छत्तीसगढ़ में सिकलसेल रोगियों की पहचान के लिए मुख्यमंत्री सिकल सेल प्रबंधन कार्यक्रम
राज्य सरकार ने किया 2.95 करोड़ रूपए का प्रावधान
रायपुर 4 अप्रैल 2011
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की घोषणा के अनुरूप छत्तीसगढ़ में सिकलसेल रोगियों की पहचान के लिए 'मुख्यमंत्री सिकलसेल प्रबंधन कार्यक्रम' शुरू किया जा रहा है। इसके अन्तर्गत छत्तीसगढ़ के सभी बच्चों और गर्भवती माताओं का रक्त परीक्षण का सिकलिंग का पता लगाया जाएगा। राज्य शासन द्वारा इस कार्यक्रम के क्रियान्वयन के लिए दो करोड़ 95 लाख रूपए का प्रावधान किया गया है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने 22 नवम्बर 2010 को सिकलसेल पर रायपुर में आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन में छत्तीसगढ़ में सिकलसेल प्रबंधन कार्यक्रम शुरू करने की घोषणा की थी।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री श्री अमर अग्रवाल ने बताया कि इस कार्यक्रम के तहत प्रदेश के सभी बच्चों और गर्भवती महिलाओं का रक्त परीक्षण कर सिकलिंग का पता लगाया जाएगा। उन्होंने बताया कि एक से पांच वर्ष तक के बच्चों का सिकल सेल रक्त परीक्षण आंगनबाड़ी केन्द्रों में और छह से 18 वर्ष तक के विद्यार्थियों का रक्त परीक्षण स्कूलों में किया जाएगा। गर्भवती महिलाओं का भी रक्त परीक्षण किया जाएगा। सिकल सेल ग्रस्त गर्भवती महिलाओं का गर्भस्थ शिशु के सिकल सेल ग्रस्तता की जानकारी के लिए प्रसव पूर्व गर्भ जल का चिकित्सा महाविद्यालयों में परीक्षण किया जाएगा। इसके साथ ही सभी सिकलसेल ग्रस्त मरीजों और उनके परिजनों को स्वास्थ्य केन्द्रों में आवश्यक परामर्श दिया जाएगा। यहां उन्हें विवाह संबंधी परामर्श भी दिए जाएंगे। कार्यक्रम के तहत सिकलसेल रोगियों को आवश्यकतानुसार नि:शुल्क रक्त दान की सेवाएं दी जाएगी। इस कार्यक्रम के माध्यम से छत्तीसगढ़ में सिकलसेल रोगियों का डाटाबेस भी तैयार किया जाएगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री श्री अमर अग्रवाल ने बताया कि इस कार्यक्रम के तहत प्रदेश के सभी बच्चों और गर्भवती महिलाओं का रक्त परीक्षण कर सिकलिंग का पता लगाया जाएगा। उन्होंने बताया कि एक से पांच वर्ष तक के बच्चों का सिकल सेल रक्त परीक्षण आंगनबाड़ी केन्द्रों में और छह से 18 वर्ष तक के विद्यार्थियों का रक्त परीक्षण स्कूलों में किया जाएगा। गर्भवती महिलाओं का भी रक्त परीक्षण किया जाएगा। सिकल सेल ग्रस्त गर्भवती महिलाओं का गर्भस्थ शिशु के सिकल सेल ग्रस्तता की जानकारी के लिए प्रसव पूर्व गर्भ जल का चिकित्सा महाविद्यालयों में परीक्षण किया जाएगा। इसके साथ ही सभी सिकलसेल ग्रस्त मरीजों और उनके परिजनों को स्वास्थ्य केन्द्रों में आवश्यक परामर्श दिया जाएगा। यहां उन्हें विवाह संबंधी परामर्श भी दिए जाएंगे। कार्यक्रम के तहत सिकलसेल रोगियों को आवश्यकतानुसार नि:शुल्क रक्त दान की सेवाएं दी जाएगी। इस कार्यक्रम के माध्यम से छत्तीसगढ़ में सिकलसेल रोगियों का डाटाबेस भी तैयार किया जाएगा।
सिकलसेल क्या है-
यह अनुवांशिक बीमारी है। सिकलसेल रोगी के लाल रक्त कण आक्सीजन की कमी के से हॅसिये के आकार में परिवर्तित हो जाते हैं। अंग्रेजी में हॅसिये को सिकल कहा जाता है, इसलिए इस बीमारी को सिकलसेल कहा जाता है। इस बीमारी से ग्रसित बच्चा छह माह की आयु के पश्चात बुखार, सर्दी, पेट, जोड़ों और गठानों में दर्द से परेशान रहता है। सिकल सेल बीमारी से ग्रसित छह प्रतिशत बच्चे छह माह के अंदर ही काल कलवित हो जाते हैं और बड़ी संख्या में मरीजों की 20 से 21 वर्ष की आयु में अकाल मृत्यु हो जाती है।
