गौण खनिजों की सम्पूर्ण रायल्टी अब पंचायतों को
छत्तीसगढ़ में गौण खनिजों के अवैध उत्खनन-परिवहन रोकने पंचायतों को दिए गए व्यापक अधिकार
निरीक्षण और जुर्माना लगाने की भी शक्तियां मिली
ग्राम विकास के लिए हर पंचायत करे इन अधिकारों का इस्तेमाल : डॉ. रमन सिंह
पंचायतों को और भी ज्यादा ताकतवर बनाने के लिए छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार ने उन्हें ग्रामीण क्षेत्रों में गौण खनिजों के अवैध उत्खनन और अवैध परिवहन रोकने और ऐसे अवैध कारोबार में लिप्त वाहनों, औजारों और उपकरणों को जप्त करने सहित कई व्यापक अधिकार, ग्राम पंचायतों, जनपद पंचायतों और जिला पंचायतों को सौंपे गए हैं। खनिज साधन विभाग द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में पोस्टर आदि के जरिए इन अधिकारों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने पंचायतों से गांवों के विकास के लिए इन अधिकारों का इस्तेमाल करने की अपील की है। उन्होंने पंच-सरपंचों और अन्य सभी पंचायत प्रतिनिधियों से पंचायत राज संस्थाओं को दिए गए इन अधिकारों के बारे में जानने और पंचायतों की आमदनी बढ़ाने का भी आव्हान किया है।
विभागीय अधिकारियों ने आज यहां बताया कि राज्य शासन द्वारा रेत के खनन और व्यवसाय के अधिकार भी ग्राम पंचायतों और जनपद पंचायतों को सौंप दिए गए हैं। अब छत्तीसगढ़ में रेत से प्राप्त रायल्टी पर संबंधित ग्राम पंचायतों और जनपद पंचायतों का अधिकार हो गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में गौण खनिजों से प्राप्त रायल्टी की सम्पूर्ण राशि ग्राम पंचायतों और जनपद पंचायतों को वितरित की जा रही है, ताकि इस राशि का उपयोग गौण खनिजों के उत्खनन क्षेत्रों और उनके आस-पास के इलाकों में विकास कार्यों के लिए किया जा सके। वित्तीय वर्ष 2009-10 में 67 करोड़ 36 लाख रूपए और इसके पूर्व के वर्ष 2008-09 में 52 करोड़ 36 लाख रूपए की गौण खनिज रायल्टी का वितरण पंचायतों को किया गया। राज्य शासन द्वारा पंचायतों को गौण खनिजों के अवैध उत्खनन और परिवहन पर अंकुश लगाने के लिए जुर्माना लगाने का भी अधिकार दिया गया है।
अधिकारियों ने बताया कि राज्य शासन द्वारा पंचायतों को अपने क्षेत्र में अवैध रूप से उत्खनित खनिज या अवैध रूप से ले जाए जा रहे खनिज को जप्त करने का और किसी भी गौण खनिज पटटा धारक की खदानों की निरीक्षण का अधिकार भी पंचायतों को सौंपा गया है। इतना ही नहीं बल्कि उन्हें गौण खनिज पटटा धारक के अभिलेखों की जांच करने का अधिकार भी दिया गया है। राज्य सरकार के खनिज साधन विभाग ने छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियम 1996 के तहत पंचायतों को ये अधिकार सौंपते हुए यह भी कहा है कि उत्खनन पटटा मंजूर करने से पहले संबंधित ग्राम पंचायतों का अभिमत प्राप्त करना भी जरूरी हो गया है। गौण खनिजों के उत्खनन पटटे और अनुज्ञा पत्र देने के लिए संबंधित पंचायत क्षेत्रों के अनुसूचित जातियों, जनजातियों, अन्य पिछड़े वर्गों और शिक्षित बेरोजगारों की सहकारी समितियों को प्राथमिकता दी जा रही है। उत्खनन अनुज्ञा पत्र केवल संबंधित ग्राम पंचायत क्षेत्र के निवासियों को ही स्वीकृत करने का प्रावधान भी किया गया है।

