छत्तीसगढ़ में कोयला, लाईम स्टोन,लौह अयस्क और बॉक्साइट के मिले नये भण्डार
राज्य स्तरीय भू-वैज्ञानिक कार्यक्रम मंडल की ग्यारहवीं बैठक सम्पन्न
रायपुर 19 अगस्त 2011
छत्तीसगढ़ में कोयला, लौह अयस्क, लाईम स्टोन और बॉक्साइट के नये भंडार का पता चला है। यह जानकारी आज यहां नवीन विश्राम गृह में खनिज साधन विभाग के सचिव श्री विजयेन्द्र की अध्यक्षता में आयोजित राज्य स्तरीय भू-वैज्ञानिक कार्यक्रम मंडल की ग्यारहवीं बैठक में दी गई। बैठक में भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण रायपुर सर्किल के निदेशक, एटामिक मिनरल डिवीजन, भारतीय भू-वैज्ञानिक
सर्वेक्षण (कोयला प्रभाग) कोलकाता, मिनरल एक्सप्लोरेशन कार्पोरेशन, सीएमडीसी रायपुर, भारतीय खान ब्यूरो नागपुर, एन.एम.डी.सी हैदराबाद, छत्तीसगढ़ शासन के वन विभाग, सीएमडीसी, संचालनालय भौमिकी एवं खनिकर्म तथा संबंधित संस्थानों के भू-वैज्ञानिक और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
बैठक में बताया गया कि रायपुर जिले के देवगांव, कुर्रा क्षेत्र एवं बस्तर जिले के भण्डारीरास और देवरापाल क्षेत्र में, क्रमश: 50 मिलियन टन एवं 6.7 मिलियन टन सीमेंट ग्रेड लाइम स्टोन के नये भण्डार प्रमाणित किये गये हैं । इसी तरह कोरबा जिले के सेला ब्लाक में 51 मिलियन टन कोयला के भंडार अनुमानित किया गया है। रायगढ़ जिले के गरेपालमा सेक्टर-1 में 29 मिलियन टन कोयला के भण्डार तथा सरगुजा जिले के सरभंजा एवं ढ़ांडकेसरा क्षेत्र में 4.0 लाख टन एवं कबीरधाम जिले के दरई क्षेत्र में 1.0 लाख टन बॉक्साइट के भण्डार चिन्हित किये गये हैं। बैठक में राष्ट्रीय खनिज विकास निगम के अधिकारी ने बताया कि वर्ष 2010-11 के दौरान बैलाडीला डिपाजिट नं. 11 ए, 11 सी और 14 में 7000 मीटर खनन के द्वारा 100 मिलियन टन से अधिक लौह अयस्क के अतिरिक्त भण्डार चिन्हित किये गये हैं। इसके साथ ही वर्ष 2011-12 में इन क्षेत्रों में अतिरिक्त लौह अयस्क के भण्डार सुनिश्चित करने के लिए दस हजार 500 मीटर ड्रिलिंग करने का लक्ष्य रखा है ।
खनिज साधन विभाग के सचिव श्री विजयेन्द्र ने बैठक में बताया कि देश में 2001 में 250 मिलियन टन की तुलना में 2010 में कुल 480 मिलियन टन कोयले का उत्पादन हुआ है। उन्होंने कहा कि कोयले के उत्पादन में यह वृद्वि कोई बहुत अधिक नहीं है । देश के विकास के लिए समुचित विद्युत उत्पादन के लिए कोयले के उत्पादन में काफी वृध्दि किये जाने की आवश्यकता है । उन्होंने प्रदेश में उत्पादन योग्य नये कोयले के भण्डार चिन्हित किये जाने की आवश्यकता पर जोर दिया । उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में खनिज के विकास के लिए कार्य करने वाली एजेंसियों के मध्य और अधिक समन्वय बनाकर कार्य करने की जरूरत है। श्री विजयेन्द्र ने कहा कि छत्तीसगढ़ में आज भी खनन क्षेत्र का कुल योगदान 7000 करोड़ है, जबकि कृषि क्षेत्र का योगदान 9000 करोड़ रूपये है । छत्तीसगढ़ में उपलब्ध खनिजों के विकास के लिए राज्य शासन द्वारा हरसंभव प्रयास किये जा रहे हैं, जिसके तहत विभिन्न खनिजों के खनिपट्टा एवं पूर्वेक्षण अनुज्ञप्ति स्वीकृत किये जाने की त्वरित कार्यवाही की जा रही है । मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा