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इन्द्रावती-जोरा नाला जल समस्या का निराकरण अब हुआ आसान : मुहाने पर बनेगा स्थायी स्ट्रक्चर

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When Apr 04, 2011
from 07:25 PM to 07:25 PM
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छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधि मण्डल ने ओड़िशा के मुख्यमंत्री से मुलाकात की

श्री नवीन पटनायक ने अपने अधिकारियों को दिए स्ट्रक्चर निर्माण के निर्देश

    रायपुर, 04 अप्रैल 2011

59-040411

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के प्रतिनिधि के रूप में प्रदेश के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्री केदार कश्यप के नेतृत्व में राज्य के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधि मण्डल ने आज भुवनेश्वर में ओड़िशा के मुख्यमंत्री श्री नवीन पटनायक से मुलाकात की। प्रतिनिधि मण्डल ने बस्तर अंचल और ओड़िशा की सीमा पर इन्द्रावती नदी-जोरा नाला के पानी से संबंधित समस्या पर श्री पटनायक के साथ विचार-विमर्श किया और उन्हें मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की ओर से इस मामले में छत्तीसगढ़ सरकार के दृष्टिकोण से अवगत कराया। उन्होंने श्री पटनायक को बताया कि जोरा नाला के माध्यम से इन्द्रावती नदी का पानी पड़ोसी राज्य ओड़िशा के इलाके में ग्राम सुरली के नजदीक प्रवाह परिवर्तन के कारण कोलाब नदी में चला जाता है। इससके बस्तर जिले में गैर मानसून की अवधि में (नवम्बर से जून तक) काफी गंभीर जल संकट की स्थिति बनी रहती है।
    ओड़िशा के मुख्यमंत्री ने विचार-विमर्श के बाद प्रतिनिधि मण्डल के आग्रह पर इस समस्या के निराकरण के लिए छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले की जीवन रेखा जोरा नाला - इन्द्रावती के मुहाने पर स्थायी हाईड्रोलिक कंट्रोल स्ट्रक्चर निर्माण का प्रस्ताव तुरन्त स्वीकार कर लिया। इसके फलस्वरूप अब इस गंभीर जल संकट के समाधान का मार्ग बहुत आसान हो गया है। दोनों राज्यों के बीच पूर्व में हुई बैठकों में व्यक्त सहमति के अनुसार स्ट्रक्चर निर्माण के बाद छत्तीसगढ़ और ओड़िशा के बीच 50-50 प्रतिशत पानी का बटवारा होगा। उल्लेखनीय है कि यह प्रस्तावित हाईड्रोलिक कंट्रोल स्ट्रक्चर केन्द्रीय जल आयोग द्वारा अनुमोदित है। इसकी कुल निर्माण लागत 31 करोड़ 61 लाख रूपए है। छत्तीसगढ़ सरकार ने इसके लिए ओड़िशा सरकार को मार्च 2011 तक दो किश्तों में कुल पन्द्रह करोड़ 55 लाख रूपए की धनराशि उपलब्ध करा दी है। यह राशि ओड़िशा सरकार ने ओड़िशा निर्माण निगम को जारी कर दी है। निर्माण कार्य शुरू करने के लिए निविदा आदि की प्रक्रिया जल्द पूर्ण कर ली जाएगी। प्रस्तावित स्ट्रक्चर में जोरा नाले पर 94 मीटर और इन्द्रावती नदी पर 204 मीटर लम्बे वीयर का निर्माण किया जाएगा। दोनों वीयरों में पानी के पचास-पचास प्रतिशत बटवारे के लिए भी तकनीकी संरचनाओं का निर्माण किया जाएगा। इन्द्रावती नदी और जोरा नाले के मुहाने पास बारिश में बाढ़ से होने वाले कटाव को रोकने के लिए कांक्रीट ब्लाक पीचिंग कार्य का प्रावधान भी इसके प्राक्कलन में रखा गया है।
    ओड़िशा के मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ सरकार के उच्च स्तरीय प्रतिनिधि मण्डल की उपस्थिति में ओड़िशा सरकार के जल संसाधन सचिव को इस हाईड्रोलिक कंट्रोल्ड स्ट्रक्चर निर्माण जल्द शुरू करने के निर्देश दिए। वहां के जल संसाधन सचिव ने कहा कि यह निर्माण कार्य अप्रैल 2011 में शुरू कर दिया जाएगा। छत्तीसगढ़ के उच्च स्तरीय प्रतिनिधि मण्डल में प्रदेश के वन मंत्री श्री विक्रम उसेण्डी, संसदीय सचिव और विधायक बीजापुर श्री महेश गागड़ा, विधायक जगदलपुर श्री संतोष बाफना, विधायक बस्तर डॉ. सुभाऊ कश्यप, विधायक चित्रकोट श्री बैदूराम कश्यप और राज्य शासन के प्रमुख सचिव जल संसाधन श्री एन.के. असवाल सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्री केदार कश्यप ने इन्द्रावती-जोरा नाले पर स्ट्रक्चर निर्माण की स्वीकृति प्रदान करने पर ओड़िशा के मुख्यमंत्री श्री नवीन पटनायक को छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से धन्यवाद दिया।
