उद्योगों में मानव जीवन की सुरक्षा पहली प्राथमिकता होनी चाहिए: श्रम मंत्री श्री साहू
औद्योगिक स्वास्थ्य और सुरक्षा विषय पर कार्यशाला आयोजित
रायपुर, 16 दिसम्बर 2010

छत्तीसगढ़ के श्रम मंत्री श्री चन्द्रशेखर साहू ने कहा है कि उद्योगों में मानव जीवन की सुरक्षा पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। उद्योगों के प्रबंधकों द्वारा वहां कार्यरत कामगारों के बेहतर स्वास्थ्य और उनकी सुरक्षा के सभी संभव उपाए किए जाने चाहिए। श्रम मंत्री श्री साहू ने आज यहां नवीन विश्राम गृह में आयोजित औद्यागिक स्वास्थ्य और सुरक्षा विषय पर आधारित कार्यशाला को संबोधित करते हुए इस आशय के विचार व्यक्त किए। श्री साहू ने कहा कि संवेदनशील और जोखिम भरें कामों को प्रशिक्षित और नियमित कामगारों से ही कराया जाए ताकि छोटी-छोटी गल्तियों के कारण उद्योगों में होने वाली दुर्घटनाओं को टाला जा सकें। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मण्डल के अध्यक्ष श्री अरूण चौबे, छत्तीसगढ़ भवन और अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मण्डल के अध्यक्ष श्री मोहन एन्टी और छत्तीसगढ़ औद्योगिक श्रम न्यायालय के अध्यक्ष श्री जी.एस. वाजपेयी भी मौजूद थे।
राज्य सरकार के श्रम विभाग द्वारा छत्तीसगढ़ में संचालित सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के उद्योगों में कार्यरत विभिन्न श्रेणियों के कामगारों को उनके काम-काज के दौरान सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण दिलानें के लिए विभिन्न उपायों पर विचार विमर्श करने यह कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में फिक्की, छत्तीसगढ़ उद्योग महासंघ, पीएचडी चेम्बर ऑफ कार्मस इन्डस्ट्री, मिनी स्टील प्लांट एसोसियेशन, स्पंज आयरन एसोसियेशन, सीमेंट मेनुफेक्चर यूनियन के पदाधिकारियों सहित विभिन्न सार्वजनिक और निजी उद्योगों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
कार्यशाला का शुभारंभ श्रम मंत्री श्री चंद्रशेखर साहू और अन्य अतिथियों ने भगवान विश्वकर्मा के तैलचित्र के सम्मुख दीप प्रज्जवलित कर किया। कार्यशाला को संबोधित करते हुए श्रम मंत्री श्री साहू ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में प्रदेश में पहली बार श्रमिकों के लिए अनेक कल्याणकारी योजनाओं की शुरूआत की गई है। उन्होंने कहा कि राज्य निर्माण के समय प्रदेश में जहां दो हजार कारखाने और उद्योग संचालित थे जो आज बढ़कर चार हजार से अधिक हो गये है। इसी तरह वर्ष 2000 में जहां प्रदेश के एक लाख 43 हजार श्रमिक नियोजित थे वहीं आज विभिन्न कारखानों में 2 लाख 8 हजार कामगार नियाजित हो रहे है। श्री साहू ने उद्योगों में बढ़ती दुर्घटना पर चिंता जाहिर करते हुए उद्योगों के प्रबंधकों से इन दुर्घटनाओं को रोकने तथा वहां कार्यरत कामगारों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए बेहतर से बेहतर व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस दिशा में यह कार्यशाला उद्योगों के लिए मील का पत्थर साबित होगी। श्री साहू ने कहा कि आर्थिक मंदी के दौर में भी छत्तीसगढ़ इससे अप्रभावित रहा और यहॉ उद्योंगों की स्थापना जारी रही। