प्लेंसमेंट और सुरक्षा गार्ड एजेंसियों को भी श्रम कानूनों के दायरे में लाने की तैयारी
श्रम विभाग के प्रमुख सचिव ने समीक्षा बैठक में अधिकारियों को दिए निर्देश
रायपुर 05 जून 2010

छत्तीसगढ़ सरकार के श्रम विभाग ने प्लसमेंट एजेंसियों और सुरक्षा गार्ड एजेंसियों का संचालन करने वालों को श्रम कानूनों के दायरे में लाने की तैयारी शुरू कर दी है। राज्य शासन के श्रम विभाग के प्रमुख सचिव श्री विवेक ढांड ने आज यहां मंत्रालय स्थित अपने कक्ष में विभागीय अधिकारियों की बैठक लेकर श्रमिकों के हित में किए जा रहे कार्यों और राज्य शासन द्वारा संचालित योजनाओं की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को इस सिलसिले में जरूरी दिशा-निर्देश दिए। श्री ढांड ने राज्य में संचालित सभी प्लेंसमेंट एजेसियों और सुरक्षा गार्ड उपलब्ध कराने वाली संस्थाओं को भी श्रम कानूनों के दायरे में लाने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने श्रमिकों के लिए सभी लाभकारी प्रावधानों को उनमें लागू कराने की कार्रवाई करने के निर्देश अधिकारियों को दिए। प्रमुख सचिव ने प्रदेश के सभी कारखानों, निर्माण कार्यों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में काम करने वाले संविदा श्रमिकों (ठेका मजदूरों) को वेतन सहित सभी भुगतान बैंको के माध्यम से किए जाने के लिए कार्रवाई करने के निर्देश अधिकारियों को दिए। श्री ढांड ने श्रमिक संविदा मजदूरों के नाम पर बैंकों में खाते खुलवाने के लिए भरपूर सहयोग करने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए। प्रमुख सचिव ने प्रदेश में किए जा रहे विभिन्न निर्माण कार्यों की उपकर वसूली की भी समीक्षा की। बैठक में श्रमायुक्त श्री आलोक अवस्थी सहित सभी विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।
विभागीय कार्यों की समीक्षा करते हुए श्री ढांड ने कहा कि छत्तीसगढ़ में संचालित प्लेंसमेंट और सुरक्षा गार्ड एजेसियां, कारखानों में संविदा श्रमिक उपलब्ध कराने वाले ठेकेदारों की तरह ही संस्थानों में कर्मचारी और सुरक्षाकर्मियों को सेवाओं में लगाती हैं। इन सभी एजेसियों के माध्यम से नियोजित होने वाले कर्मचारियों की सेवा शर्तों और उन्हें राज्य में लागू श्रम काूननों के तहत सभी सुविधाएं और स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए श्रम विभाग के अधिकारियों को विस्तृत कार्ययोजना के तहत काम करना चाहिए। एजेसियों के माध्यम से काम में लगाए जाने वाले कर्मचारियों को भविष्य निधि सुरक्षा, चिकित्सा प्रतिपूर्ति सहित सभी लाभकारी योजनाओं का भी पूरा लाभ मिलना चाहिए। श्री ढांड ने इसके लिए नियमानुसार कार्रवाई प्रारंभ करने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिए। उन्होंने खतरनाक उद्योगों को अनुमति देने और उनका नवीनीकरण के लिए संबंधित जिलों के श्रम पदाधिकारियों से अनापत्ति प्रमाण पत्र अनिवार्य रूप से प्राप्त करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए, ताकि ऐसे उद्योगों में श्रम काूननों और श्रमिकों के स्वास्थ संबंधी निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जा सके।
प्रमुख सचिव ने निर्देशित किया कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना की तरह प्रदेश में काम करने वाले सभी संविदा श्रमिकों को वेतन, कर्मचारी भविष्य निधि राशि सहित चिकित्सा प्रतिपूर्ति राशि और क्षतिपूर्ति राशि आदि का भुगतान बैंकों के माध्यम से कराना सुनिश्चित किया जाए। श्री ढांड ने भविष्य में संविदा श्रमिकों को काम पर लगाने के लिए विभाग द्वारा जारी किए जाने वाले लाईसेंसों में श्रमिकों को बैंकों के माध्यम से भुगतान की अनिवार्यता शामिल करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि संविदा श्रमिकों से काम कराने वाले ठेकेदारों द्वारा निर्धारित नियमों का पालन नहीं करने पर उनके लाईसेंस और कर्मचारी स्वास्थ बीमा के कोड नम्बर रद्द करने के कार्रवाई की जाए। प्रमुख सचिव ने श्रम निरीक्षकों के मुख्यालय निर्धारण को पुनरीक्षित करने के लिए प्रस्ताव तैयार कर राज्य शासन को भिजवाने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए।
श्री ढांड ने विभिन्न लाभकारी योजनाओं का अधिक से अधिक श्रमिकों को लाभ दिलाने के लिए उनका शिविर लगाकर अधिक से अधिक संख्या में पंजीयन करने और योजनाओं का सभी संभव माध्यमों से ज्यादा से ज्यादा प्रचार-प्रसार करने पर भी जोर दिया। प्रमुख सचिव ने राज्य के सात जिलों मे संचालित राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना के स्कूलों का भी नियमित परीक्षण कर बच्चों को पांचवी कक्षा पास कराने और उन्हें मुख्य धारा में शामिल करने के लिए सभी जिला अधिकारियों को निर्देशित किया। उन्होंने कर्मचारी राज्य बीमा सेवाएं द्वारा संचालित स्वास्थ केन्द्रों पर चिकित्सकों की नियमित उपस्थिति, इलाज की सुविधाओं और दवाओं की उपलब्धता का भी नियमित निरीक्षण करने के भी निर्देश दिए।

