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बंदियो के शारीरिक मानसिक विकास के लिए प्रदेश की जेलों में समुचित व्यवस्था

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When Apr 01, 2010
from 03:50 PM to 03:50 PM
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  रायपुर 01 अप्रैल 2010

                 छत्तीसगढ़ के विभिन्न जेलों में बंदियों के शारीरिक मानसिक एवं आध्यात्मिक विकास के लिए राज्य शासन द्वारा समुचित व्यवस्था की गई है। इससे बंदियों को तत्कालिक लाभ तो मिलता ही है, रिहाई के पश्चात् उनके पुनर्वास में भी मदद मिलती है। जेल विभाग के विभागीय प्रशासकीय प्रतिवेदन वर्ष 2009-10 में दी गई जानकारी के अनुसार केन्द्रीय जेल रायपुर के प्रत्येक बैरक में रंगीन टी.व्ही. एवं कैरम, चैस, चैनिस चेकर आदि की व्यवस्था की गई है। बैरक के बाहर बैडमिंटन, वॉलीबाल खेल हेतु सामग्री एवं स्थान भी उपलब्ध कराया गया है। जेल में बंदियों की भजन मंडली है। मंडली को हरमोनियम, ढोलक, मंजिरा एवं भजन पुस्तिका उपलब्ध कराया गया है। चित्रकला, गायन, मेहंदी, रंगोली, कसीदा कार्य एवं प्रतियोगिता का भी आयोजन किया जाता है। महिला प्रकोष्ठ मेें प्रति बुधवार मसीही समाज एवं प्रियजन मिशन की ननों द्वारा नैतिक शिक्षा, प्रार्थना, नृत्य, नाटिका प्रदर्शन किया जाता है। आर्ट ऑफ लिविंग संस्था द्वारा योगाभ्यास, भजन, कीर्तन, सुदर्शन क्रिया का बंदियों को नियमित प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जेल में निरूद्व बंदियों हेतु प्रत्येक त्यौहारों पर धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। उप जेल बलौदाबाजार एवं गरियाबंद में बंदियों के पठन-पाठन हेतु पाठशाला प्रारंभ किया गया है।

                      केन्द्रीय जेल जगदलपुर में विभिन्न अवसरों पर बंदियों के मनोरंजन के साथ-साथ सम्पूर्ण विकास के लिए नृत्य, गायन, ड्रामा, वाद-विवाद प्रतियोगिता, प्रहसन, नाटक, परिचर्चा आदि का आयोजन किया जाता है। भजन-कीर्तन, रामायण, भागवत, गीता का वाचन, बाईबिल, कुरान का पाठ एवं धार्मिक अवसरों पर कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। केन्द्रीय जेल बिलासपुर में महिला बंदियों हेतु मेहंदी, अचार एवं पापड़ बनाने का प्रशिक्षण दिया जाता है। जिला जेल कोरबा में निरूध्द निरक्षर बंदियों को शिक्षित बंदियों द्वारा साक्षर किया जा रहा है। विभिन्न आध्यात्कि संस्थाओं द्वारा बंदियों को धार्मिक प्रवचन देकर उन्हें आध्यात्मिक लाभ दिया जाता है। जिला जेल रायगढ़ में जेल पुस्तकालय हेतु ऋषि प्रसाद, युग निर्माण योजना, अखण्ड ज्योति, ज्ञानामृत, योग संदेश की आजीवन सदस्यता ग्रहण की गई है। इसके अतिरिक्त राजीव गांधी शिक्षा मिशन एवं जिला दण्डाधिकारी के सहयोग से पन्द्रह सौ ज्ञानवर्धक पुस्तकें संग्रहित की गई है।

 क्रमांक-010/चन्द्राकर

 

 

 

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