छत्तीसगढ़ में 27 जनवरी से याज खोज अभियान चलाया जाएगा
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देश जारी
रायपुर 13 जनवरी 2011
छत्तीसगढ़ में याज रोगियों की खोज के लिए 27 जनवरी से विशेष खोज अभियान चलाया जाएगा। यह अभियान राष्ट्रीय रोग नियंत्रण संस्थान नई दिल्ली के निर्देश पर प्रदेश के 15 जिलों के पचास विकासखंडों में चलाया जाएगा। संचालक स्वास्थ्य सेवाएं ने इस संबंध में संबंधित जिलों के मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारियों को परिपत्र जारी कर अभियान के लिए तैयारी शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि 2002 के बाद छत्तीसगढ़ में याज का कोई भी मरीज नहीं पाया गया है। याज पिछला प्रकरण सन् 2000 में रायपुर जिले के मैनपुर में पाया गया था। इसके बाद अब तक याज का कोई प्रकरण नहीं पाया गया है। भारत में यह बीमारी समाप्ति की ओर है, फिर भी भारत सरकार द्वारा एहतियात के तौर पर यह अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि याज की खोज के लिए नारायणपुर जिले के विकासखंड नारायणपुर और ओरछा, बस्तर जिले के केशकाल, कोंडागांव, बस्तर, दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा जिले के गीदम, सुकमा और कोंटा विकासखंड में अभियान चलाया जाएगा। इसी तरह बीजापुर जिले के भैरमगढ़, उसूर, भोपालपटन्म, उत्तर बस्तर कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर, अंतागढ़, नरहरपुर, धमतरी जिले के नगरी, मगरलोड, कुरूद, रायपुर जिले के भाटापारा, बिलाईगढ़, कसडोल, आंरग, अभनपुर, छुरा, गरियाबंद, मैनपुर, देवभोग, महासमुंद जिले के पिथौरा, बसना, बागबाहरा, सराईपाली, रायगढ़ जिले के सांरगढ़, घरघोड़ा, धर्मजयगढ़, सरगुजा जिले के वाड्रफनगर, राजपुर, प्रतापपुर, बिलासपुर जिले के पेन्ड्रारोड (गौरेला), मरवाही, जांजगीर-चांपा जिले के मालखरौदा, नवागढ़, डभरा, कोरबा जिले के पोड़ी उपरोड़ा, कटघोरा, करतला, कोरिया जिले के भरतपुर, मनेन्द्रगढ़, सोनहत और जशपुर जिले के जशपुर, कुनकुरी तथा बचीचा विकासखंड में याज रोगियों की खोज की जाएगी।
उल्लेखनीय है कि भारत सरकार द्वारा भी 19 सितम्बर 2006 को प्रारंभिक रूप से भारत से याज के विलोपन की घोषणा की जा चुकी है। इसके बाद भी एहतियात के तौर पर दुर्गम और पहाड़ी क्षेत्रों में प्रत्येक वर्ष याज के खोज के लिए अभियान चलाया जाता है। याज ट्रिपेनोमा पेलिडियम की उपजाति ट्रिपेनोमा परटिन्यू का जीवाणु इस बीमारी का जनक है। यह बीमारी पहाड़ी और पहुंचविहीन दुर्गम क्षेत्रों में निवासर्त गरीब लोगों को ज्यादा प्रभावित करता है। समय रहते उपचार नहीं मिलने की स्थिति में यह बीमारी मरीज को अपाहिज बना देती है। यह एक संक्रामक बीमारी है। अस्वच्छता के कारण शरीर में घाव हो जाता है और घाव से मवाद बहने लगता है। हड्डियां कमजोर होने लगती है और अंत में व्यक्ति को विकलांग बना देती है। शरीर पर बहुत कम कपड़े पहनना, पांव में चप्पल नहीं पहनना, प्रतिदिन नहीं नहाना, नहाने में साबुन का उपयोग नहीं करना, गंदगी और घर में बहुत सारे लोगों का होना आदि इस बीमारी का प्रमुख कारण है। एक्टिंग पेनिसिलीन इंजेक्शन' की एक खुराक से यह बीमारी ठीक हो जाती है। चार वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए छह लाख यूनिट और उससे अधिक आयु के मरीजों के लिए 12 लाख यूनिट की एक खुराक इस बीमारी से छुटकारा पाने के लिए पर्याप्त है।

