छत्तीसगढ़ में दस वर्षों में सुदृढ़ हुई स्वास्थ्य सुविधाएं
प्रदेश में 1258 उप स्वास्थ्य केन्द्र और 203 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र खुले
रायपुर 30 मई 2011
छत्तीसगढ़ में पिछले दस वर्षों में स्वास्थ्य सुविधाओं के विकास में अभूतपूर्व वृध्दि हुई है। इन वर्षों में ग्रामीण क्षेत्रों में एक हजार 258 उप स्वास्थ्य केन्द्र, 203 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र और 34 नये सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र खोले गए हैं। राष्ट्रीय मापदण्डों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में तीस हजार की आबादी में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र और पांच हजार की आबादी में उप स्वास्थ्य केन्द्र खोला जाना है। छत्तीसगढ़ में प्राथमिक और उप स्वास्थ्य केन्द्र खोलने के इस राष्ट्रीय मापदण्डों को पूरा कर लिया गया है। वर्तमान में छत्तीसगढ़ में पांच हजार 76 उप स्वास्थ्य केन्द्र और 714 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र संचालित है। इस अवधि में स्वास्थ्य सूचकांक में भी उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ में एक हजार शिशुओं में 79 शिशुओं की मौत हो जाती थी। स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार के फलस्वरूप आज यह आंकड़ा घटकर 54 प्रति हजार हो गयी है, जो राष्ट्रीय औसत के बिल्कुल करीब है। मातृ मृत्यु दर भी 470 प्रति लाख से घटकर 335 प्रति लाख हो गई है।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री श्री अमर अग्रवाल ने बताया कि पिछले दस वर्षों में छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य अधोसंरचना में भी महत्वपूर्ण बदलाव आए हैं। इस दौरान प्राथमिक और उप स्वास्थ्य केन्द्रों के अलावा चिकित्सा शिक्षा और नर्सिंग सेवाओं में भी उल्लेखनीय वृध्दि हुई है। छत्तीसगढ़ में वर्ष 2000 में उप स्वास्थ्य केन्द्रों की संख्या तीन हजार 818 थी, वर्ष 2010 में इनकी संख्या बढ़कर पांच हजार 76 हो गई है। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों की संख्या भी 512 से बढ़कर 714 हो गई है। राज्य सरकार द्वारा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों के विस्तार पर विशेष दिया है। पिछले दस वर्षों में 34 नए सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र खोले गए हैं। राज्य में अब इनकी संख्या बढ़कर 148 हो गई है। राज्य निर्माण के दौरान केवल दस जिलों में ही जिला अस्पताल संचालित थे। अब प्रदेश के सभी जिलों में जिला अस्पताल शुरू हो गए हैं। वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ में केवल एक ही चिकित्सा महाविद्यालय संचालित था। वर्तमान में बिलासपुर और जगदलपुर में दो नए चिकित्सा महाविद्यालय संचालित है। प्रदेश का चौथा महाविद्यालय रायगढ़ में खोला जा रहा है। पिछले दस वर्षों में दो नये आयुर्वेद महाविद्यालय, तीन होम्योपैथी कॉलेज, एक यूनानी चिकित्सा महाविद्यालय, एक प्राकृतिक चिकित्सा महाविद्यालय और छह नए दंत चिकित्सा महाविद्यालय खोले गए हैं।
चिकित्सा और नर्सिंग स्टॉफ की कमी को दूर करने के भी प्रयास किए गए हैं। वर्ष 2000 में शासकीय अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की संख्या 98 थी, जो वर्तमान में बढ़कर 253 हो गई है। चिकित्सा अधिकारियों की संख्या भी 947 से बढ़कर 1184 हो गई है। नर्सिंग स्टॉफ की कमी को दूर करने के लिए 26 नये नर्सिंग महाविद्यालय खोले गए हैं। वर्तमान में 30 नर्सिंग महाविद्यालय प्रदेश में संचालित हैं। बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता और जनरल नर्सिंग प्रशिक्षण केन्द्रों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृध्दि हुई है। दस वर्षों में महिला बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता प्रशिक्षण केन्द्रों की संख्या छह से बढ़कर 40, पुरूष बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता प्रशिक्षण् केन्द्रों की संख्या तीन से बढ़कर 36 और जनरल नर्सिंग प्रशिक्षण केन्द्रों की संख्या चार से बढ़कर 17 हो गई है। प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल डॉ. भीमराव अम्बेडकर चिकित्सालय को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है। यहां सीटी स्केन, कलर डाप्लर, वेन्टिलेटर, एम.आर.