छत्तीसगढ़ में मातृ और शिशु मृत्यु का अंकेक्षण होगा
जिला स्तर पर कलेक्टरों की अध्यक्षता में समिति गठित
राज्य शासन द्वारा दिशा-निर्देश जारी
रायपुर 06 मई 2010
राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के निर्देशों के अनुरूप छत्तीसगढ़ में मातृ और शिशु मृत्यु का अंकेक्षण कराया जाएगा। इसके लिए सभी जिलों में कलेक्टरों की अध्यक्षता में अंकेक्षण समितियां गठित की गई है। समिति मातृ एवं शिशु मृत्यु के प्रकरणों का भौतिक सत्यापन कराएगी और मृत्यु के कारणों का पता चलने पर इस तरह की मृत्यु के रोकथाम के लिए जिला स्तर पर कार्य योजना बनाकर उसका क्रियान्वयन कराएगी। राज्य शासन के स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जिला कलेक्टरों को जारी कर दिए गए हैं। निर्देश में कहा गया है कि ऐसी प्रत्येक गर्भवती महिला जिनकी मृत्यु प्रसव से पहले, प्रसव के दौरान अथवा प्रसव के पश्चात 42 दिन के भीतर होती है, तो ऐसी मृत्यु का अनिवार्य रूप से अंकेक्षण किया जाए। इसी तरह ऐसे समस्त शिशु जिनकी मृत्यु जन्म के पश्चात एक वर्ष की आयु में हो, का भी अनिवार्य रूप से अंकेक्षण किया जाना चाहिए। इसमें सूचना प्रणाली को व्यापक बनाया गया है और स्वास्थ्य मितानिनों द्वारा मातृ और मृत्यु दर की सूचना दिए जाने पर उन्हें प्रति सूचना पचास रूपए की प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान किया गया है।
मातृ और शिशु मृत्यु के अंकेक्षण के लिए कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित समिति में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को उपाध्यक्ष, प्रजनन और शिशु स्वास्थ्य अधिकारी को सदस्य सचिव और सिविल सर्जन द्वारा नामांकित चिकित्सा अधिकारी, चिकित्सा महाविद्यालय के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के विभागाध्यक्ष द्वारा नामांकित चिकित्सक, जिला चिकित्सालय के ब्लड बैंक के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी, सिविल सर्जन द्वारा नामांकित वरिष्ठ स्टॉफ नर्स और शासकीय एवं अशासकीय अस्पतालों, जिसमें मातृ मृत्यु हुई हो, के एक चिकित्सक को सदस्य नामांकित किया गया है। मातृ एवं शिशु मृत्यु की त्वरित सूचना प्राप्त करने के लिए प्रत्येक मितानिन को मृत्यु सूचना पोस्टकार्ड उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी का पता और दूरभाष मुद्रित पोस्टकार्ड पहले ही सभी जिला चिकित्सालयों को उपलब्ध करा दिए गए हैं। मितानिन मृत्यु की सूचना मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारी को देने के साथ ही अपने क्षेत्र के ए.एन.एम. को भी सूचित करेंगी। मितानिन द्वारा मृत्यु की सूचना दिए जाने पर उन्हें प्रति प्रकरण पचास रूपए की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
जारी निर्देश में कहा गया है कि जिले में संचालित किसी भी शासकीय अस्पताल में होने वाली मातृ एवं शिशु मृत्यु की सूचना देने का दायित्व संबंधित अस्पताल प्रभारी का होगा। इसी तरह निजी अस्पतालों और घरों में होने वाली मृत्यु की सूचना मितानिन देंगी। विकासखण्ड चिकित्सा अधिकारी का दायित्व होगा कि वे मृत्यु की सूचना प्राप्त होने के पन्द्रह दिनों के भीतर तीन सदस्यीय दल के माध्यम से स्थानीय रीति-रिवाजों को ध्यान में रखते हुए मातृ एवं शिशु मृत्यु का मौखिक अंकेक्षण कराएंगे। विकासखण्ड चिकित्सा अधिकारी प्राप्त प्रतिवेदन मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारी को भेजेंगे। प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य अधिकारी का दायित्व होगा कि वे मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारी से प्राप्त सभी प्रतिवेदन जिला स्तरीय समिति के समक्ष रखेंगे। जिला स्तरीय अंकेक्षण समिति की बैठक महीने में एक बार अनिवार्य रूप से होगी। जिला स्तरीय समिति के समक्ष प्रस्तुत समस्त प्रकरणों का भौतिक सत्यापन जिला स्तर पर गठित समिति सत्यापन दल द्वारा किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन द्वारा वर्ष 2012 तक मातृ मृत्यु दर को एक सौ प्रति लाख और शिशु मृत्यु दर को तीस प्रति हजार तक लाने का लक्ष्य रखा गया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए किए जा रहे विभिन्न उपायों में मातृ और शिशु मृत्यु का अंकेक्षण भी प्रमख उपायों में शामिल है।

