सरकारी अस्पतालों में उम्मीदों की नयी रोशनी : जीवन-दीप समितियां
मरीजों को मिल रही है बेहतर सुविधाएं
अस्पतालों का हो रहा है काया-कल्प
रायपुर 15 अप्रैल 2010
सरकारी अस्पतालों के प्रबंधन में आम जनता की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा लगभग पांच वर्ष पहले शुरू की गयी जीवन-दीप अस्पताल सुधार योजना के उत्साहजनक नतीजे मिलने लगे हैं। यह स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की सर्वोच्च प्राथमिकता वाली योजना है। राज्य भर में इस योजना के तहत जिला अस्पतालों और सिविल अस्पतालों सहित सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों के स्तर पर कुल 894 अस्पतालों में जीवन-दीप समितियों का गठन किया गया है, जिनमें स्थानीय जनप्रतिनिधि और समाज सेवी नागरिक भी सदस्य के रूप में शामिल किए गए हैं।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री श्री अमर अग्रवाल के अनुसार राज्य में सरकारी अस्पतालों का प्रबंधन जीवन-दीप समितियों के हाथों में आने के बाद अस्पतालों का कायाकल्प होने लगा है। स्वास्थ्य मंत्री श्री अग्रवाल का यह भी कहना है कि शहर ही नहीं बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों के भी सरकारी अस्पतालों में मरीजों की हर छोटी-मोटी सुविधाओं का ख्याल रखा गया है। चाहे अस्पताल की साफ-सफाई का मामला हो अथवा उपकरणों की खरीददारी का। सारे काम अब जीवन-दीप समितियों ने अपने हाथों में ले लिया है। राज्य सरकार द्वारा जीवन-दीप समितियों को अधिकार सम्पन्न बनाने से अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाओं की गुणवत्ता बेहतर हुई है और इसका लाभ मरीजों को मिल रहा है। स्वास्थ्य मंत्री दुर्ग के जिला अस्पताल का उदाहरण देते हुए कहते है कि दुर्ग जिला अस्पताल की जीवन-दीप समिति तो प्रदेश में मॉडल के रूप में कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने भी स्वयं इसकी प्रशंसा की है।
उल्लेखनीय है कि दुर्ग जिला अस्पताल की जीवन-दीप समिति ने अस्पताल में एन्टी-रैबीज वैक्सीन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की है। इसके फलस्वरूप जिले को रैबीज डेथ मुक्त जिला बनाने में कामयाबी मिली है। इसके साथ ही जनसहयोग से आपात चिकित्सा इकाई, नेत्र चिकित्सा, ब्लड बैंक, लॉन्ड्री यूनिट, डायलिसिस इकाई आदि सुविधाओं का विस्तार किया गया है। दुर्ग जिला अस्पताल की जीवन-दीप समिति ने उच्च पैथालॉजी लैब और रेडियोलॉजी जांच सुविधाओं की आऊट सोर्सिंग कर मरीजों को राहत पंहुचाई है। वहां सभी समूह के रक्त, एक्स-रे, सी.टी. स्कैन, एम.आर.