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सरकारी डॉक्टरों को मिली निजी प्रेक्टिस की सशर्त छूट

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निजी प्रेक्टिस नहीं करने वालों को मिलेगा अव्यवसायिक भत्ता

    रायपुर 15 मार्च 2011

राज्य सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ में शासकीय चिकित्सकों और चिकित्सा शिक्षकों को निजी प्रेक्टिस करने की सशर्त छूट प्रदान कर दी गई है। राज्य सरकार की सेवा में कार्यरत चिकित्सक अपनी डयूटी अवधि के बाद निजी प्रेक्टिस कर सकेगें, लेकिन उन्हें नर्सिंग होम अथवा प्रायवेट क्लीनिक में जाकर  प्रेक्टिस करने की छूट नहीं होगी। वित्त विभाग द्वारा कल यहां मंत्रालय से इस संबंध में सभी विभागों, संभाग आयुक्तों और जिला कलेक्टरों को परिपत्र जारी कर दिया गया है।
    वित्त विभाग द्वारा जारी परिपत्र के अनुसार चिकित्सा शिक्षकों को भी शर्तों के अधीन निजी प्रेक्टिस की छूट होगी। चिकित्सा शिक्षक अपने कर्तव्य अवधि के पश्चात निजी प्रेक्टिस कर सकेंगे, लेकिन इसके लिए उन्हें लिखित में चिकित्सा महाविद्यालय के अधिष्ठाता को आवेदन-पत्र प्रस्तुत करना होगा। इसके साथ ही चिकित्सा शिक्षकों को अपने कर्तव्य अवधि में कर्तव्य स्थल पर उपस्थित रहना होगा। कर्तव्य अवधि में कार्य से अनुपस्थित रहने पर उनके विरूध्द अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी। आपात स्थिति में अथवा आवश्यकता होने पर उन्हें किसी भी समय कर्तव्य स्थल पर बुलाया जा सकेगा। निजी प्रेक्टिस करने पर उन्हें अव्यवसायिक भत्ते की पात्रता नहीं होगी। परिपत्र में कहा गया है कि ऐसे चिकित्सक अथवा चिकित्सा शिक्षक जिनकी नियुक्ति प्रशासकीय पदों पर हुई है, उन्हें निजी प्रेक्टिस की छूट नहीं होगी। प्रशासकीय पदों में संचालक, अधिष्ठाता, अपर संचालक, संयुक्त संचालक, उप संचालक, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला परिवार कल्याण एवं स्वास्थ्य अधिकारी, सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक, प्राचार्य प्रशिक्षण केन्द्र और जिला स्तर के कार्यक्रम अधिकारी शामिल हैं।
    परिपत्र में कहा गया है कि प्रशासकीय अधिकारी और ऐसे चिकित्सा शिक्षक जिन्होंने निजी प्रेक्टिस की छूट प्राप्त नहीं की है, उन्हें अव्यवसायिक भत्ते की पात्रता होगी। अव्यवसायिक भत्ता की दर मूल वेतन के 25 प्रतिशत के बराबर होगी। मूल वेतन में आहरित बैंड वेतन और ग्रेड वेतन शामिल होगा, लेकिन इसमें किसी अन्य प्रकार का वेतन अथवा विशेष वेतन शामिल नहीं होगा। अव्यवसायिक भत्ते को महंगाई भत्ते की गणना के लिए मूल वेतन का भाग माना जाएगा। अव्यवसायिक भत्ता सेवा निवृति के बाद मिलने वाले परिलाभों की गणना के लिए भी मूल वेतन का भाग माना जाएगा, इसके लिए पूरे सेवा काल में कम से कम पांच वर्ष तक अव्यवसायिक भत्ता प्राप्त करना जरूरी है। परिपत्र में कहा गया है कि अव्यवसायिक भत्ते की पात्रता उन चिकित्सा पदों तक सीमित होगी, जिनके लिए आवश्यक योग्यता इंडियन मेडिकल काउंसिल एक्ट 1956 अथवा डेन्टिस्टस एक्ट 1948 के अन्तर्गत प्राधिकृत चिकित्सा उपाधि है। पुनरीक्षित दर से अव्यवसायिक भत्ते की पात्रता उस तिथि से होगी, जिस तिथि से शासकीय सेवक द्वारा छत्तीसगढ़ वेतन पुनरीक्षण नियम 2009 के प्रावधानों के अन्तर्गत वेतन आहरित किया गया है।
क्रमांक-6569/कुशराम




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