ग्यारह बाल श्रमिकों को मिली आजादी
नियोजकों के खिलाफ दर्ज हुए प्रकरण
रायपुर, एक मई 2010
छत्तीसगढ़ में चौदह वर्ष से कम आयु के बच्चों से काम कराना पूरी तरह से प्रतिबंधित है। इस प्रतिबंध का पालन सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार के श्रम विभाग द्वारा गठित विशेष टास्क फोर्स ने सरगुजा जिले में ग्यारह बाल श्रमिकों को मुक्त कराया है। मुक्त कराए गए बाल ईंट भट्टों, सीमेंट ईंट निर्माण इकाई और निजी तालाब गहरीकरण में काम में लगाए गए थे। श्रम विभाग की सरगुजा जिले की टास्क फोर्स ने सदर रोड निवासी श्री विनोद केशरवानी के भिट्ठीकला स्थित ईंट भट्टे से चार बाल श्रमिकों को मुक्त कराया है। फोर्स द्वारा की गयी छापामार कार्रवाई के दौरान भिट्ठीकला में ही श्री अविनाश चोपड़ा की सीमेंट ईंट निर्माण इकाई में काम करने वाले चार बच्चें को छुड़ाया गया है। जिला स्तरीय टास्क फोर्स ने अंम्बिकापुर के श्री नंदकेश्वर रजवाड़े द्वारा तालाब गहरीकरण के काम में लगाए गए तीन बाल श्रमिकों को भी मुक्त कराया है। सभी नियोजकों के खिलाफ बाल श्रम प्रतिषेध एवं विनियमन अधिनियम के तहत न्यायालय में प्रकरण दर्ज किए गए हैं। बाल मजदूरी से छुडाए गए सभी बच्चो की शिक्षा और पुनर्वास के लिए भी शासन द्वारा कार्रवाई की जा रही है।
गौरतलब है कि राज्य में बाल मजदूरी को रोकने के लिए बाल श्रम प्रतिषेध एवं विनियमन अधिनियम लागू किया गया हैं। अधिनियम के तहत प्रदेश के सभी जिलों में श्रम विभाग द्वारा बाल श्रम को रोकने और उस पर निगरानी रखने के लिए विशेष कार्यदल गठित किए गए हैं। अधिनियम के तहत 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से ईट एवं टाईल्स निर्माण इकाईयों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, कारखानों तथा होटलों एवं ढाबों में काम करनाने बीस हजार रूपए प्रति बाल श्रमिक जुर्माना किए जाने का प्रावधान किया गया है। साथ ही बच्चों से ऐसे किसी भी संस्थान में बाल श्रम कराने पर तीन माह का सश्रम कारावास दिए जाने का भी प्रावधान अधिनियम में किया गया है।