आई. की सुविधाएं बाजार दर से केवल साठ प्रतिशत दर पर उपलब्ध कराई जा रही है। इससे मरीजों को फायदा तो मिल ही रहा है, बल्कि जीवन-दीप समिति को भी हर महीने बीस हजार रूपए की आमदनी प्राप्त हो रही है। वहां समिति ने विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाओं की भी आऊट सोर्सिंग कर रखी है। इससे मरीजों को मनोरोग, चर्म रोग और अन्य विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं मरीजों को केवल दस रूपए में मिलना संभव हो सका है। समिति की प्रेरणा और प्रोत्साहन से स्वंय सेवी संस्थाएं भी आगे आई हैं। अनेक स्वंय सेवी संस्थाओं ने अस्पताल के पांच वार्डों को गोद लेकर वहां आवश्यक सुविधाओं और रखरखाव का काम कर रही हैं। वार्ड की सफाई, पोताई, पर्दे, कूलर, पंखें और मरीजों के मनोरंजन की लिए टेलीविजन की सुविधा स्वयं सेवी संस्थाएं उपलब्ध करा रही है। अस्पताल में आपरेशन थियेटर का उन्नयन, अत्याधुनिक डेंटल यूनिट की स्थापना, ए.व्ही.आर एवं ई.सी.जी. कार्नर की स्थापना, आपात चिकित्सा इकाई और जांच उपचार कक्ष का उन्नयन आदि जीवन-दीप समिति के अन्य उल्लेखनीय कार्यों में गिना जा सकता है। अस्पताल में सुरक्षा, गेट पास, पेयजल, सफाई और पार्किंग का जिम्मा भी जीवन-दीप समिति ने ले रखा है।
उधर राज्य के सुदूरवर्ती आदिवासी बहुल दक्षिण बस्तर (दंतेवाड़ा) के शासकीय जिला अस्पताल की जीवन-दीप समिति भी किसी मायने में पीछे नहीं है। वहां समिति ने मरीजों की बैठने की समुचित व्यवस्था करने के साथ ही महिला, पुरूष और नि:शक्तजनों के लिए अलग-अलग पंजीयन और दवाईयाें की वितरण व्यवस्था, अस्पताल में चौबीसों घंटे एम्बुलेंस की सुविधा और दूर-दराज से आने वाले मरीजों के चाय-नाश्ते के लिए अस्पताल परिसर में रियायती दर पर केंटीन की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। समिति ने वहां मरीजों के खून-पेशाब और अन्य पैथालॉजी जांच के लिए आधुनिक एयर कंडिशन पैथालाजी लैब, एक्स-रे, और सोनोग्राफी मशीनों की व्यवस्था की है। अस्पताल की साफ-सफाई की व्यवस्था के साथ ही विद्युत की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अस्पताल में 82.5 के.व्ही. क्षमता का जनरेटर भी लगाया गया है। जीवन-दीप समिति ने अस्पताल में आने वाले मरीजों के ठहरने के लिए एस्सार कम्पनी के सहयोग से 69 लाख रूपए की लागत से धर्मशाला का निर्माण कराया गया है। इसमें एक मेर्डिकल स्टोर, चार अर्पाटमेंट और महिला एवं पुरूषों के लिए अलग-अगल हाल का निर्माण कराया गया है। इसका संचालन समिति स्वंय करती है। अस्पताल में आने वाले मरीज प्रसन्नचित रहे, इसके लिए एक म्युजिकल सिस्टम की स्थापना की गई है। अस्पताल परिसर में रंग-बिरंगे फूलों से महकते उद्यान भी विकसित किया गया है।
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने राजनांदगांव जिला अस्पताल की जीवन-दीप समिति के रचनात्मक कार्यों की भी प्रशंसा की है, जहां जीवन-दीप समिति ने आमदनी का स्रोत बढ़ाने के लिए अपने संसाधनों से चिकित्सालय परिसर में 25 दुकानों का व्यावसायिक परिसर और धर्मशाला का निर्माण कराया है। इससे समिति को सालाना ढाई लाख रूपए की आय प्राप्त हो रही है। इस परिसर में समिति ने मरीजों को ठहरने के लिए धर्मशाला का निर्माण भी कराया है। इसमें दस-दस बिस्तरों वाले दो हाल और प्रसाधन की सुविधा है। पिछले एक वर्ष में समिति को अनुदान, सायकल स्टैण्ड, किराया, पेंईग वार्ड, मेडिकल वार्ड शुल्क और सेवा शुल्क से लगभग 47 लाख रूपए की