छत्तीसगढ़ में मलेरिया से लड़ने बनी रणनीति
स्वास्थ्य कार्यकर्ता घर-घर जाकर बुखार पीड़ितों को खोजेंगे
मलेरिया रोधी दवा का छिड़काव 16 जून से
छत्तीसगढ़ में मानसून के दौरान मलेरिया पीड़ितों की बढ़ती संख्या को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस बार मलेरिया नियंत्रण के लिए पुख्ता रणनीति बनायी गई है। इसके तहत आगामी 16 जून से मलेरिया रोधी कीटनाशक का छिड़काव तो किया ही जाएगा, साथ ही स्वास्थ्य कार्यकर्ता घर-घर जाकर बुखार पीड़ितों का सर्वे कर उनका तत्काल उपचार करेंगे। यदि किसी गांव में मलेरिया फेल्सिफेरम का एक भी प्रकरण पाया जाता है, तो उस पूरे गांव में रेपीड फीवर सर्वे किया जाएगा और पीड़ित परिवार के अलावा कम से कम पचास घर के सदस्यों की तत्काल रक्त पटिटयां बनाकर जांच की जाएगी। इसके साथ ही यदि किसी गांव में दो-तीन दिन के भीतर बुखार पीड़ितों की संख्या में अप्रत्याशित वृध्दि होती है, तो वहां तत्काल अस्थायी चिकित्सा शिविर लगाकर पीड़ितों का उपचार किया जाएगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री श्री अमर अग्रवाल ने भी सभी मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारियों को मलेरिया के रोकथाम के लिए इस बार अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और मितानिनों के पास पर्याप्त मात्रा में मलेरिया रोधी दवाएं उपलब्ध हो।
संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं द्वारा मलेरिया नियंत्रण के लिए प्रदेश के सभी मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारियों तथा मलेरिया अधिकारियों को विस्तृत निर्देश जारी किए गए हैं। निर्देश में कहा गया है कि यह सनिश्चित किया जाए कि स्वास्थ्य कार्यकर्ता अपने उप स्वास्थ्य केन्द्र के अन्तर्गत आने वाले प्रत्येक गांव का सात से पन्द्रह दिनों में एक बार अनिवार्य रूप से भ्रमण करे और भ्रमण के दौरान गांव के मुखिया एवं मितानिनों से सम्पर्क कर बुखार पीड़ितों की रक्त पट्टी बनाए। भ्रमण के दौरान मितानिनों की दवा पेटी में दवाईयों की उपलब्धता, आर.डी.किट, स्लाईड्स, कॉटन स्प्रीट और लेंसेट की उपलब्धता भी सुनिश्चित किया जाए। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों से कहा गया है कि वे 30 जून तक मलेरिया रोग के रोकथाम के लिए सभी ग्रामीण चिकित्सा सहायकों, सेक्टर सुपरवाईजर, बहु उद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं तथा मितानिनों को मलेरिया की जांच और उपचार का प्रशिक्षण दें। सेक्टर पर्यवेक्षक प्रति सप्ताह सेक्टर की बैठक में ग्रामवार बुखार पीड़ितों की समीक्षा करें और यह सुनिश्चित करें कि प्रत्येक ग्राम की जनसंख्या के अनुपात में रक्त पट्टियां बनाई जा रही है अथवा नहीं। इसी तरह धनात्मक मलेरिया प्रकरणों में मरीजों को दी जाने वाली दवाई और उपचार की समीक्षा भी की जाए।
निर्देश में कहा गया है कि यदि किसी गांव में बुखार पीड़ितों की संख्या में अप्रत्याशित वृध्दि होती है, तो वहां तत्काल अस्थाई चिकित्सा शिविर लगाकर वहीं पर मलेरिया की जांच की व्यवस्था की जाए। इसके साथ ही प्रभावित गांव को केन्द्र मानकर उसके पांच किलोमीटर की परिधि वाले गांवों में भी रेपिड फीवर सर्वे किया जाए। मलेरिया की दृष्टि से संवेदनशील और पहुंचविहीन क्षेत्रों का मुख्य चिकित्सा अधिकारी और जिला मलेरिया अधिकारी स्वंय निगरानी रखें। मलेरिया के रोकथाम के लिए जन-जागरूकता पैदा करने के लिए दीवार लेखन कराया जाए और प्रचार सामग्रियों का वितरण गांवों में कराया जाए। इसके लिए जिला स्तर पर और ग्राम एवं स्वच्छता समिति के पास उपलब्ध बजट का उपयोग किया जा सकता है। बरसात में जिन जल स्त्रोंतों में पानी रूक जाता है, वहां गम्बूजिया मछलियां डलवाई जाए।

