छत्तीसगढ़ में पहली बार बढ़ेगा मजदूरों का मूल वेतन
राज्य शासन ने प्रस्तावित वेतन पुनरीक्षण के लिए जारी की अधिसूचना
तीन माह के भीतर दावा-आपत्तियां आमंत्रित
रायपुर 26 अप्रैल 2010
छत्तीसगढ़ में अकुशल, अर्ध्दकुशल और कुशल श्रमिकों का मूलवेतन बढ़ाने के लिए प्रस्तावित वेतन पुनरीक्षण संबंधी अधिसूचना जारी कर दी गई है। यह अधिसूचना न्यूनतम वेतन सलाहकार मंडल की अनुशंसा पर यहां मंत्रालय से श्रम विभाग द्वारा इस महीने की 21 तारीख को जारी की गई है। अधिसूचना के द्वारा न्यूनतम वेतन अधिनियम के तहत उल्लेखित 33 नियोजनों में कार्यरत मजदूरों की मजदूरी का पुनरीक्षण कर वेतन निर्धारण किया जाएगा। राज्य शासन ने वेतन पुनरीक्षण से प्रभावित नियोजकों और व्यक्तियों से अधिसूचना जारी होने की तारीख से तीन माह के भीतर अभ्यावेदन और दावा आपत्तियां भी आमंत्रित की है। तीन माह की अवधि में दावा आपत्तियां प्राप्त न होने पर अधिसूचना जारी होने की दिनांक से मजदूरों के लिए राज्य में पुनरीक्षित वेतन प्रभावशील किया जाएगा।
श्रम मंत्री श्री चन्द्रशेखर साहू ने आज यहां बताया कि छत्तीसगढ़ निर्माण के बाद पहली बार राज्य सरकार ने प्रदेश के मेहनतकश मजदूरों को उनकी मेहतन का सही दाम दिलाने के लिए वेतन बढ़ाने की सार्थक पहल की है। प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में पहली बार मजदूरों का मूल वेतन बढ़ाने के लिए न्यूनतम वेतन सलाहकार बोर्ड की अनुशंसाओं पर सकारात्मक विचार कर उन्हें लागू करने की कार्रवाई की जा रही है। इसके तहत प्रस्तावित न्यूनतम वेतन पुनरीक्षण के लिए अधिसूचना 21 अप्रैल 2010 को जारी कर दी गई है। श्रम मंत्री ने बताया कि पुनरीक्षित वेतन में अकुशल मजदूरों का मूल वेतन 39 रूपए प्रतिदिन से 93 रूपए बढ़ाकर 132 रूपए प्रतिदिन किया जाना प्रस्तावित है। इसी प्रकार अर्धकुशल श्रमिकों का मूल वेतन 43 रूपए प्रतिदिन से 96 रूपए बढ़ाकर 139 रूपए और कुशल श्रमिकों का मूल वेतन 47 रूपए प्रतिदिन से 102 रूपए बढ़ाकर 149 रूपए प्रतिदिन किया जाना प्रस्तावित किया गया है। श्री साहू ने बताया कि इस प्रकार अकुशल श्रमिकों को प्रतिमाह तीन हजार 432 रूपए के मूल वेतन सहित 338 रूपए परिवर्तनशील भत्ता मिलाकर तीन हजार 770 रूपए प्रतिमाह वेतन मिल सकेगा। अर्ध्दकुशल श्रमिकों का न्यूनतम मूलवेतन तीन हजार 614 रूपए पर 338 रूपए परिवर्तनशील भत्ता मिलाकर तीन हजार 952 रूपए और कुशल श्रमिकों को न्यूनतम मूलवेतन तीन हजार 874 रूपए पर 338 रूपए परिवर्तनशील भुगतान मिलाकर चार हजार 212 रूपए प्रतिमाह वेतन प्राप्त हो सकेगा।
श्रम विभाग के प्रमुख सचिव श्री विवेक ढांड ने मजदूरों के वेतन पुनरीक्षण के विषय में बताया कि आगामी तीन महीनों में इस प्रस्तावित न्यूनतम वेतन पुनरीक्षण से प्रभावित होने वाले नियोजकों, संस्थानों और व्यक्तियों से दावा-आपत्तियां और अभ्यावेदन द्वारा आमंत्रित किये गये हैं। इस अवधि में प्राप्त दावा-आपत्तियों का निराकरण न्यूनतम वेतन सलाहकार मंडल से विचार-विमर्श कर राज्य शासन द्वारा किया जाएगा। तीन महीनों में कोई भी दावा-आपत्ति या अभ्यावेदन प्राप्त न होने की दशा में पुनरीक्षित वेतन अधिसूचना जारी होने की दिनांक से प्रदेश में लागू हो जाएगा। श्री ढांड ने बताया कि प्रस्तावित पुनरीक्षित वेतन कपास जिनिंग एवं प्रेसिंग कारखानों, वनउप और वन लगाने में लगे मजदूरों, सड़क बनाने और भवन बनाने में लगे मजदूरों, लोक मोटर परिवहन, इंजीनियरिंग उद्योगों, सिंचाई संबंधी कार्यों, दवाई और रसायन निर्माता कारखानों सहित आरामिल, तेलमिल, चावल मिल, आटा मिल, दालमिल, पोहा मिल, विस्किट आईसक्रीम कम्पनियों, पेय पदार्थ निर्माता कम्पनियों और पत्थर तोड़ने-पीसने, चूना भट्ठी और ईट भट्ठों में काम करने वाले मजूदरों को लाभान्वित करेगा। प्रस्तावित पुनरीक्षित वेतन लागू हो जाने से छत्तीसगढ़ में प्लास्टिक उद्योग, प्रिटिंग प्रेसों, होटलों और वाणिज्य संस्थानों, कोसा उद्योगों, हाथकरघा उद्योगों, टाइल्स उद्योगों सहित स्लेट पेन्सिल बनाने, कबल बनाने, गेरू बनाने, कत्था बनाने और पाटरिज उद्योग में लगे मजदूरों को भी बढ़ा हुआ वेतन मिल सकेगा।
