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महिला बंदियों के मानवाधिकारों का संरक्षण जेल प्रशासन का पहला दायित्व : श्री पासवान

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When May 21, 2011
from 06:25 PM to 06:25 PM
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जेल प्रबंधन में मानवाधिकार विषय पर प्रशिक्षण का समापन

रायपुर 21 मई, 2011

    छत्तीसगढ़ के जेल महानिदेशक श्री एस.के.पासवान ने कहा कि बंदियों के मानवधिकारों का संरक्षण जेल प्रशासन का पहला दायित्व है। जेल अधिकारियों को मानवाधिकार के मौलिक सिध्दांत, मानव गरिमा, स्वंतत्रता, समानता के विचार को अपने कर्तव्य निर्वहन में मूर्तरूप प्रदान करना चाहिए। श्री पासवान कल रायपुर के नजदीक निमोरा स्थित छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण विकास संस्थान में जेल प्रबंधन में मानवाधिकार विषय पर आयोजित छह दिवसीय प्रशिक्षण सत्र के समापन अवसर पर राज्य के जेल अधिकारियों और कर्मचारियों को सम्बोधित कर रहे थे। यह प्रशिक्षण 14 से 19 मई तक छत्तीसगढ़ जेल विभाग, गृह मंत्रालय और केन्द्रीय पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया। राज्य की सभी जेलों के 60 अधिकारियों को यह प्रशिक्षण दिया गया।
    श्री पासवान ने कहा कि जेल विभाग आपराधिक न्याय प्रशासन का केन्द्र बिन्दु है और जेल प्रशासन पर समाज के सर्वोच्च लक्ष्य प्राप्त करने का महती दायित्व है। उन्होंने कहा कि समाज की अपेक्षा रहती है कि जब समाज के प्रति अपराध करने वाले व्यक्ति का कानून की प्रक्रिया के तहत दण्डित कर जेल भेजा जाता है तब जेल संस्था ऐसा कार्य करे कि उस व्यक्ति की बुरी आदतों का दमन हो और उसमें संगठनात्मक प्रवृत्तियों का विकास हो सके। वह जेल से बाहर आने के बाद समाज का सकारात्मक सदस्य बनकर आत्म सम्मान के साथ समाज के विकास में योगदान दे सकें। इसके लिए जेल अधिकारियों को मानवाधिकार के मौलिक सिध्दांत को मूर्तरूप प्रदान करना चाहिए। इसके साथ ही जेल अधिकारियों को चाहिए कि वे श्रेष्ठ चरित्र वाले गैर आदतन अपराधियों को चिन्हित कर उन्हें अच्छे कार्यों के लिए प्रोत्साहित करें, इससे जेलों का नियंत्रण भी प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा और अन्य बंदियों के मानवाधिकार को भी संरक्षित रखने की दिशा में जेल प्रशासन को सार्थक मदद मिलेगी।
    प्रशिक्षण कार्यक्रम की स्त्रोत समन्वयक श्रीमती दीप्ति श्रीवास्तव ने कहा कि जेलों में निरूध्द महिला बंदिनी एक ऐसा वर्ग है, जिनके मानवाधिकारों के संरक्षण के प्रति अतिरिक्त सतर्कता बरतनी होगी। जेल अधीक्षक रायपुर डॉ.के.के.गुप्ता ने कहा कि प्रशिक्षण की सार्थकता तभी है जब प्रशिक्षण प्राप्त सभी अधिकारी-कर्मचारी अपने कार्य क्षेत्र में प्रशिक्षण से प्राप्त कौशल का उपयोग करें। संवेदना जैसे गुण को अपने कार्य निष्पादन का अंग बनाएं। इससे जेलों में मानवाधिकारों की प्रतिस्थाना के साथ जेल प्रशासन को वास्तविक अर्थो में सुधारात्मक प्रशासन का स्वरूप दिया जा सकेगा।

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