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'अपने अंदर के स्वंयसेवक को पहचानो' : अन्तर्राष्ट्रीय रेडक्रॉस दिवस पर विचार गोष्ठी आयोजित

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When May 08, 2011
from 08:25 PM to 08:25 PM
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रायपुर, 8 मई 2011

644-080511

भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी द्वारा आज यहां हेनरी डयूनेंट की जयंती अंतर्राष्ट्रीय रेडक्रास दिवस के रूप में मनायी गयी। इस अवसर पर रेडक्रॉस के सिध्दांतों और उद्देष्यों पर प्रकाष डालने के साथ ही एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। विचार गोष्ठी का विषय था - 'अपने अंदर के स्वंयसेवक को पहचानो'। छत्तीसगढ़ हिन्दी ग्रंथ अकादमी के संचालक श्री रमेष नैयर ने इस अवसर पर कहा कि कमजोरों को उपेक्षित नहीं किया जाना चाहिए, उनकी पीड़ा को समझने के लिये आंखे ही नहीं नजर की भी जरूरत है। काम करने के लिए केवल दृष्टि नहीं दृढ़ संकल्प भी होना चाहिए।
    कलेक्टोरेट परिसर स्थित रेडक्रॉस सभाकक्ष में विषय पर आयोजित विचार गोष्ठी में श्री नैयर ने कहा कि महाकाया भी निरर्थक हो जाती है जब एक बेबस के आंसू पोंछने के लिये कोई हाथ नहीं बढ़ता। अंतर्मन की आवाज सुनकर काम करने पर ही अपने भीतर के स्वंयसेवक को पहचाना जा सकता है। उन्होंने कहा कि पीड़ितों की सेवा और उनके स्वाभिमान की रक्षा करने के लिये सदैव तैयार रहना चाहिए। मानवता के कार्यों में कोई भेदभाव नहीं होता। बढते कदम के अध्यक्ष श्री अनिल गुरूबक्षाणी ने कहा कि षहरी क्षेत्र में कई संगठन कार्यरत हैं लेकिन अंदरूनी क्षेत्र में स्वंयसेवी संगठनों की गतिविधियां बढ़ाये जाने की जरूरत हैं। ऐसे आयोजनों से स्वंयसेवी संगठनों को एक मंच मिला है। यह प्रक्रिया सतत् रूप से जारी रहनी चाहिए। जेसीज के श्री राजेष अग्रवाल ने कहा कि अपने लिए तो पषु भी जीता है। दूसरों के लिये केवल मनुष्य जीता है। इंसानियत और मानवता की जिन्हें पहचान है वे सबसे बडे संत हैं। इस अवसर पर रेडक्रास समिति गवर्निंगबॉडी के प्रभारी चेयरमेन श्री टी.एन. मेहरोत्रा, श्री रामकुमार साहू, श्री रामकुमार अग्रवाल, सुश्री मालिनी सुब्रमण्यम, श्री राजनाथ टंडन ने विचार व्यक्त किये। सभी वक्ताओं ने सामाजिक संगठनों के आपसी सहयोग पर जोर देने के साथ ही ग्रामीण क्षेत्र में स्वयंसेवकों को जोड़ने, तथा विभिन्न क्षेत्रों में स्वंयसेवी संगठनों की भूमिका पर जोर दिया। पूर्व चेयरमेन डॉ. ए.आर. दल्ला ने रेडक्रास के सिध्दांतों और उद्देष्यों की विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम का संचालन रेडक्रास समिति के सचिव श्री ए.बी.दुबे ने किया।

एक समर्पित मानवतावादी हेनरी डयूनेंट

    हेनरी डयूनेंट का जन्म 8 मई 1828 को जिनेवा स्विटजरलैण्ड में हुआ। वे एक परोपकारी परिवार से थे। मूलत: वे व्यापारी थे। व्यापार के सिलसिले में वे एक अनुमिति प्राप्त करने के लिए फ्रांस के सम्राट नेपोलियन तृतीय से मिलने जा रहे थे। यात्रा के दौरान उन्होंने 1859 सॉल्फेरिनों के युध्द का समापन देखा। युध्द में हजारों सैनिक घायल हए थे। घायलों की चीख-पुकार सुनने वाला कोई नहीं था। सैनिकों के भीषण दुख दर्द को उन्होंने नजदीक से देखा। चिकित्सा सेवाओं के अभाव में सैनिक तड़प रहे थे उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं था। इससे प्रभावित होकर उन्होंने एक क्रांतिकारी आंदोलन का सूत्रपात किया और इस प्रकार रेडक्रास का जन्म हुआ। वर्ष 1901 में उन्हें पहला नोबल षांति पुरस्कार प्रदान किया गया। 

 

क्रमांक-644/केशरवानी

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