स्वच्छ पर्यावरण के लिए उद्योगों में क्लीन टेक्नॉलॉजी समय की सबसे बड़ी मांग : श्री एन. बैजेन्द्र कुमार
केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ
रायपुर, 07 अक्टूबर 2010
स्वच्छ पर्यावरण तकनीकों पर आज यहां आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मण्डल के अध्यक्ष और प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव, आवास एवं पर्यावरण् श्री एन. बैजेन्द्र कुमार ने कहा कि स्वच्छ पर्यावरण के लिए उद्योगों में क्लीन टेक्नॉलाजी की जरूरत आज के समय की सबसे बडी मांग है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि राज्य के सभी उद्योग इस टेक्नॉलाजी को अपनाकर पर्यावरण् की रक्षा में अपना सक्रिय योगदान दें और राज्य के
प्रदूषण मुक्त औद्योगिक विकास में सहभागी बनें। केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंचलिक कार्यालय भोपाल द्वारा स्थानीय नवीन विश्राम भवन के सभा गृह में यह कार्यशाला छत्तीसगढ़ के छोटे और मध्यम उद्योगों में प्रदूषण की समस्या को कम करने के लिए स्वच्छ पर्यावरणीय तकनीक अपनाने के बारे में विचार-विमर्श और मार्गदर्शन के उद्देश्य से आयोजित की गयी है। शुभारंभ सत्र में नई दिल्ली से आए केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष प्रोफेसर एस.पी. गौतम विशेष रूप से उपस्थित थे।
कार्यशाला के शुभारंभ सत्र में छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मण्डल के अध्यक्ष श्री एन. बैजेन्द्र कुमार ने यह भी कहा कि प्रदूषण को भावनात्मक आधार पर नहीं बल्कि वैज्ञानिक और तकनीकी आधार पर समझना होगा, तभी हम उसकी प्रभावी रोकथाम कर सकेंगे। श्री बैजेन्द्र कुमार ने कहा कि राज्य सरकार छत्तीसगढ़ में औद्योगिक प्रदूषण सहित हर प्रकार के पर्यावरण प्रदूषण की रोकथाम के लिए हर संभव तकनीक अपनाने को तैयार है। उन्होंने कहा कि इस दिशा में सरकार के साथ-साथ उद्योगों का संयुक्त प्रयास भी बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि इसके लिए जो भी तकनीक यहां के उद्योग चाहते हैं, उन्हें राज्य सरकार और छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मण्डल द्वारा उपलब्ध कराया जाएगा। श्री बैजेन्द्र कुमार ने इस महत्वपूर्ण कार्यशाला के आयोजन के लिए केन्द्रीय प्रदूषण निवारण बोर्ड को धन्यवाद दिया। उल्लेखनीय है कि केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के भोपाल स्थित आंचलिक कार्यालय द्वारा छत्तीसगढ़ के उद्योगपतियों और उद्योगों से जुड़े लोगों को प्रदूषण की रोकथाम और पर्यावरण संरक्षण की विभिन्न तकनीकों की जानकारी देने के लिए यह कार्यशाला आयोजित की गयी है। इसके शुभारंभ सत्र में बिलासपुर स्थित पंडित सुन्दरलाल शर्मा ओपन विश्वविद्यालय के उप-कुलपति डॉ. ए.आर. चन्द्राकर, सदस्य सचिव छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मण्डल श्री पी.व्ही. नरसिंह राव और केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के भोपाल से आंचलिक अधिकारी श्री एस. सुरेश सहित सभी संबंधित अधिकारी और बड़ी संख्या में उद्योगों के मालिक और प्रतिनिधि मौजूद थे। नई दिल्ली से आए केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष प्रोफेसर एस.पी. गौतम ने शुभारंभ सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि उद्योगपतियों को चाहिए कि वे अपने उद्योगों में क्लीन टेक्नॉलॉजी को भी उत्पादन प्रक्रिया का एक अभिन्न अंग मानें और उसे अनिवार्य रूप से अपनाएं।
कार्यशाला के प्रथम सत्र में बोर्ड के भोपाल कार्यालय से आए आंचलिक अधिकारी श्री एस.सुरेश ने कहा कि छत्तीसगढ़ सहित किसी भी राज्य में हवा की गुणवत्ता में सुधार लाने में क्लीन टेक्नॉलॉजी की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। उन्होंने इसे एक गंभीर विषय बताया। छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मण्डल के सदस्य सचिव श्री पी.व्ही. नरसिंह राव ने शुभारंभ सत्र में कहा कि केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की यह कार्यशाला छत्तीसगढ़ के छोटे और मध्यम श्रेणी के उद्योगों में स्वच्छ तकनीक अपनाने में विशेष रूप से मददगार साबित होगी। यहां विषय विशेषज्ञों से उन्हें इसके लिए पर्याप्त तकनीकी मार्गदर्शन मिलेगा। दो दिनों तक चलने वाली इस कार्याशाला में कई तकनीकी सत्र होंगे, जिनमें विशेषज्ञों द्वारा महत्वपूर्ण तकनीकी जानकारी दी जाएगी।