आय हुई है। इस आय का उपयोग मरीजों की सुविधाएं बढ़ाने के लिए खर्च किया जा रहा है। राज्य शासन द्वारा अस्पताल को मिलने वाली दवाईयों के अलावा समिति ने अपने फंड से एक वर्ष में नौ लाख रूपए की दवा खरीदी है। समिति गरीब मरीजों को अस्पताल से दवाईयां उपलब्ध नहीं होने पर बाजार से दवा खरीदकर उपलब्ध कराती है। पिछले एक वर्ष में समिति ने कुत्ता काटने के प्रकरणों में 2376 गरीब मरीजों को आधी से भी कम कीमत पर साढ़े नौ लाख रूपए का एन्टी रैबिज इंजेक्शन उपलब्ध कराया है। वहां एक वर्ष में लगभग चार हजार गरीब मरीजों को नि:शुल्क पैथालाजी जांच की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इसके साथ ही समिति द्वारा अस्पताल में अपने संसाधनों से आईसीसीयू वार्ड का संचालन किया जा रहा है, जहां गरीबी रेखा श्रेणी के मरीजों को नि:शुल्क भर्ती की सुविधा उपलब्ध है।
यह भी उल्लेखनीय है कि राजनांदगांव जिला अस्पताल की जीवन-दीप समिति ने अपने संसाधनों से 28 लाख रूपए की लागत से छह नये पेंईग वार्ड और आधुनिक शव-शीत गृह (मरच्युरी) का निर्माण कराया है। पेईंग वार्ड में एयरकूल सिस्टम लगाया गया है और प्रत्येक कक्ष में किचन और लेट-बाथ की सुविधा मुहैय्या कराई गई है। एक कक्ष का किराया दो सौ रूपए प्रतिदिन निर्धारित की गई है। इससे समिति को एक वर्ष में 3.67 लाख रूपए की आय हुई है। समिति ने शवों को सुरक्षित रखने के लिए सोलह लाख रूपए की लागत से आधुनिक शव शीत गृह का निर्माण कराया गया है। इसमें चार फ्रिजर लगाए गए हैं। इसके अलावा स्वंय के फंड से बीस लाख रूपए खर्च करके समिति ने मेजर आपरेशन थियेटर का जीर्णोध्दार और सोलह बिस्तरों वाले नवजात गहन चिकित्सा इकाई का निर्माण भी समिति ने कराया है। समिति ने अस्पताल के कारीडोर और वार्डों में सीसी टी.व्ही कैमरे भी लगाए गए हैं। समिति ने दानदाताओं के सहयोग से अस्पताल के महिला बर्न यूनिट में एयरकण्डीशनर और महिला वार्ड में कूलर की व्यवस्था की गई है।
इसी कड़ी में जिला अस्पताल जांजगीर की जीवन-दीप समिति भी मरीजों की सुविधा के लिए जिला अस्पताल में अनेक कार्य कराए गए हैं। मरीजों के लिए ब्लड बैंक की स्थापना की गई है। अस्पताल तक पंहुच मार्ग का डामरीकरण कराया गया है। गरीबी रेखा श्रेणी के मरीजों को सस्ती दवाईयां उपलब्ध कराने के लिए समिति बाजार से दवाईयां खरीद कर गरीब मरीजों को उपलब्ध कराती है। अस्पताल की साफ-सफाई, पेयजल, विद्युत की व्यवस्था समिति स्वयं करती है। धमतरी जिला अस्पताल की जीवन-दीप समिति ने समिति के फंड से अतिरिक्त बाह्य रोगी कक्ष का निर्माण कराया जा रहा है। पेयजल के लिए ओव्हर हैड टैंक और पानी निकासी के लिए नालियों के निर्माण की स्वीकृति दी गई है। समिति ने अस्पताल में तकनीशियन की कमी को देखते हुए तकनीशियन और इलेक्ट्रीशियन की नियुक्ति की गई है। इनके वेतन का भुगतान जीवन-दीप समिति करती है। समिति ने एम्बुलेंस और शव वाहन की व्यवस्था की है। वहां समिति ने आय के स्रोत बढ़ाने के लिए चिकित्सालय परिसर में व्यावसायिक परिसर और रेड क्रास का मेडिकल स्टोर बनाने का निर्णय लिया है।

