यूनिसेफ पार्टनरशिप कार्यक्रम की समीक्षा की गई : मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बैठक सम्पन्न
रायपुर, 04 मार्च 2011

मुख्य सचिव श्री पी. जॉय उम्मेन की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय में यूनिसेफ पार्टनरशिप कार्यक्रम की समीक्षा की गई। श्री उम्मेन ने आशा व्यक्त की कि शासन के सभी विभागों और यूनिसेफ के आपसी समन्वय से छत्तीसगढ़ सहस्त्राब्दी लक्ष्य को पूरा करने में सफल होगा, सभी मिलजुलकर यह प्रयास करेंगे कि प्रदेश के बच्चों का समुचित विकास हो। समुदाय की सहभागिता से ही प्रदेश का समग्र विकास हो सकता है। उन्होंने कहा कि इसमें पंचायतों की महत्वपूर्ण भूमिका है। सभी विभागों को यह ध्यान रखना होगा कि एक ही क्षेत्र में योजनाओं का दोहराव न हो। बैठक में सचिव स्वास्थ्य श्री विकासशील, सचिव महिला एवं बाल विकास श्री के.डी.पी.राव, यूनिसेफ की राज्य प्रमुख सुश्री शाहीन निलोफर तथा शासन के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

सुश्री निलोफर ने बताया कि प्रदेश में यूनिसेफ द्वारा वर्ष 2008 से विभिन्न विभागों में अनेक कार्यक्रम संचालित किये जा रहे है, जिनमें महिला एवं बाल विकास विभाग, स्कूल शिक्षा, स्वास्थ्य विभाग प्रमुख है। ये कार्यक्रम 2012 तक संचालित किए जाएंगे। यूनिसेफ द्वारा राज्य में शिशु मृत्यु दर, मातृ मृत्यु दर कम करने, महिला पुरूष समानता और महिलाओं के सशक्तिकरण, सार्वभौमिक प्राथमिक शिक्षा आदि पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यूनिसेफ द्वारा नवजात शिशुओं के देखभाल की इकाई स्थापित करने के लिए तकनीकी सहयोग दिया गया। ये इकाईयां दुर्ग, राजनांदगांव में प्रारंभ की गई है। इसके अतिरिक्त कवर्धा, महासमुन्द और सरगुजा जिलों में दस इकाईयां प्रारंभ की जाएंगी। इसके अलावा शिशु संरक्षण माह, जमीनी कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण आदि के लिए भी यूनिसेफ द्वारा सहयोग दिया जा रहा है। किशोरियों में खून की कमी को दूर करने के लिए आदिमजाति विभाग, स्वास्थ्य विभाग, महिला बाल विकास, राजीव गांधी शिक्षा मिशन और स्वयं सेवी संस्थाओं के सहयोग से यूनिसेफ कार्य कर रही है। स्कूल शिक्षा विभाग के साथ मिलकर यूनिसेफ स्कूली बच्चों के पंजीयन, शिक्षकों की भर्ती, आदिवासी क्षेत्रों में पहुंच आदि क्षेत्रों मे कार्य कर रहा है। प्रदेश में 2006 में लड़कियों का (11 से 14 साल ) शाला त्यागने का प्रतिशत 13.6 था, जो 2010 में घटकर 3.2 प्रतिशत हो गया है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में यूनिसेफ द्वारा विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
यूनिसेफ और छत्तीसगढ़ शासन के सहयोग से वर्ष 2009-10 में 35 हजार आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और 62 हजार मितानीन को नवजात शिशुओं की देखभाल के लिए प्रशिक्षित किया गया है। यूनिसेफ के कार्यक्रम के जरिए वर्ष 2008-09 में किशोरियों में खून की कमी के प्रतिशत में कमी आई है। वर्ष 2009 में एक लाख 50 हजार किशोंरी स्कूल जाने वाली बालिकाओं को और 49 हजार स्कूल छोड़ चुकी बालिकाओं को सहायता दी गई। वर्ष 2010-11 में तीन लाख बालिकाओं को खून की कमी से बचाने के लिए सहायता दी। दंतेवाड़ा, बीजापुर और नारायणपुर में एकीकृत बाल विकास कार्यक्रम की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे है। बैठक में विशेष सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग श्री देवाशीष दास, विशेष सचिव स्कूल शिक्षा श्री सुधीर अग्रवाल, संचालक पंचायत एवं समाज सेवा श्री आलोक अवस्थी सहित अन्य विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