प्रदूषण मुक्त औद्योगिक विकास में सहभागी बनें। केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंचलिक कार्यालय भोपाल द्वारा स्थानीय नवीन विश्राम भवन के सभा गृह में यह कार्यशाला छत्तीसगढ़ के छोटे और मध्यम उद्योगों में प्रदूषण की समस्या को कम करने के लिए स्वच्छ पर्यावरणीय तकनीक अपनाने के बारे में विचार-विमर्श और मार्गदर्शन के उद्देश्य से आयोजित की गयी है। शुभारंभ सत्र में नई दिल्ली से आए केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष प्रोफेसर एस.पी. गौतम विशेष रूप से उपस्थित थे। कार्यशाला के शुभारंभ सत्र में छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मण्डल के अध्यक्ष श्री एन. बैजेन्द्र कुमार ने यह भी कहा कि प्रदूषण को भावनात्मक आधार पर नहीं बल्कि वैज्ञानिक और तकनीकी आधार पर समझना होगा, तभी हम उसकी प्रभावी रोकथाम कर सकेंगे। श्री बैजेन्द्र कुमार ने कहा कि राज्य सरकार छत्तीसगढ़ में औद्योगिक प्रदूषण सहित हर प्रकार के पर्यावरण प्रदूषण की रोकथाम के लिए हर संभव तकनीक अपनाने को तैयार है। उन्होंने कहा कि इस दिशा में सरकार के साथ-साथ उद्योगों का संयुक्त प्रयास भी बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि इसके लिए जो भी तकनीक यहां के उद्योग चाहते हैं, उन्हें राज्य सरकार और छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मण्डल द्वारा उपलब्ध कराया जाएगा। श्री बैजेन्द्र कुमार ने इस महत्वपूर्ण कार्यशाला के आयोजन के लिए केन्द्रीय प्रदूषण निवारण बोर्ड को धन्यवाद दिया। उल्लेखनीय है कि केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के भोपाल स्थित आंचलिक कार्यालय द्वारा छत्तीसगढ़ के उद्योगपतियों और उद्योगों से जुड़े लोगों को प्रदूषण की रोकथाम और पर्यावरण संरक्षण की विभिन्न तकनीकों की जानकारी देने के लिए यह कार्यशाला आयोजित की गयी है। इसके शुभारंभ सत्र में बिलासपुर स्थित पंडित सुन्दरलाल शर्मा ओपन विश्वविद्यालय के उप-कुलपति डॉ. ए.आर. चन्द्राकर, सदस्य सचिव छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मण्डल श्री पी.व्ही. नरसिंह राव और केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के भोपाल से आंचलिक अधिकारी श्री एस. सुरेश सहित सभी संबंधित अधिकारी और बड़ी संख्या में उद्योगों के मालिक और प्रतिनिधि मौजूद थे। नई दिल्ली से आए केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष प्रोफेसर एस.पी. गौतम ने शुभारंभ सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि उद्योगपतियों को चाहिए कि वे अपने उद्योगों में क्लीन टेक्नॉलॉजी को भी उत्पादन प्रक्रिया का एक अभिन्न अंग मानें और उसे अनिवार्य रूप से अपनाएं।
कार्यशाला के प्रथम सत्र में बोर्ड के भोपाल कार्यालय से आए आंचलिक अधिकारी श्री एस.सुरेश ने कहा कि छत्तीसगढ़ सहित किसी भी राज्य में हवा की गुणवत्ता में सुधार लाने में क्लीन टेक्नॉलॉजी की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। उन्होंने इसे एक गंभीर विषय बताया। छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मण्डल के सदस्य सचिव श्री पी.व्ही. नरसिंह राव ने शुभारंभ सत्र में कहा कि केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की यह कार्यशाला छत्तीसगढ़ के छोटे और मध्यम श्रेणी के उद्योगों में स्वच्छ तकनीक अपनाने में विशेष रूप से मददगार साबित होगी। यहां विषय विशेषज्ञों से उन्हें इसके लिए पर्याप्त तकनीकी मार्गदर्शन मिलेगा। दो दिनों तक चलने वाली इस कार्याशाला में कई तकनीकी सत्र होंगे, जिनमें विशेषज्ञों द्वारा महत्वपूर्ण तकनीकी जानकारी दी जाएगी।
क्रमांक-3180/स्वराज्य

