एक ऐसा जेल, जहां बंदी सीख रहे हैं अपने पैरों पर खड़े होने का हुनर
रायपुर 23 अप्रैल 2010
छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के मुख्यालय जगदलपुर में स्थापित केन्द्रीय जेल अब सुधार गृह के साथ एक ऐसे कुटीर उद्योग और हस्त शिल्प केन्द्र के रूप में विकसित हो रहा है। जहां बंदी अपने पैरों पर खड़े होने का हुनर सीख रहे हैं। इस जेल के सैकड़ों बंदी विभिन्न कुटीर उद्योग धंधों में प्रशिक्षित होकर लाखों रूपए की आमदनी अर्जित कर रहे हैं। जेल विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि इस वर्ष केन्द्रीय जेल जगदलपुर के 210 बंदियों ने जेल में संचालित विभिन्न उद्योग धंधों में काम कर 26 लाख 63 हजार 443 रूपए की सामग्री उत्पादित की और उसका विक्रय कर दो लाख 55 हजार 457 रूपए की लाभ अर्जित की है।
केन्द्रीय जेल जगदलपुर में बंदियों द्वारा शासकीय संस्थाओं में लगने वाले लौह फर्नीचर, लौह शिल्प, लकड़ी के फर्नीचर एवं मूर्तियां, बंदी वस्त्र, वर्दी सिलाई, कसीदाकारी, केकती से साज सज्जा की सामग्री और टाटपट्टी आदि का निर्माण किया जाता है। वित्तीय वर्ष 2009-10 में बंदियों द्वारा एक लाख 35 हजार 268 रूपए का मसाला निर्माण, सात लाख 92 हजार 38 रूपए का लौह शिल्प एवं लौह फर्नीचर, दो लाख 87 हजार 929 रूपए की लकड़ी की मूर्तियां, बारह लाख 92 हजार 387 रूपए की लकड़ी फर्नीचर, 45 हजार 378 रूपए की केकती से साज सज्जा की सामग्री, 71 हजार 105 रूपए की बंदी वस्त्र एवं वर्दी सिलाई और 39 हजार 338 रूपए की स्क्रीन प्रिंटिंग का कार्य किया गया।
केन्द्रीय जेल जगदलपुर में संचालित विभिन्न उद्योग धंधों में 210 बंदी कार्यरत है। इनमें से सत्रह कुशल बंदी, 181 अकुशल बंदी और बारह महिला बंदी है। लकड़ी की मूर्तियां और फर्नीचर बनाने में 76 बंदी लगे है। इसी प्रकार लौह उद्योग में 37, केकती उद्योग में 31, बुनाई उद्योग में 20, सिलाई उद्योग में 32, टाटपट्टी उद्योग में छह, चॉक उद्योग में तीन, कशीदा उद्योग में सात, स्क्रीन प्रिंटिंग में चार और टेराकोटा उद्योग में चार बंदी कार्यरत है।
अधिकारियों ने बताया कि उत्पादों के विक्रय से होने वाले आय को नियमानुसार शासकीय खजाने में जमा की जाती है और बंदियों को निर्धारित पारिश्रमिक दिए जाते हैं। जेल के भीतर बंदियों के मनोरंजन हेतु समय-समय पर विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम कराए जाते हैं। निरक्षर बंदियों को सर्व शिक्षा अभियान के तहत साक्षर बनाने एवं उच्च शिक्षा हेतु बंदियों को प्रोत्साहित किए जाते हैं। समय-समय पर आध्यात्मिक आयोजन व स्वास्थ्य शिविर का भी आयोजन किया जाता है। बंदियों की रिहाई के उपरान्त प्रशिक्षण प्राप्त बंदियों को समाज कल्याण विभाग से पुनर्वास हेतु प्रशिक्षित सामग्री प्रदाय की जाती है।