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री श्री अमर अग्रवाल के अनुसार राज्य में सरकारी अस्पतालों का प्रबंधन जीवन-दीप समितियों के हाथों में आने के बाद अस्पतालों का कायाकल्प होने लगा है। स्वास्थ्य मंत्री श्री अग्रवाल का यह भी कहना है कि शहर ही नहीं बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों के भी सरकारी अस्पतालों में मरीजों की हर छोटी-मोटी सुविधाओं का ख्याल रखा गया है। चाहे अस्पताल की साफ-सफाई का मामला हो अथवा उपकरणों की खरीददारी का। सारे काम अब जीवन-दीप समितियों ने अपने हाथों में ले लिया है। राज्य सरकार द्वारा जीवन-दीप समितियों को अधिकार सम्पन्न बनाने से अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाओं की गुणवत्ता बेहतर हुई है और इसका लाभ मरीजों को मिल रहा है। स्वास्थ्य मंत्री दुर्ग के जिला अस्पताल का उदाहरण देते हुए कहते है कि दुर्ग जिला अस्पताल की जीवन-दीप समिति तो प्रदेश में मॉडल के रूप में कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने भी स्वयं इसकी प्रशंसा की है।
दुर्ग बना रैबीज डेथ मुक्त जिला

उल्लेखनीय है कि दुर्ग जिला अस्पताल की जीवन-दीप समिति ने अस्पताल में एन्टी-रैबीज वैक्सीन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की है। इसके फलस्वरूप जिले को रैबीज डेथ मुक्त जिला बनाने में कामयाबी मिली है। इसके साथ ही जनसहयोग से आपात चिकित्सा इकाई, नेत्र चिकित्सा, ब्लड बैंक, लॉन्ड्री यूनिट, डायलिसिस इकाई आदि सुविधाओं का विस्तार किया गया है। दुर्ग जिला अस्पताल की जीवन-दीप समिति ने उच्च पैथालॉजी लैब और रेडियोलॉजी जांच सुविधाओं की आऊट सोर्सिंग कर मरीजों को राहत पंहुचाई है। वहां सभी समूह के रक्त, एक्स-रे, सी.टी. स्कैन, एम.आर.आई. की सुविधाएं बाजार दर से केवल साठ प्रतिशत दर पर उपलब्ध कराई जा रही है। इससे मरीजों को फायदा तो मिल ही रहा है, बल्कि जीवन-दीप समिति को भी हर महीने बीस हजार रूपए की आमदनी प्राप्त हो रही है। वहां समिति ने विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाओं की भी आऊट सोर्सिंग कर रखी है। इससे मरीजों को मनोरोग, चर्म रोग और अन्य विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं मरीजों को केवल दस रूपए में मिलना संभव हो सका है। समिति की प्रेरणा और प्रोत्साहन से स्वंय सेवी संस्थाएं भी आगे आई हैं। अनेक स्वंय सेवी संस्थाओं ने अस्पताल के पांच वार्डों को गोद लेकर वहां आवश्यक सुविधाओं और रखरखाव का काम कर रही हैं। वार्ड की सफाई, पोताई, पर्दे, कूलर, पंखें और मरीजों के मनोरंजन की लिए टेलीविजन की सुविधा स्वयं सेवी संस्थाएं उपलब्ध करा रही है। अस्पताल में आपरेशन थियेटर का उन्नयन, अत्याधुनिक डेंटल यूनिट की स्थापना, ए.व्ही.आर एवं ई.सी.जी. कार्नर की स्थापना, आपात चिकित्सा इकाई और जांच उपचार कक्ष का उन्नयन आदि जीवन-दीप समिति के अन्य उल्लेखनीय कार्यों में गिना जा सकता है। अस्पताल में सुरक्षा, गेट पास, पेयजल, सफाई और पार्किंग का जिम्मा भी जीवन-दीप समिति ने ले रखा है।
