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अन्य पिछड़े वर्गो में क्रीमीलेयर निर्धारण

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आय गणना के लिए 'संयुक्त रूप से' शब्दों को विलोपित किया गया

सामान्य प्रशासन विभाग ने जारी किया परिपत्र

रायपुर, 06 जून 2011
अन्य पिछड़े वर्गों में से सम्पन्न वर्गो अर्थात क्रीमी लेयर का निर्धारण करन के लिए अब छत्तीसगढ़ में भी वेतन अथवा कृषि भूमि से प्राप्त आय को नहीं जोड़ा जाएगा। राज्य सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा यहां मंत्रालय से जारी अपने विगत 24 जून 2009 के अपने परिपत्र में से 'संयुक्त रूप से' शब्दों को विलोपित कर दिया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने इस महीने की दो तारीख को इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करते हुए नया परिपत्र जारी किया है। इसमें कहा गया है कि अन्य पिछड़े वर्गो अर्थात ओ.बी.सी. में सम्पन्न वर्ग (क्रीमीलेयर) का निर्धारण करने के संध में भारत सरकार के कार्मिक, लोक शिकायत तथा पेंशन मंत्रालय (कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग) द्वारा जारी 14 अक्टूबर 2008 के कार्यालय ज्ञापन में आय/सम्पत्तिा के निर्धारण के संबंध में यह स्पष्टीकरण दिया गया है कि वेतन अथवा कृषि भूमि से प्राप्त आय को नहीं जोड़ा जाएगा। भारत सरकार के इस कार्यालय ज्ञापन के अनुसार ही छत्तीसगढ़ में भी राज्य शासन के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा अपने 24 जून 2009 के परिपत्र में अन्य पिछड़े वर्गो में सम्पन्न वर्ग (क्रीमीलेयर) का निर्धारण करने के लिए वार्षिक आय सीमा दो लाख रूपए से बढ़ाकर चार लाख 50 हजार रूपए किया गया है, लेकिन इसमें आय/सम्पत्ति के आंकलन के संबंध में यह स्पष्टीकरण दिया गया है कि वेतन अथवा कृषि भूमि से प्राप्त आय को संयुक्त रूप से नहीं जोड़ा जाएगा। राज्य शासन के ध्यान में यह बात आयी है कि 24 जून 2009 के इस परिपत्र में आय/सम्पत्ति आंकलन के संबंध में दिया गया स्पष्टीकरण भारत सरकार के कार्यालय ज्ञापन में दिए गए स्पष्टीकरण से भिन्न होने के कारण सम्पन्न वर्ग (क्रीमीलेयर) के निर्धारण के संबंध में प्रमाण पत्र जारी करने वाले अधिकारियों और संबंधित पालकों के बीच क्रीमीलेयर के संबंध में भ्रांति व्याप्त है। इस वजह से भी राज्य में पात्रता रखने वाले कई व्यक्ति शासन द्वारा दिए जा रहे लाभ एवं अधिकारों से वंचित हो जाते हैं। छत्तीसगढ़ सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने इसे ध्यान में रखकर अपने 24 जून 2009 के परिपत्र में उल्लेखित 'संयुक्त रूप से' शब्दों को विलोपित कर दिया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने दो जून 2011 को इस संबंध में शासन के सभी विभागाध्यक्षों, अध्यक्ष राजस्व मण्डल, समस्त संभागीय आयुक्तों और सभी जिला कलेक्टरों को इस संबंध में यह नया परिपत्र जारी किया है।
क्रमांक-1112/स्वराज्य

 

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