बेहतर एवं टिकाऊ जल प्रबंधन के उपायों पर गंभीर विचार-मंथन
अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन में छत्तीसगढ़ के भू-जल विशेषज्ञों ने किया राज्य का प्रतिनिधित्व

स्थायी, बेहतर और टिकाऊ जल प्रबंधन तथा पानी के उपचार की विभिन्न तकनीकों पर महाराष्ट्र के नागपुर महानगर में आयोजित तीन दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन में छत्तीसगढ़ के भू-जल विशेषज्ञों और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारियों ने भी हिस्सा लेकर इस महत्वपूर्ण विषय पर अपने विचार व्यक्त किए। यह सम्मेलन आज सम्पन्न हो गया। इसका आयोजन केन्द्र सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग से संबंधित राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (नेशनल एनवायरमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीटयूट) नागपुर द्वारा किया गया।
सम्मेलन में भारत सहित 27 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए, जिनमें अमेरिका, इंग्लैण्ड, आयरलैण्ड, जर्मनी, फ्रांस, फिनलैण्ड, आस्टे्रलिया, जापान, कोरिया, थाईलैण्ड, नाईजीरिया, सिंगापुर, ओमान आदि के भू-जल और पेयजल विशेषज्ञ शामिल थे। सम्मेलन में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए जल स्त्रोतों के बेहतर प्रबंधन, गुणवत्ता पूर्ण पेयजल आपूर्ति, सतही जल और भू-जल के बेहतर संरक्षण, गंदे पानी के बेहतर उपचार के विभिन्न तकनीकी उपायों पर विशेषज्ञों ने गंभीर विचार-मंथन किया।
इंडियन वाटर वक्र्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष और छत्तीसगढ़ सरकार के पूर्व प्रमुख अभियंता लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग श्री आर.एन. गुप्ता ने सम्मेलन के समापन सत्र को सम्बोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में भू-जल संरक्षण के लिए पानी बचाओ अभियान चलाया गया है। शिवनाथ जैसी नदियों सहित बड़ी संख्या में तालाबों और सिंचाई जलाशयों की साफ-सफाई के इस विशेष अभियान को आम जनता के सहयोग से भारी सफलता मिली है।
श्री गुप्ता ने सम्मेलन में बताया कि छत्तीसगढ़ में 60 वर्षो से भी अधिक पुराने लगभग 60 हजार तालाब चिन्हांकित किए गए हैं, जिनमें सिल्ट निकालने का काम राज्य शासन द्वारा जनसहयोग से चरणबध्द ढंग से किया जा रहा है। जगदलपुर के ऐतिहासिक और विशाल दलपत सागर तालाब में भी विगत गर्मियों में जनसहयोग से यह कार्य किया गया है। हजारों की संख्या में लोगों ने इसके लिए मुख्यमंत्री के साथ मिलकर श्रमदान भी किया है। श्री गुप्ता ने भू-जल भण्डारण की पूरी दुनिया की वर्तमान स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि कुदरत की इस अनमोल पूंजी का दोहन हमें बहुत सूझ-बूझ और सावधानी के साथ करना होगा। वास्तव में हमें सत्तर प्रतिशत सतही पानी और तीस प्रतिशत भू-जल का उपयोग करना चाहिए, जबकि इसके ठीक विपरित परिस्थिति है। इसे ध्यान में रखकर भू-जल के संरक्षण और संवर्धन के लिए सबको मिलकर प्रयास करने की जरूरत है।
सम्मेलन में छत्तीसगढ़ के सरकार के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के प्रमुख अभियंता श्री एम.ए. खान, मुख्य अभियंता सर्वश्री टी.जी. कोसरिया और टी.डी. सांडिल्य, अधीक्षण अभियंता श्री ए.के. साहू तथा कार्यपालन अभियंता सर्वश्री समीर गौर तथा परीक्षित चौधरी ने राज्य का प्रतिनिधित्व किया। सम्मेलन में राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (नेशनल एनवायरमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीटयूट) के निदेशक डॉ. वाते, नागपुर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. विलास सपकाल और केन्द्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के श्री संजय वाजपेयी भी शामिल हुए। छत्तीसगढ़ सरकार के अधीक्षण अभियंता लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी श्री ए.के. साहू ने प्रथम सत्र में पानी की गुणवत्ता और स्थायी एवं टिकाऊ जल प्रबंधन विषय पर अपना आलेख भी प्रस्तुत किया।