दंतेवाड़ा जिला अस्पताल में बिजली की निर्बाध आपूर्ति

उधर राज्य के सुदूरवर्ती आदिवासी बहुल दक्षिण बस्तर (दंतेवाड़ा) के शासकीय जिला अस्पताल की जीवन-दीप समिति भी किसी मायने में पीछे नहीं है। वहां समिति ने मरीजों की बैठने की समुचित व्यवस्था करने के साथ ही महिला, पुरूष और नि:शक्तजनों के लिए अलग-अलग पंजीयन और दवाईयाें की वितरण व्यवस्था, अस्पताल में चौबीसों घंटे एम्बुलेंस की सुविधा और दूर-दराज से आने वाले मरीजों के चाय-नाश्ते के लिए अस्पताल परिसर में रियायती दर पर केंटीन की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। समिति ने वहां मरीजों के खून-पेशाब और अन्य पैथालॉजी जांच के लिए आधुनिक एयर कंडिशन पैथालाजी लैब, एक्स-रे, और सोनोग्राफी मशीनों की व्यवस्था की है। अस्पताल की साफ-सफाई की व्यवस्था के साथ ही विद्युत की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अस्पताल में 82.5 के.व्ही. क्षमता का जनरेटर भी लगाया गया है। जीवन-दीप समिति ने अस्पताल में आने वाले मरीजों के ठहरने के लिए एस्सार कम्पनी के सहयोग से 69 लाख रूपए की लागत से धर्मशाला का निर्माण कराया गया है। इसमें एक मेर्डिकल स्टोर, चार अर्पाटमेंट और महिला एवं पुरूषों के लिए अलग-अगल हाल का निर्माण कराया गया है। इसका संचालन समिति स्वंय करती है। अस्पताल में आने वाले मरीज प्रसन्नचित रहे, इसके लिए एक म्युजिकल सिस्टम की स्थापना की गई है। अस्पताल परिसर में रंग-बिरंगे फूलों से महकते उद्यान भी विकसित किया गया है।
जीवन-दीप समिति ने बनवायी धर्मशाला
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने राजनांदगांव जिला अस्पताल की जीवन-दीप समिति के रचनात्मक कार्यों की भी प्रशंसा की है, जहां जीवन-दीप समिति ने आमदनी का स्रोत बढ़ाने के लिए अपने संसाधनों से चिकित्सालय परिसर में 25 दुकानों का व्यावसायिक परिसर और धर्मशाला का निर्माण कराया है। इससे समिति को सालाना ढाई लाख रूपए की आय प्राप्त हो रही है। इस परिसर में समिति ने मरीजों को ठहरने के लिए धर्मशाला का निर्माण भी कराया है। इसमें दस-दस बिस्तरों वाले दो हाल और प्रसाधन की सुविधा है। पिछले एक वर्ष में समिति को अनुदान, सायकल स्टैण्ड, किराया, पेंईग वार्ड, मेडिकल वार्ड शुल्क और सेवा शुल्क से लगभग 47 लाख रूपए की आय हुई है। इस आय का उपयोग मरीजों की सुविधाएं बढ़ाने के लिए खर्च किया जा रहा है। राज्य शासन द्वारा अस्पताल को मिलने वाली दवाईयों के अलावा समिति ने अपने फंड से एक वर्ष में नौ लाख रूपए की दवा खरीदी है। समिति गरीब मरीजों को अस्पताल से दवाईयां उपलब्ध नहीं होने पर बाजार से दवा खरीदकर उपलब्ध कराती है। पिछले एक वर्ष में समिति ने कुत्ता काटने के प्रकरणों में 2376 गरीब मरीजों को आधी से भी कम कीमत पर साढ़े नौ लाख रूपए का एन्टी रैबिज इंजेक्शन उपलब्ध कराया है। वहां एक वर्ष में लगभग चार हजार गरीब मरीजों को नि:शुल्क पैथालाजी जांच की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इसके साथ ही समिति द्वारा अस्पताल में अपने संसाधनों से आईसीसीयू वार्ड का संचालन किया जा रहा है, जहां गरीबी रेखा श्रेणी के मरीजों को नि:शुल्क भर्ती की सुविधा उपलब्ध है।