    यह भी उल्लेखनीय है कि इन्द्रावती नदी ओड़िशा राज्य में कालाहांडी जिले के ग्राम धुमाल रामपुर से निकलती है और ओड़िशा में 174 किलोमीटर प्रवाहित होने के बाद छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में प्रवेश करती है, जहां 234 किलोमीटर तक प्रवाहित होकर यह नदी महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ की 128 किलोमीटर की सरहद बनाते हुए गोदावरी नदी में मिल जाती है। इस प्रकार यह नदी कुल 536 किलोमीटर की लम्बी दूरी तय कर गोदावती से मिलती है। छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के मुख्यालय जगदलपुर से लगभग 23 किलोमीटर पर ओड़िशा राज्य के ग्राम सुरली के नजदीक जोरा नाला इन्द्रावती नदी में आकर मिलता था। प्राकृतिक परिवर्तन और कटाव के कारण जोरा नाले के पानी का बहाव अब कोलाब (शबरी) नदी की ओर मुड़ गया है। इसके फलस्वरूप इन्द्रावती नदी का जल-प्रवाह भी जोरा नाले के माध्यम से कोलाब नदी में जाने लगा है। इससे इन्द्रावती नदी में हर साल नवम्बर से जून तक गैर मानसून की अवधि में छत्तीसगढ़ के जगदलपुर क्षेत्र की ओर जल प्रवाह अत्यंत कम हो जाता है। फलस्वरूप काफी बड़े इलाके में निस्तार और पेयजल की समस्या खड़ी हो जाती है।
    यह भी उल्लेखनीय है कि इन्द्रावती नदी के पानी के उपयोग के बारे में तत्कालीन अविभाजित मध्यप्रदेश और ओड़िशा के मुख्यमंत्रियों के बीच 09 दिसम्बर 1975 को अनुबंध हुआ था। इस अनुबंध के अनुसार ओड़िशा द्वारा 45 टी.एम.सी. पानी छत्तीसगढ़ की सीमा पर इन्द्रावती नदी में उपलब्ध कराए जाने की बात कही गयी थी। अनुबंध में गैर मानसून अवधि (नवम्बर से जून तक) कितना पानी उपलब्ध कराया जाएगा, इसका कोई उल्लेख नहीं है। इस जल समस्या के निराकरण के लिए तत्कालीन अविभाजित मध्यप्रदेश और ओड़िशा सरकार के प्रतिनिधियों की संयुक्त बैठक नई दिल्ली में केन्द्रीय जल आयोग द्वारा आयोजित की गयी थी, जिसमें यह निर्णय लिया गया कि इन्द्रावती नदी में जोरा नाला संगम पर उपलब्ध पानी का पचास-पचास प्रतिशत बटवारा सुनिश्चित किया जाए, और इसके लिए जोरा नाला - इन्द्रावती नदी के मुहाने पर स्थायी स्ट्रक्चर का निर्माण किया जाए। इसके बाद 31 मई 2002 को नई दिल्ली में केन्द्रीय जल आयोग द्वारा छत्तीसगढ़ और ओड़िशा के अधिकारियों और इंजीनियरों की बैठक में स्ट्रक्चर निर्माण के लिए डिजाईन तैयार करने का निर्णय हुआ, जिसका परीक्षण आयोग द्वारा किया जाना था। इसी प्रकार 24 दिसम्बर 2003 को दोनों राज्यों के जल संसाधन विभाग के प्रमुख अभियंताओं की बैठक में प्रस्तावित स्ट्रक्चर निर्माण जल्द शुरू करने और निर्माण के बाद पचास-पचास प्रतिशत पानी के बटवारे की सहमति हुई।
    केन्द्रीय जल आयोग द्वारा 26 नवम्बर 2007 को दोनों राज्यों की सहमति के अनुसार प्रस्तावित कंट्रोल्ड स्ट्रक्चर निर्माण के लिए ड्रांईंग-डिजाईन का अनुदान किया गया। इसके बाद 09 अक्टूबर 2009 को दोनों राज्यों के जल संसाधन सचिवों की बैठक में स्ट्रक्चर निर्माण की सम्पूर्ण लागत छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा वहन किए जाने की सहमति दी गयी और यह भी सहमति बनी कि निर्माण के बाद इसके रख-रखाव में होने वाला खर्च दोनों राज्य आधा-आधा वहन करेंगे। इसी तारीख में ओड़िशा सरकार ने कंट्रोल्ड स्ट्रक्चर निर्माण के लिए 31 करोड़ 68 लाख रूपए की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान कर दी। केन्द्रीय जल आयोग ने 08 दिसम्बर 2009 को अपने पूर्व में 26 नवम्बर 2007 के अनुमोदित ड्राईंग में ओड़िशा सरकार द्वारा रखी गयी आपत्तियों का निराकरण संशोधित ड्राईंग उपलब्ध कराया। इसके बाद 30 जनवरी 2010 को ओड़िशा सरकार से स्ट्रक्चर निर्माण के लिए 31 करोड़ 68 लाख रूपए का मांग पत्र छत्तीसगढ़ सरकार को प्राप्त हुआ। इस मांग पत्र के आधार पर छत्तीसगढ़ सरकार ने ओड़िशा राज्य सरकार को दो अलग-अलग किश्तों में अब तक पन्द्रह करोड़ 55 लाख रूपए का आवंटन उपलब्ध करा दिया है।

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