छत्तीसगढ़ के 9.83 लाख से अधिक गरीब परिवारों को स्मार्ट कार्ड वितरित
राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना
अब तक पचास लाख रूपए से अधिक राशि की चिकित्सा सहायता
नि:शुल्क इलाज के लिए लगभग तीन सौ अस्पताल चिन्हित
रायपुर 4 मई 2010
राज्य शासन द्वारा छत्तीसगढ़ के गरीब परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत 25 अप्रैल 2010 तक नौ लाख 83 हजार 805 गरीब परिवारों को हेल्थ स्मार्ट कार्ड वितरित जा चुका है। इस कार्ड के माध्यम से छत्तीसगढ़ और छत्तीसगढ़ के बाहर के किसी भी चिन्हित अस्पताल में एक वर्ष में तीस हजार रूपए तक का इलाज नि:शुल्क कराया जा सकता है। इसके लिए छत्तीसगढ़ के लगभग तीन सौ चिकित्सालयों का चिन्हांकन किया गया है। इनमें 155 सरकारी और 142 निजी चिकित्सालय शामिल हैं। जिन परिवारों को स्मार्ट कार्ड का वितरण हो चुका है, उनको इसका लाभ मिलना भी शुरू हो गया है। अब तक दो हजार से अधिक गरीब परिवारों ने हेल्थ कार्ड के जरिए अपना इलाज करा चुके हैं और इनके इलाज के एवज में पचास लाख रूपए से अधिक के क्लेम प्रकरणों का निपटारा करते हुए गरीबों को चिकित्सा सहायता मुहैय्या कराई गई है।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री श्री अमर अग्रवाल ने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के अन्तर्गत पहले चरण में छह जिलों बिलासपुर, सरगुजा, दुर्ग, राजनांदगांव, रायपुर और बस्तर को लिया गया था। अब दूसरे चरण्ा में प्रदेश के अन्य जिलों को भी इस योजना में शामिल कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत प्रदेश के सभी अठारह जिलों के लगभग 26 लाख गरीब परिवारों का हेल्थ स्मार्ट कार्ड बनाया जाना है। श्री अग्रवाल ने बताया कि अब तक बिलासपुर जिले में 82 हजार 331, सरगुजा जिले में 60 हजार 508, दुर्ग जिले में एक लाख 30 हजार 846, राजनांदगांव जिले में 42 हजार 694, रायपुर जिले में एक लाख 71 हजार 661,बस्तर और नारायणपुर जिले में 20 हजार 361, दंतेवाड़ा और बीजापुर जिले में चार हजार 897, धमतरी जिले में 36 हजार 552, जांजगीर-चांपा जिले में 68 हजार 357, जशपुर जिले में 37 हजार 335, कांकेर जिले में 23 हजार 791, कबीरधाम जिले में 38 हजार 341, कोरबा जिले में 67 हजार 624, महासमुंद जिले में 68 हजार 646, रायगढ़ जिले में एक लाख छह हजार 503 और कोरिया जिले में 23 हजार 358 गरीब परिवारों के हेल्थ स्मार्ट कार्ड बनाकर वितरित किए जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि स्मार्ट कार्ड के वितरण के साथ ही बीमा कम्पनी स्वास्थ्य विभाग के परामर्श से गरीबों के इलाज के लिए अस्पतालों का भी चयन किया जा रहा है। योजना के तहत गरीबों के इलाज के लिए अब तक प्रदेश के लगभग तीन सौ शासकीय और निजी अस्पतालों का चिन्हांकन किया जा चुका है। इसके अलावा प्रदेश के बाहर के अस्पतालों में भी इस योजना के तहत गरीबों के इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने की कार्यवाही की जा रही है।
उल्लेखनीय है कि इस योजना के तहत प्रत्येक गरीब परिवार के मुखिया को फोटोयुक्त डिजीटल स्मार्ट कार्ड का वितरण किया जा रहा है। इस कार्ड के माध्यम से एक गरीब परिवार के मुखिया सहित परिवार के चार लोगों का एक वर्ष में तीस हजार रूपए तक नि:शुल्क इलाज हो सकता है। इसके लिए गरीब परिवार को किसी भी प्रकार का कोई शुल्क अदा नहीं करना पड़ता। स्वास्थ्य बीमा की समस्त प्रीमियम राशि शासन द्वारा वहन की जाएगी। हितग्राही को केवल पंजीयन और स्मार्ट कार्ड का शुल्क केवल तीस रूपए ही भुगतान करना होता है। बीमा कम्पनी गरीब परिवारों के स्मार्ट कार्ड बनाने के लिए गांवों में शिविर लगाती है और स्वास्थ्य अमले के सत्यापन के बाद हितग्राही को मौके पर ही स्मार्ट कार्ड का वितरण किया जाता है। स्मार्ट कार्ड मिलने के तुरंत बाद हितग्राही किसी भी शासकीय एवं प्रदेश और प्रदेश के बाहर के चिन्हित किसी भी निजी अस्पताल में इलाज कराने के लिए पात्र हो जाता है। योजना के तहत इलाज के लिए भर्ती मरीजों का नि:शुल्क इलाज के साथ ही उन्हें एक वर्ष में अधिकतम एक हजार रूपए परिवहन भत्ता दिए जाने का भी प्रावधान है। परिवहन भत्ता नगद दिया जा रहा है।

