की नली से हृदय तक एक छोटा यंत्र डालकर अतिरिक्त नली से रक्त स्राव को रोक दिया गया है। उन्होंने बताया कि बच्चे के हृदय की अतिरिक्त नली से अधिक मात्रा में रक्त फेफड़े में जाने के कारण बच्चे को बार-बार निमोनिया हो रहा था। उन्होंने बताया कि जब एस्कार्ट में बच्चे को भर्ती किया तब भी वह निमोनिया से पीड़ित था। जांच में पाया गया कि बच्चे के हृदय की अतिरिक्त नली से रक्त स्राव हो रहा है। उन्होंने बताया कि कभी कभी अधिक मात्रा में रक्त स्राव होने के कारण मरीज का हार्ट फेल होने की संभावना रहती है। बच्चे का निमोनिया ठीक होने के बाद 6 जनवरी को उसके हृदय की अतिरिक्त नली को सफलतापूर्वक बंद कर दिया गया है। बच्चा अब पूरी तरह स्वस्थ है और उसे वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है।
बच्चे के पिता श्री रूपेश नेताम दुर्ग जिले के ग्राम साल्हेभाट का निवासी है और मेहनत मजदूरी करके अपने परिवार का गुजारा करते हैं। उन्होंने बताया कि उनका बच्चा गगन हमेशा निमोनिया से पीड़ित रहता था। बच्चे को धमतरी के अस्पताल में दिखाने पर वहां के डॉक्टरों ने उन्हें एस्कार्ट हार्ट सेंटर ले जाने की सलाह दी। यहां जांच में जब पता चला कि बच्चे को हृदय की बीमारी है, तो उनके होश उड़ गए। डॉक्टरों ने इस बीमारी का खर्चा सवा लाख रूपए बताया। एक मजदूर के लिए इतनी बड़ी राशि की व्यवस्था करना असंभव था। फिर डॉक्टरों ने ही मुख्यमंत्री बाल हृदय सुरक्षा योजना की जानकारी दी और उन्होंने ही इसके लिए दौड़धूप करके बच्चे का इलाज कर दिया। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह को इस योजना के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि यदि यह योजना नहीं होती तो शायद मेरा बच्चा भी जीवित नहीं होता।

