नक्सलियों को धन मुहैया कराने का मामला : छत्तीसगढ़ पुलिस महानिदेशक ने किया विशेष अनुसंधान टीम का गठन
रायपुर, 05 अक्टूबर 2011
नक्सल हिंसा और आतंक के खात्मे में लिए छत्तीसगढ़ सरकार दृढ़ संकल्प के साथ अभियान चला रही है। दक्षिण बस्तर (दंतेवाड़ा) जिले में नक्सलियों को धन मुहैय्या कराने के मामले को राज्य सरकार ने अत्यन्त गंभीरता से लिया है। इस मामले की विवेचना अब तक दंतेवाड़ा जिले के डी.एस.पी. स्तर के अधिकारी द्वारा द्वारा की जा रही थी। विवेचना बिल्कुल सही दिशा में चल भी रही है, लेकिन मामले की गंभीरता और व्यापकता को देखते हुए छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक श्री अनिल नवानी ने आज विशेष अनुसंधान दल (स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम) का गठन किया है, ताकि आवश्यक होने पर राज्य के भीतर और अन्य राज्यों में भी जाकर मामले की व्यापक जांच की जा सके। नक्सलियों को आर्थिक मदद पहुंचाने का यह प्रकरण अत्यंत गंभीर है और इसके तार देश के अन्य शहरों से भी जुड़े होने की आशंका है। इसलिए विशेष अनुसंधान दल (एसआईटी) द्वारा नक्सलियों के मददगारों का पता लगाने के लिए वित्त विशेषज्ञों, तकनीकी और कानूनी विशेषज्ञों और अन्य विशेषज्ञ एजेंसियों की भी मदद ली जा सकेगी।
उल्लेखनीय है कि केन्द्र सरकार के भी निर्देश हैं कि ऐसे गंभीर आपराधिक प्रकरणों में राज्यों को एस.आई.टी. का गठन करना चाहिए। पुलिस महानिदेशक छत्तीसगढ़ द्वारा आज गठित इस विशेष अनुसंधान दल के प्रमुख का दायित्व पुलिस महानिरीक्षक (सीआईडी) श्री पी.एन. तिवारी को सौंपा गया है। एस.आई.टी. में उनके सहयोग के लिए उप पुलिस महानिरीक्षक (एसआईबी) श्री विवेकानंद और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (क्राइम ब्रांच जिला रायपुर) श्री अजातशत्रु बहादुर सिंह को शामिल किया गया है। इनके अलावा अब तक इस मामले की जांच कर रहे किरन्दूल के एसडीओपी श्री अंशुमान सिसोदिया को भी एसआईटी में शामिल किया गया है। उल्लेखनीय है कि यह प्रकरण दंतेवाड़ा जिले में कुआकोण्डा थाने में अपराध क्रमांक-26/2011, धारा 121, 124(ए), 120(बी) भारतीय दण्ड विधान, 39 (1), 40 विधि विरूध्द क्रियाकलाप निवारण अधिनियम, 8 (2,3) छत्तीसगढ़ विशेष जनसुरक्षा अधिनियम 2005 के तहत कायम किया गया है।
ज्ञातव्य है कि दंतेवाड़ा पुलिस ने इस प्रकरण में बी.के. लाला को 15 लाख रूपए नक्सलियों को हस्तांतरित करते हुए, नक्सल समर्थक लिंगाराम कोड़ोपी को मौके पर 15 लाख रूपए के साथ गिरफ्तार किया था और घटना स्थल से सोनी सोढ़ी फरार हो गयी थी, जिसे छत्तीसगढ़ पुलिस ने अभी हाल ही में जयपुर और दिल्ली में दबिश देकर राजस्थान और दिल्ली पुलिस की मदद से अन्तत: गिरफ्तार कर लिया है। इसी प्रकरण में एस्सार कम्पनी के एक अधिकारी डी.व्ही.सी.एस. वर्मा को भी गिरफ्तार किया जा चुका है। इस प्रकरण में कुछ स्वयं सेवी संस्थाओं जैसे जय जोहार फारण्डेशन पर भी नक्सलियों को भारी मात्रा में धन मुहैया कराने के आरोप लगे हैं और एस्सार फाउण्डेशन द्वारा वित्तीय मदद उपलब्ध कराने की जानकारी मिली है।