स्वंय के फंड से पेंईग वार्ड और मरच्युरी का निर्माण
यह भी उल्लेखनीय है कि राजनांदगांव जिला अस्पताल की जीवन-दीप समिति ने अपने संसाधनों से 28 लाख रूपए की लागत से छह नये पेंईग वार्ड और आधुनिक शव-शीत गृह (मरच्युरी) का निर्माण कराया है। पेईंग वार्ड में एयरकूल सिस्टम लगाया गया है और प्रत्येक कक्ष में किचन और लेट-बाथ की सुविधा मुहैय्या कराई गई है। एक कक्ष का किराया दो सौ रूपए प्रतिदिन निर्धारित की गई है। इससे समिति को एक वर्ष में 3.67 लाख रूपए की आय हुई है। समिति ने शवों को सुरक्षित रखने के लिए सोलह लाख रूपए की लागत से आधुनिक शव शीत गृह का निर्माण कराया गया है। इसमें चार फ्रिजर लगाए गए हैं। इसके अलावा स्वंय के फंड से बीस लाख रूपए खर्च करके समिति ने मेजर आपरेशन थियेटर का जीर्णोध्दार और सोलह बिस्तरों वाले नवजात गहन चिकित्सा इकाई का निर्माण भी समिति ने कराया है। समिति ने अस्पताल के कारीडोर और वार्डों में सीसी टी.व्ही कैमरे भी लगाए गए हैं। समिति ने दानदाताओं के सहयोग से अस्पताल के महिला बर्न यूनिट में एयरकण्डीशनर और महिला वार्ड में कूलर की व्यवस्था की गई है।
कोरबा में ओ.पी.डी. हुआ कम्प्यूटरीकृत
कोरबा के जिला अस्पताल की जीवन-दीप समिति द्वारा अस्पताल की ओ.पी.डी को कम्प्यूटरीकृत किया गया है। इसके माध्यम से मरीजों के सभी रिकार्ड कम्प्यूटर में दर्ज किए जाते हैं और रोगी की पर्ची भी कम्प्यूटर से बनाए जाते हैं। समिति द्वारा अस्पताल में मरीजों की सुविधा के लिए साफ पेयजल, कूलर और पंखें की व्यवस्था की गई है। राज्य सरकार से दवाईयां उपलब्ध नहीं होने की दशा में समिति अपने संसाधनों से दवाईयां क्रय कर गरीब मरीजों को उपलब्ध कराया जा रहा है। मरीजों के परिजनों के बैठने की व्यवस्था, सायकल स्टैण्ड और साफ-सफाई की व्यवस्था जीवन-दीप समिति कर रही है। समिति द्वारा एक लाख साठ हजार रूपए की लागत से मरच्युरी चेम्बर खरीदा गया है। समिति स्वंय सेवी संस्थाओं के सहयोग से रैन बसेरा का भी संचालन किया जा रहा है। जीवन-दीप समिति के कार्यों के फलस्वरूप कोरबा की जिला अस्पताल को आई.एस.ओ. प्रमाण -पत्र प्राप्त हुआ है। सिम्स में बना सेवा कुंज
इसी तरह जिला अस्पताल बिलासपुर को आई.एस.ओ. के मानकों के अनुरूप बनाने के लिए जीवन-दीप समिति लगातार कार्य कर रही है। समिति ने वहां साढ़े तीन लाख रूपए की लागत से मरच्यूरी और दो लाख रूपए की लागत से हरे-भरे उद्यान का विकास कराया है। जीवन-दीप समिति की कार्यकारिणी की विगत बैठक में जिला अस्पताल में 18 लाख 63 हजार रूपए की लागत से नवजात शिशु गहन कक्ष के निर्माण की स्वीकृति प्रदान की गई है। मरीजों को रक्त की आपूर्ति के लिए ब्लड बैंक की स्थापना और रसोई कक्ष के निर्माण का निर्णय भी समिति ने लिया है। गरीब मरीजों के लिए एन्टी रैबीज इंजेक्शन की व्यवस्था भी समिति करती है। छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) की जीवन-दीप समिति ने दानदाताओं के सहयोग से सिम्स में लगभग 45 लाख रूपए की लागत से जगमोहन सेवाकुन्ज का निर्माण कराया गया है, जिसमें मरीजों की परिजनों के ठहरने के लिए दो बड़े हाल और पांच कमरे की व्यवस्था है।ब्लड बैंक की स्थापना : अतिरिक्त ओ.पी.डी. का निर्माण जारी