आई., एण्डोस्कोपिक सर्जरी यूनिट, कैंसर के इलाज के लिए कोबाल्ट मशीन एवं ब्रेकीथेरेपी, बच्चों के लिए पीडियाट्रिक्स नियोनेटल केयर यूनिट, बर्न यूनिट, ट्रामा यूनिट और मार्डन ब्लड बैंक सहित वे तमाम सुविधाएं उपलब्ध है, जो किसी भी रोग के इलाज के लिए आवश्यक है। हृदय रोग की जांच के लिए बहुप्रतीक्षित कैथ लैब और किडनी के मरीजों के लिए हीमोडायलिसिस की सुविधा उपलब्ध हो गई है। कैंसर के इलाज के लिए डॉ. भीमराव अम्बेडकर चिकित्सालय में अत्याधुनिक लीनियर एक्सीलेटर मशीन लगाई गई है। विगत दस वर्षों में जनसामान्य के स्वास्थ्य से जुड़ी अनेक अभिनव योजनाएं भी छत्तीसगढ़ शुरू की गई हैं। इनमें मुख्यमंत्री बाल हृदय सुरक्षा योजना, मुख्यमंत्री बाल श्रवण योजना, संजीवनी कोष राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना और 108 संजीवनी एक्सप्रेस प्रमुख है।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री श्री अमर अग्रवाल ने बताया कि पिछले दस वर्षों में छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य अधोसंरचना में भी महत्वपूर्ण बदलाव आए हैं। इस दौरान प्राथमिक और उप स्वास्थ्य केन्द्रों के अलावा चिकित्सा शिक्षा और नर्सिंग सेवाओं में भी उल्लेखनीय वृध्दि हुई है। छत्तीसगढ़ में वर्ष 2000 में उप स्वास्थ्य केन्द्रों की संख्या तीन हजार 818 थी, वर्ष 2010 में इनकी संख्या बढ़कर पांच हजार 76 हो गई है। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों की संख्या भी 512 से बढ़कर 714 हो गई है। राज्य सरकार द्वारा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों के विस्तार पर विशेष दिया है। पिछले दस वर्षों में 34 नए सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र खोले गए हैं। राज्य में अब इनकी संख्या बढ़कर 148 हो गई है। राज्य निर्माण के दौरान केवल दस जिलों में ही जिला अस्पताल संचालित थे। अब प्रदेश के सभी जिलों में जिला अस्पताल शुरू हो गए हैं। वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ में केवल एक ही चिकित्सा महाविद्यालय संचालित था। वर्तमान में बिलासपुर और जगदलपुर में दो नए चिकित्सा महाविद्यालय संचालित है। प्रदेश का चौथा महाविद्यालय रायगढ़ में खोला जा रहा है। पिछले दस वर्षों में दो नये आयुर्वेद महाविद्यालय, तीन होम्योपैथी कॉलेज, एक यूनानी चिकित्सा महाविद्यालय, एक प्राकृतिक चिकित्सा महाविद्यालय और छह नए दंत चिकित्सा महाविद्यालय खोले गए हैं।
चिकित्सा और नर्सिंग स्टॉफ की कमी को दूर करने के भी प्रयास किए गए हैं। वर्ष 2000 में शासकीय अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की संख्या 98 थी, जो वर्तमान में बढ़कर 253 हो गई है। चिकित्सा अधिकारियों की संख्या भी 947 से बढ़कर 1184 हो गई है। नर्सिंग स्टॉफ की कमी को दूर करने के लिए 26 नये नर्सिंग महाविद्यालय खोले गए हैं। वर्तमान में 30 नर्सिंग महाविद्यालय प्रदेश में संचालित हैं। बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता और जनरल नर्सिंग प्रशिक्षण केन्द्रों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृध्दि हुई है। दस वर्षों में महिला बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता प्रशिक्षण केन्द्रों की संख्या छह से बढ़कर 40, पुरूष बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता प्रशिक्षण् केन्द्रों की संख्या तीन से बढ़कर 36 और जनरल नर्सिंग प्रशिक्षण केन्द्रों की संख्या चार से बढ़कर 17 हो गई है। प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल डॉ. भीमराव अम्बेडकर चिकित्सालय को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है। यहां सीटी स्केन, कलर डाप्लर, वेन्टिलेटर, एम.आर.आई., एण्डोस्कोपिक सर्जरी यूनिट, कैंसर के इलाज के लिए कोबाल्ट मशीन एवं ब्रेकीथेरेपी, बच्चों के लिए पीडियाट्रिक्स नियोनेटल केयर यूनिट, बर्न यूनिट, ट्रामा यूनिट और मार्डन ब्लड बैंक सहित वे तमाम सुविधाएं उपलब्ध है, जो किसी भी रोग के इलाज के लिए आवश्यक है। हृदय रोग की जांच के लिए बहुप्रतीक्षित कैथ लैब और किडनी के मरीजों के लिए हीमोडायलिसिस की सुविधा उपलब्ध हो गई है। कैंसर के इलाज के लिए डॉ. भीमराव अम्बेडकर चिकित्सालय में अत्याधुनिक लीनियर एक्सीलेटर मशीन लगाई गई है। विगत दस वर्षों में जनसामान्य के स्वास्थ्य से जुड़ी अनेक अभिनव योजनाएं भी छत्तीसगढ़ शुरू की गई हैं। इनमें मुख्यमंत्री बाल हृदय सुरक्षा योजना, मुख्यमंत्री बाल श्रवण योजना, संजीवनी कोष राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना और 108 संजीवनी एक्सप्रेस प्रमुख है।
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