छत्तीसगढ़ में 216 कुष्ठ रोगियों का नि:शुल्क ऑपरेशन
कुष्ठ के प्रभाव दर में उल्लेखनीय कमी
रायपुर 13 मार्च 2011
छत्तीसगढ़ में कुष्ठ रोगियों को नि:शक्त्ता से बचाने के लिए एक जनवरी से 31 दिसम्बर 2010 तक आयोजित किए शिविरों में 216 कुष्ठ रोगियों का नि:शुल्क आपरेशन किया गया है। इसके साथ ही राज्य सरकार द्वारा कुष्ठ रोग की रोकथाम के लिए चलाए गए जागरूकता अभियान और ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार शिविर लगाए जाने के फलस्वरूप छत्तीसगढ़ में कुष्ठ के प्रभाव दर में भी उल्लेखनीय कमी आई है। राज्य में वर्ष 2009 में कुष्ठ का प्रभाव दर 2.34 प्रति दस हजार था, जो वर्ष 2010 में घटकर 2.26 प्रति दस हजार हो गया है।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया ऐसे कुष्ठ रोगी जो कुष्ठ रोग के प्रभाव के कारण नि:शक्तता की स्थिति में आ गए थे, उनका वर्ष 2010 में एक अभियान चलाकर रिकंस्ट्रक्टिव शल्य क्रिया गई। इनमें बस्तर जिले में तीन, बिलासपुर जिले में 24, धमतरी जिले में तीन, दुर्ग जिले में 20, जांजगीर-चांपा जिले में 33, उत्तर बस्तर कांकेर जिले में एक, कबीरधाम जिले में 10, कोरबा जिले में 09, महासमुंद जिले में 24, रायगढ़ जिले में 28 और रायपुर जिले में 61 कुष्ठ रोगियों का आपरेशन किया गया। अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम के तहत कुष्ठ रोगियों को मुफ्त इलाज के साथ ही उन्हें पाचं हजार रूपए की प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है।
अधिकारियों ने बताया कि चिकित्सा विज्ञान के नये आविष्कार बहुऔषधि उपचार प्रणाली (एम.डी.टी.) के जरिए कुष्ठ रोग का इलाज अब बहुत आसान हो गया है। यही कारण है कि वर्ष 2003 में छत्तीसगढ़ में कुष्ठ का प्रभाव दर 7.2 प्रति दस हजार था, जो वर्ष 2010 में घटकर 2.26 हो गया है। वर्तमान में प्रदेश में 5 हजार 396 कुष्ठ रोगियों का नि:शुल्क इलाज किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि कुष्ठ रोगियों को इलाज के लिए प्रोत्साहित करने के लिए दिसम्बर 2008 से प्रोत्साहन योजना भी शुरू की गई। इसके तहत शारीरिक विकृतियां आने पर मरीज को आपरेशन के लिए कुल पांच हजार रूपए की प्रोत्साहन राशि तीन किश्तों में प्रदान की जाती है। दिसम्बर 2008 से दिसम्बर 2010 तक लगभग छह सौ से अधिक कुष्ठ रोगियों की नि:शुल्क शल्य क्रिया की गई है। उन्होंने बताया कि नये कुष्ठ रोगियों की खोज का काम निरंतर चल रहा है। वर्ष 2010 में पांच हजार 729 नये कुष्ठ रोगियों की खोज की गई है। इन सभी का बहुऔषधि उपचार प्रणाली (एम.डी.टी.) से नि:शुल्क उपचार किया जा रहा है।