इसी कड़ी में जिला अस्पताल जांजगीर की जीवन-दीप समिति भी मरीजों की सुविधा के लिए जिला अस्पताल में अनेक कार्य कराए गए हैं। मरीजों के लिए ब्लड बैंक की स्थापना की गई है। अस्पताल तक पंहुच मार्ग का डामरीकरण कराया गया है। गरीबी रेखा श्रेणी के मरीजों को सस्ती दवाईयां उपलब्ध कराने के लिए समिति बाजार से दवाईयां खरीद कर गरीब मरीजों को उपलब्ध कराती है। अस्पताल की साफ-सफाई, पेयजल, विद्युत की व्यवस्था समिति स्वयं करती है। धमतरी जिला अस्पताल की जीवन-दीप समिति ने समिति के फंड से अतिरिक्त बाह्य रोगी कक्ष का निर्माण कराया जा रहा है। पेयजल के लिए ओव्हर हैड टैंक और पानी निकासी के लिए नालियों के निर्माण की स्वीकृति दी गई है। समिति ने अस्पताल में तकनीशियन की कमी को देखते हुए तकनीशियन और इलेक्ट्रीशियन की नियुक्ति की गई है। इनके वेतन का भुगतान जीवन-दीप समिति करती है। समिति ने एम्बुलेंस और शव वाहन की व्यवस्था की है। वहां समिति ने आय के स्रोत बढ़ाने के लिए चिकित्सालय परिसर में व्यावसायिक परिसर और रेड क्रास का मेडिकल स्टोर बनाने का निर्णय लिया है।
सिर्फ चौदह रूपए में मिलेगा मरीजों को पौष्टिक भोजन
प्रदेश के महासमुंद जिला अस्पताल की जीवन-दीप समिति भी अस्पताल में मरीजों की सुविधा बढ़ाने के लिए कार्य कर रही है। कृषि मंत्री और महासमुंद जिले के प्रभारी मंत्री श्री चन्द्रशेखर साहू की अध्यक्षता में इस महीने की छह तारीख को हुई जीवन-दीप की कार्यकारिणाी की बैठक में सायकल स्टैण्ड और शेड निर्माण का निर्णय लिया गया। वहां समिति मरीजों को प्रतिदिन चौदह रूपए में पौंष्टिक भोजन उपलब्ध कराएगी। राष्ट्रीय राजमार्ग पर दुर्घटना में घायलों को अस्पताल पंहुचाने के लिए तुमगांव और बागबहरा के बीच दो एम्बुलेंस रखने का निर्णय लिया गया। समिति ने अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को देखते हुए निजी चिकित्सकों की सेवाएं अस्पताल में लेने का निर्णय लिया गया। उनके चिकित्सीय परामर्श शुल्क का भुगतान समिति करेगी। जिला जशपुर नगर की जीवन-दीप समिति ने इस वर्ष नेत्र शिविर लगाकर 217 मरीजों के मोतियाबिंद के आपरेशन कराया है। पिछले मार्च की 23 तारीख को हुई बैठक में अस्पताल में कारीडोर निर्माण, कैंटीन की व्यवस्था और साफ-सफाई के लिए कर्मचारी रखे जाने का निर्णय लिया गया। समिति ने मरीजों को लाने-ले-जाने के लिए नया एम्बुलेंस खरीदने का निर्णय भी लिया है। उत्तर बस्तर कांकेर की जिला अस्पताल की जीवन-दीप समिति की 30 मार्च 2010 को हुई बैठक में किचन शेड निर्माण और प्रयोगशाला केमिकल्स,एक्सरे फिल्म एवं जीवनरक्षक दवाईयां क्रय करने का निर्णय लिया गया।क्रमांक-294/कुशराम