श्रम मंत्री श्री चन्द्रशेखर साहू ने आज यहां बताया कि छत्तीसगढ़ निर्माण के बाद पहली बार राज्य सरकार ने प्रदेश के मेहनतकश मजदूरों को उनकी मेहतन का सही दाम दिलाने के लिए वेतन बढ़ाने की सार्थक पहल की है। प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में पहली बार मजदूरों का मूल वेतन बढ़ाने के लिए न्यूनतम वेतन सलाहकार बोर्ड की अनुशंसाओं पर सकारात्मक विचार कर उन्हें लागू करने की कार्रवाई की जा रही है। इसके तहत प्रस्तावित न्यूनतम वेतन पुनरीक्षण के लिए अधिसूचना 21 अप्रैल 2010 को जारी कर दी गई है। श्रम मंत्री ने बताया कि पुनरीक्षित वेतन में अकुशल मजदूरों का मूल वेतन 39 रूपए प्रतिदिन से 93 रूपए बढ़ाकर 132 रूपए प्रतिदिन किया जाना प्रस्तावित है। इसी प्रकार अर्धकुशल श्रमिकों का मूल वेतन 43 रूपए प्रतिदिन से 96 रूपए बढ़ाकर 139 रूपए और कुशल श्रमिकों का मूल वेतन 47 रूपए प्रतिदिन से 102 रूपए बढ़ाकर 149 रूपए प्रतिदिन किया जाना प्रस्तावित किया गया है। श्री साहू ने बताया कि इस प्रकार अकुशल श्रमिकों को प्रतिमाह तीन हजार 432 रूपए के मूल वेतन सहित 338 रूपए परिवर्तनशील भत्ता मिलाकर तीन हजार 770 रूपए प्रतिमाह वेतन मिल सकेगा। अर्ध्दकुशल श्रमिकों का न्यूनतम मूलवेतन तीन हजार 614 रूपए पर 338 रूपए परिवर्तनशील भत्ता मिलाकर तीन हजार 952 रूपए और कुशल श्रमिकों को न्यूनतम मूलवेतन तीन हजार 874 रूपए पर 338 रूपए परिवर्तनशील भुगतान मिलाकर चार हजार 212 रूपए प्रतिमाह वेतन प्राप्त हो सकेगा।
श्रम विभाग के प्रमुख सचिव श्री विवेक ढांड ने मजदूरों के वेतन पुनरीक्षण के विषय में बताया कि आगामी तीन महीनों में इस प्रस्तावित न्यूनतम वेतन पुनरीक्षण से प्रभावित होने वाले नियोजकों, संस्थानों और व्यक्तियों से दावा-आपत्तियां और अभ्यावेदन द्वारा आमंत्रित किये गये हैं। इस अवधि में प्राप्त दावा-आपत्तियों का निराकरण न्यूनतम वेतन सलाहकार मंडल से विचार-विमर्श कर राज्य शासन द्वारा किया जाएगा। तीन महीनों में कोई भी दावा-आपत्ति या अभ्यावेदन प्राप्त न होने की दशा में पुनरीक्षित वेतन अधिसूचना जारी होने की दिनांक से प्रदेश में लागू हो जाएगा। श्री ढांड ने बताया कि प्रस्तावित पुनरीक्षित वेतन कपास जिनिंग एवं प्रेसिंग कारखानों, वनउप और वन लगाने में लगे मजदूरों, सड़क बनाने और भवन बनाने में लगे मजदूरों, लोक मोटर परिवहन, इंजीनियरिंग उद्योगों, सिंचाई संबंधी कार्यों, दवाई और रसायन निर्माता कारखानों सहित आरामिल, तेलमिल, चावल मिल, आटा मिल, दालमिल, पोहा मिल, विस्किट आईसक्रीम कम्पनियों, पेय पदार्थ निर्माता कम्पनियों और पत्थर तोड़ने-पीसने, चूना भट्ठी और ईट भट्ठों में काम करने वाले मजूदरों को लाभान्वित करेगा। प्रस्तावित पुनरीक्षित वेतन लागू हो जाने से छत्तीसगढ़ में प्लास्टिक उद्योग, प्रिटिंग प्रेसों, होटलों और वाणिज्य संस्थानों, कोसा उद्योगों, हाथकरघा उद्योगों, टाइल्स उद्योगों सहित स्लेट पेन्सिल बनाने, कबल बनाने, गेरू बनाने, कत्था बनाने और पाटरिज उद्योग में लगे मजदूरों को भी बढ़ा हुआ वेतन मिल सकेगा।
क्रमांक-493/नागेश