प्रदेश में खनिज विकास के मार्ग में आने वाले समस्याओं के निराकरण हेतु विभिन्न विभागों के मध्य समन्वय स्थापित किया जा रहा है । उन्होंने ने भू-वैज्ञानिकों एवं वरिष्ठ अधिकारियों से कहा कि छत्तीसगढ़ में नये खनिज भण्डारों के मिलने की अपार संभावनाएँ हैं। प्रदेश में कार्यरत विभागों एवं संस्थानों के आपसी समन्वय एवं सहयोग से नये खनिज भण्डारों की खोज की जा सकती है, जो कि प्रदेश के औद्योगिक विकास में सहायक होगा। श्री विजयेन्द्र ने बैठक में बताया कि वर्ष 2010-11 में लगभग पन्द्रह हजार करोड़ रूपए मूल्य के खनिजों का उत्पादन कर छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय स्तर पर द्वितीय स्थान पर रहा । राज्य के खनिज विभाग ने वर्ष 2010-11 में 2461 करोड़ रूपये का खनिज राजस्व अर्जित कर राज्य की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
बैठक में केन्द्र तथा राज्य शासन के विभिन्न विभागों, उपक्रमों के प्रतिनिधियों द्वारा छत्तीसगढ़ में किये गये खनिज अन्वेषण कार्यों की जानकारी दी गई। भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग के श्री पटेल ने बताया कि भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग के सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ में मुख्य खनिज यथा कोयला, स्वर्ण, हीरा, लौह अयस्क, फॉसफोराइट, आदि खनिजों के लिए सर्वेक्षण कार्य किया गया है। उन्होंने बताया कि कांकेर जिले के आरीडोंगरी, में लौह अयस्क खनिज सर्वेक्षण का कार्य किया जा रहा है। बिलासपुर जिले में हीरे की मातृशिला, किम्बरलाईट की खोज का कार्य किया जा रहा है । दुर्ग जिले के करेण्डाडीह-भरगांव-संबलपुर क्षेत्र में निम्न श्रेणी के फास्पोराईट भण्डार खनिज के क्षेत्र चिन्हित किये गये हैं । बैठक में वर्ष 2011-2012 में छत्तीसगढ़ में विभिन्न विभागों द्वारा किये जाने खनिज अन्वेषण कार्य पर चर्चा की गई। इस वर्ष भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण द्वारा प्रमुख रूप से स्वर्ण, हीरे की मातृशिला किम्बरलाईट एवं भू-रासायनिक सर्वेक्षण का कार्य छत्तीसगढ़ में प्रस्तावित है । संचालनालय भौमिकी तथा खनिकर्म छत्तीसगढ़ द्वारा वर्ष 2011-12 में जिला सरगुजा एवं कोरबा में कोयला, जिला सरगुजा के मैनपाट क्षेत्र व जिला कबीरधाम में बॉक्साइट, जिला रायपुर में चूनापत्थर एवं जिला बस्तर में चूनापत्थर, लौह अयस्क व ग्रेनाईट खनिजों के लिये सर्वेक्षण, पूर्वेक्षण कार्य किया जाना प्रस्तावित है । राज्य शासन द्वारा जिला कांकेर, नारायणपुर, दन्तेवाड़ा एवं बीजापुर में लौह अयस्क के पूर्वेक्षण कार्य हेतु अधिसूचित 17 क्षेत्रों और रायपुर जिलें में मेंगनीज खनिज के पूर्वेक्षण हेतु अधिसूचित किये गये दो क्षेत्रों में भी संचालनालय भौमिकी तथा खनिकर्म के माध्यम से वर्ष 2011-12 के दौरान पूर्वेक्षण किया जाएगा।
बैठक में छत्तीसगढ़ में खनिज अन्वेषण एवं खनिजों के दोहन क्षेत्र में कार्यरत भारत सरकार और राज्य सरकार के विभागों एवं संस्थानों द्वारा वर्ष 2010-11 में किये गये कार्यों की समीक्षा की गई। इसके साथ ही वर्ष 2011-2012 में प्रस्तावित भू-वैज्ञानिक कार्यक्रम को भी अंतिम रूप दिया गया।

