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श्री केदार कश्यप ने की ग्राम सुराज के आवेदन पत्रों की समीक्षा

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When May 01, 2010
from 06:55 PM to 06:55 PM
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अंदरूनी इलाकों में पेयजल को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश

रायपुर, 01 मई 2010

608-010510

आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री और बस्तर जिले के प्रभारी श्री केदार कश्यप ने आज बस्तर संभाग के मुख्यालय जगदलपुर में संभागीय अधिकारियों की बैठक लेकर गर्मी के दिनों में पेयजल व्यवस्था और ग्राम सुराज अभियान में प्राप्त आवेदनों पर की जा रही कार्रवाई की समीक्षा की। श्री कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल बस्तर जिले में भी ग्राम सुराज अभियान का सफलतापूर्वक संचालन किया गया। अभियान के दौरान जिले के  जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों सहित ग्राम सुराज दलों ने जिले के गांव-गांव में पहुंच कर  लोगों से मुलाकात की और उनकी समस्याओं से अवगत हुए। श्री कश्यप ने ग्राम सुराज अभियान में मिले आवेदनों पर शीघ्र कार्रवाई करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए। श्री कश्यप ने कहा कि गांवों की बुनियादी आवश्यकताओं का प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के भी निर्देश अधिकारियों को दिए। 
     बैठक में पेयजल व्यवस्था की समीक्षा करते हुए श्री कश्यप ने कहा कि जिले के अंदरूनी इलाको ंमें पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन योजनाओं में पैसों की जरूरत होगी, उसके लिए पैसों की कमी नहीं होने दी जाएगी। ग्रामीण क्षेत्रों के निर्माण कार्यों की प्रगति की जानकारी लेते हुए उन्होंने जिले के जनप्रतिनिधियों द्वारा दिए गए सुझावों को अमल में लाये जाने के निर्देश दिए। उन्होने कहा कि ग्रामीण्ा क्षेत्रों के निर्माण कार्यों में गुणवत्ता का खास ध्यान रखा जाए। प्रभारी मंत्री ने जिले में चल रहे सभी प्रकार के निर्माण और विकास कार्यों की गहन ''मॉनिटरिंग'' करने के निर्देश अधिकारियों को दिए। उन्होंने सभी अनुविभागीय अधिकारियों को अपने अपने कार्यक्षेत्र में कम से कम 10-10 निर्माण और विकास कार्यों की सतत निगरानी करने को कहा। श्री केदार कश्यप ने जिले में शिक्षकों की कमी को ध्यान में रखकर चयनित शिक्षाकर्मियों की काऊंसलिंग कर उन्हें आगामी शैक्षणिक सत्र के पूर्व शालाओं में पदस्थ करने के भी निर्देश दिए हैं।
    बैठक में बताया गया कि बस्तर जिले में ग्राम सुराज अभियान के प्रथम और द्वितीय चरण में कुल 50 हजार 294 आवेदन प्राप्त हुए। जिनमें 49 हजार 476 मांग से संबंधित और 818 समस्याओं से संबंधित आवेदन पत्र प्राप्त हुए। इन प्राप्त आवेदनों में से वर्तमान स्थिति में कुल 1 हजार 753 आवेदन निराकृत किए जा चुके हैं। निराकृत इन आवेदनों में 1 हजार 741 मांग से संबंधित और 12 समस्याओं से संबंधित आवेदन थे। वर्तमान स्थिति में जिले में 48 हजार 541 आवेदन निराकरण के लिए लंबित हैं। जिसके निराकरण की तत्परता से कार्यवाही की जा रही है। इसके अन्तर्गत 47 हजार 735 आवेदन मांग से संबंधित हैं, वहीं 806 आवेदन समस्याओं से संबंधित हैं, जिनका निराकरण किया जा रहा है। बैठक में बताया गया कि बस्तर जिले में सर्वाधिक 11 हजार 485 आवेदन बकावंड को प्राप्त हुए। इसी प्रकार लोहंडीगुड़ा में 6 हजार 721, बस्तर में 5 हजार 691, केशकाल में 3 हजार 955, जगदलपुर में 3 हजार 607, फरसगांव में 3 हजार 515, दरभा में 3 हजार 249, कोंडागांव में 2 हजार 663, तोकापाल में 2 हजार 296, बास्तानार में 1 हजार 879, माकड़ी में 1 हजार 770 और बड़ेराजपुर में 1 हजार 710 आवेदन पत्र ग्रामीणों से प्राप्त हुए। इन सभी आवेदनों का विभागवार कम्प्यूटर में ''ऑनलाईन इन्ट्री'' करते हुए निराकरण करने के लिए संबंधित विभागों को भेजा जा रहा है।
    बैठक में दक्षिण क्षेत्र बस्तर आदिवासी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष और चित्रकोट क्षेत्र के विधायक श्री बैदूराम कश्यप, बस्तर विधानसभा क्षेत्र के विधायक डॉ. सुभाऊ कश्यप, जगदलपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक श्री संतोष बाफना, केशकाल विधानसभा क्षेत्र के विधायक श्री सेवकराम नेताम, जिला पंचायत के अध्यक्ष श्री लच्छूराम कश्यप सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
क्रमांक 608/सी.एल.

 

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