सिकलसेल एनीमिया के लक्षण :
खून की कमी, जल्दी थक जाना, सांस फूलना, चिड़चिड़ापन, खानपान में अरूचि, हाथ पैर की उंगलियों,जोड़ों में सूजन, दर्द, तिल्ली का बढ़ जाना, बार-बार बुखार, सर्दी सिकल सेल बीमारी के प्रमुख लक्षण हैं।
उपचार एवं परामर्श :
सिकलसेल रोगी की पहचान केवल रक्त की इलेक्ट्रोफोरेसिस जांच द्वारा ही हो सकता है। यह जांच प्रदेश के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र और जिला अस्पतालों में उपलब्ध है। जांच में सिकलसेल धनात्मक होने की स्थिति में व्यक्ति को चिंतित नहीं होना चाहिए बल्कि वे चिकित्सक अथवा परामर्शदाता से परामर्श लेकर सामान्य जीवन व्यतीत कर सकते हैं। सिकलसेल रोगी दो प्रकार के होते हैं, पहला सिकल सेल वाहक (AS) और सिकलसेल रोगी (SS)। सिकलसेल वाहक में बीमारी के किसी तरह लक्षण नहीं होते और इन्हें किसी तरह की इलाज की भी आवश्यकता नहीं होती। ये सामान्य जीवन व्यतीत कर सकते हैं, जबकि सिकलसेल रोगी (SS) में सिकलसेल के सभी लक्षण मिलते हैं। चिकित्सकों के अनुसार सिकलसेल वाहकों का आपस में विवाह होने पर 50 प्रतिशत बच्चे सामान्य और 50 प्रतिशत बच्चे के सिकलसेल संवाहक पैदा होने की संभावना रहती है। इसी तरह सिकलसेल वाहक और सिकलसेल रोगी (SS) की आपस में विवाह होने पर 50 प्रतिशत बच्चे सिकलसेल वाहक और 50 प्रतिशत बच्चे सिकलसेल रोगी पैदा होने की संभावना रहती है। लेकिन सिकलसेल रोगियों की आपस में विवाह होने पर सभी बच्चे सिकलसेल से पीड़ित होने की संभावना रहती है। इसलिए विवाह के पहले रक्त परीक्षण कराकर उपयुक्त जीवन साथी का चयन कर इस बीमारी के प्रसार को रोका जा सकता है। यदि सिकलसेल रोगियों का आपस में विवाह हो जाता है, तो उन्हें संतान को जन्म देने से बचना चाहिए।
ज्ञातव्य है कि छत्तीसगढ़ में कुल जनसंख्या का लगभग दस से पन्द्रह फीसदी आबादी सिकल सेल एनीमिया के वाहक और 1.2 प्रतिशत लोग सिकल सेल एनीमिया के रोगी हैं। छत्तीसगढ़ शासन की आर्थिक मदद से चिकित्सा महाविद्यालय रायपुर के बायोकेमेस्ट्री विभाग द्वारा सितम्बर 2007 से सिकल सेल के नियंत्रण के लिए सिकल सेल स्क्रीनिंग प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है। इसके तहत रायपुर और महासमुंद जिले में लगभग पांच लाख लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है, जिसमें लगभग दस प्रतिशत लोगों में सिकल सेल धनात्मक पाया गया है। मुख्यमंत्री सिकलसेल प्रबंधन कार्यक्रम के तहत अब छत्तीसगढ़ के सभी बच्चों और गर्भवती माताओं का रक्त परीक्षण किया जाएगा।
ज्ञातव्य है कि छत्तीसगढ़ में कुल जनसंख्या का लगभग दस से पन्द्रह फीसदी आबादी सिकल सेल एनीमिया के वाहक और 1.2 प्रतिशत लोग सिकल सेल एनीमिया के रोगी हैं। छत्तीसगढ़ शासन की आर्थिक मदद से चिकित्सा महाविद्यालय रायपुर के बायोकेमेस्ट्री विभाग द्वारा सितम्बर 2007 से सिकल सेल के नियंत्रण के लिए सिकल सेल स्क्रीनिंग प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है। इसके तहत रायपुर और महासमुंद जिले में लगभग पांच लाख लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है, जिसमें लगभग दस प्रतिशत लोगों में सिकल सेल धनात्मक पाया गया है। मुख्यमंत्री सिकलसेल प्रबंधन कार्यक्रम के तहत अब छत्तीसगढ़ के सभी बच्चों और गर्भवती माताओं का रक्त परीक्षण किया जाएगा।
क्रमांक-569/कुशराम