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में मौजूद वन, जल और खनिज संपदा के आकूत भण्डार को देखते हुए आज यह देश और विदेश के उद्योगपतियों के लिए आशा का केन्द्र बना हुआ है। हम सभी की यह समन्वित जवाबदारी है कि पूंजी और श्रम के सही तालमेल से प्रदेश को औद्योगीकरण की दिशा में आगे ले जाये। उन्होंने कहा कि इस अवसर पर हम सभी को यह संकल्प लेना चाहिए कि जिस तरह हमारा प्रदेश जीरों पावर कट राज्य बना है उसी तरह हम सभी मिलकर इसे दुर्घटना रहित पावर कट राज्य बनाए।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए श्रम विभाग के प्रमुख सचिव श्री विवेक ढॉड ने कहा कि राज्य में पहली बार इस कार्यशाला के माध्यम से औद्योगिक स्वास्थ्य और सुरक्षा के प्रति लोगों को जागरूक करने की शुरूआत की जा रही है। उन्होंने कहा कि दूसरें कई राज्यों में छत्तीसगढ़ से अधिक कामगार नियोजित है परंतु वहां औद्योगिक दुर्घटना यहॉ से कम है। उद्योगों द्वारा छोटे-छोटे उपायों को न अपनाने और जोखिम भरे कामों को प्रशिक्षत व्यक्तियों से न कराकर ठेका श्रमिकों से कराने के कारण कई बार अप्रत्याशित घटनाएं घट जाती है। एैसी घटनाओं को रोकने के लिए उद्योगों के प्रबंधकों को पूरी संवेदनशीलता से इस ओर ध्यान देना चाहिए। बिना ट्रेनिंग के कर्मगारों को जोखिम भरे कामों में न लगायें। कारखानों में सुरक्षा उपकरणों जैसें हेट, ग्लोबस्, मास्क और सिक्यूरटी बेल्ट अनिवार्य रूप से उपलब्ध करायें ताकि छोटी-छोटी गल्तियों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को टाला जा सकें। श्रमायुक्त श्री आर.सी. सिन्हा ने अपने उद्बोधन में प्रदेश में विभिन्न क्षेत्रों में उद्योगों की संभावनाओं को बताते हुए औद्योगिक दुर्घटनाओं को रोकने के लिए किये जाने वाले प्रयासों के बारें में बताया। उन्होंने प्रबंधकों से उद्योगों में दुर्घटना को कम करने के उपायों को अपनाने और यदि दुर्घटना घट जाती है तो उसके बाद किये जाने वाली तात्कालिक राहत सहायता और प्रभावित व्यक्तियों के आर्थिक-सामाजिक पुनर्वास की जिम्मेवारी का निर्वहन पूरी गंभीरता से करने की बात कही।
कार्यशाला के तकनीकी सत्र को संबोधित करते हुए कारखाना सलाह-सेवा और श्रम संस्थान मुम्बई के निदेशक स्वास्थ्य डॉ. एस.एस.बाघे ने उद्योगों में उद्योग जनित स्वास्थ्य विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उद्योगों के अपशिष्ट पदार्थो और वातावरण प्रदूषण से न केवल उसमें काम करने वाले लोग ही प्रभावित होते है बल्कि उनके आस-पास और उनके परिवार के लोग भी इससे प्रभावित होते है। उन्होंने उद्योगों में प्रदूषण पैदा करने वाले उपकरणों का नियमित अभियांत्रिकी जांच कर उनका सुधार कार्य करने को कहा। डॉ. बाघे ने कहा कि किसी भी उद्योग का उत्पादन और वहां कार्यरत कर्मचारियों का स्वास्थ्य एक दूसरे के पूरक होते है। यदि कर्मचारियों के स्वास्थ्य पर बराबर ध्यान नही दिया गया तो उसका असर उसके उत्पादन पर भी पड़ेगा। आर.एल.आई. कोलकाता के डायरेक्टर श्री यू.के.दास ने औद्यागिक स्वास्थ्य, सुरक्षा और पर्यावरण के संबंध में राष्ट्रीय नीति को विस्तार से बताया। उन्होंने उद्योंगो के सभी चरणों में सुरक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण का विशेष ध्यान रखने को कहा। श्री दास ने संस्थान द्वारा किये जा रहे जागरूकता कार्यक्रम, शोध और विकास, क्षमता विकास कार्यक्रम, आकड़ो का संग्रहण और पब्लिक प्राईवेट पाटनर्रशिप के संबंध में प्रकाश डाला। कार्यशाला में श्री सारंग महाजन शून्य दुर्घटना की दिशा में पहला कदम विषय पर और जिंदल स्टील एण्ड पावर लिमिटेड के वरिष्ठ महानिदेशक डॉ. पी.सी.निपानी ने इस्पात उद्योग में जोखिम पूर्ण परिस्थितियां विषय पर अपनी बात रखी। बाल्कों के महानिदेशक श्री एल.के. सिंह ने पावर प्लांट के जोखिम पूर्ण परिस्थितियां के संबंध में प्रकाश डाला।
राज्य सरकार के श्रम विभाग द्वारा छत्तीसगढ़ में संचालित सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के उद्योगों में कार्यरत विभिन्न श्रेणियों के कामगारों को उनके काम-काज के दौरान सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण दिलानें के लिए विभिन्न उपायों पर विचार विमर्श करने यह कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में फिक्की, छत्तीसगढ़ उद्योग महासंघ, पीएचडी चेम्बर ऑफ कार्मस इन्डस्ट्री, मिनी स्टील प्लांट एसोसियेशन, स्पंज आयरन एसोसियेशन, सीमेंट मेनुफेक्चर यूनियन के पदाधिकारियों सहित विभिन्न सार्वजनिक और निजी उद्योगों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
कार्यशाला का शुभारंभ श्रम मंत्री श्री चंद्रशेखर साहू और अन्य अतिथियों ने भगवान विश्वकर्मा के तैलचित्र के सम्मुख दीप प्रज्जवलित कर किया। कार्यशाला को संबोधित करते हुए श्रम मंत्री श्री साहू ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में प्रदेश में पहली बार श्रमिकों के लिए अनेक कल्याणकारी योजनाओं की शुरूआत की गई है। उन्होंने कहा कि राज्य निर्माण के समय प्रदेश में जहां दो हजार कारखाने और उद्योग संचालित थे जो आज बढ़कर चार हजार से अधिक हो गये है। इसी तरह वर्ष 2000 में जहां प्रदेश के एक लाख 43 हजार श्रमिक नियोजित थे वहीं आज विभिन्न कारखानों में 2 लाख 8 हजार कामगार नियाजित हो रहे है। श्री साहू ने उद्योगों में बढ़ती दुर्घटना पर चिंता जाहिर करते हुए उद्योगों के प्रबंधकों से इन दुर्घटनाओं को रोकने तथा वहां कार्यरत कामगारों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए बेहतर से बेहतर व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस दिशा में यह कार्यशाला उद्योगों के लिए मील का पत्थर साबित होगी। श्री साहू ने कहा कि आर्थिक मंदी के दौर में भी छत्तीसगढ़ इससे अप्रभावित रहा और यहॉ उद्योंगों की स्थापना जारी रही। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में मौजूद वन, जल और खनिज संपदा के आकूत भण्डार को देखते हुए आज यह देश और विदेश के उद्योगपतियों के लिए आशा का केन्द्र बना हुआ है। हम सभी की यह समन्वित जवाबदारी है कि पूंजी और श्रम के सही तालमेल से प्रदेश को औद्योगीकरण की दिशा में आगे ले जाये। उन्होंने कहा कि इस अवसर पर हम सभी को यह संकल्प लेना चाहिए कि जिस तरह हमारा प्रदेश जीरों पावर कट राज्य बना है उसी तरह हम सभी मिलकर इसे दुर्घटना रहित पावर कट राज्य बनाए।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए श्रम विभाग के प्रमुख सचिव श्री विवेक ढॉड ने कहा कि राज्य में पहली बार इस कार्यशाला के माध्यम से औद्योगिक स्वास्थ्य और सुरक्षा के प्रति लोगों को जागरूक करने की शुरूआत की जा रही है। उन्होंने कहा कि दूसरें कई राज्यों में छत्तीसगढ़ से अधिक कामगार नियोजित है परंतु वहां औद्योगिक दुर्घटना यहॉ से कम है। उद्योगों द्वारा छोटे-छोटे उपायों को न अपनाने और जोखिम भरे कामों को प्रशिक्षत व्यक्तियों से न कराकर ठेका श्रमिकों से कराने के कारण कई बार अप्रत्याशित घटनाएं घट जाती है। एैसी घटनाओं को रोकने के लिए उद्योगों के प्रबंधकों को पूरी संवेदनशीलता से इस ओर ध्यान देना चाहिए। बिना ट्रेनिंग के कर्मगारों को जोखिम भरे कामों में न लगायें। कारखानों में सुरक्षा उपकरणों जैसें हेट, ग्लोबस्, मास्क और सिक्यूरटी बेल्ट अनिवार्य रूप से उपलब्ध करायें ताकि छोटी-छोटी गल्तियों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को टाला जा सकें। श्रमायुक्त श्री आर.सी. सिन्हा ने अपने उद्बोधन में प्रदेश में विभिन्न क्षेत्रों में उद्योगों की संभावनाओं को बताते हुए औद्योगिक दुर्घटनाओं को रोकने के लिए किये जाने वाले प्रयासों के बारें में बताया। उन्होंने प्रबंधकों से उद्योगों में दुर्घटना को कम करने के उपायों को अपनाने और यदि दुर्घटना घट जाती है तो उसके बाद किये जाने वाली तात्कालिक राहत सहायता और प्रभावित व्यक्तियों के आर्थिक-सामाजिक पुनर्वास की जिम्मेवारी का निर्वहन पूरी गंभीरता से करने की बात कही।
कार्यशाला के तकनीकी सत्र को संबोधित करते हुए कारखाना सलाह-सेवा और श्रम संस्थान मुम्बई के निदेशक स्वास्थ्य डॉ. एस.एस.बाघे ने उद्योगों में उद्योग जनित स्वास्थ्य विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उद्योगों के अपशिष्ट पदार्थो और वातावरण प्रदूषण से न केवल उसमें काम करने वाले लोग ही प्रभावित होते है बल्कि उनके आस-पास और उनके परिवार के लोग भी इससे प्रभावित होते है। उन्होंने उद्योगों में प्रदूषण पैदा करने वाले उपकरणों का नियमित अभियांत्रिकी जांच कर उनका सुधार कार्य करने को कहा। डॉ. बाघे ने कहा कि किसी भी उद्योग का उत्पादन और वहां कार्यरत कर्मचारियों का स्वास्थ्य एक दूसरे के पूरक होते है। यदि कर्मचारियों के स्वास्थ्य पर बराबर ध्यान नही दिया गया तो उसका असर उसके उत्पादन पर भी पड़ेगा। आर.एल.आई. कोलकाता के डायरेक्टर श्री यू.के.दास ने औद्यागिक स्वास्थ्य, सुरक्षा और पर्यावरण के संबंध में राष्ट्रीय नीति को विस्तार से बताया। उन्होंने उद्योंगो के सभी चरणों में सुरक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण का विशेष ध्यान रखने को कहा। श्री दास ने संस्थान द्वारा किये जा रहे जागरूकता कार्यक्रम, शोध और विकास, क्षमता विकास कार्यक्रम, आकड़ो का संग्रहण और पब्लिक प्राईवेट पाटनर्रशिप के संबंध में प्रकाश डाला। कार्यशाला में श्री सारंग महाजन शून्य दुर्घटना की दिशा में पहला कदम विषय पर और जिंदल स्टील एण्ड पावर लिमिटेड के वरिष्ठ महानिदेशक डॉ. पी.सी.निपानी ने इस्पात उद्योग में जोखिम पूर्ण परिस्थितियां विषय पर अपनी बात रखी। बाल्कों के महानिदेशक श्री एल.के. सिंह ने पावर प्लांट के जोखिम पूर्ण परिस्थितियां के संबंध में प्रकाश डाला।
क्रमांक-5166/पवन

