छत्तीसगढ़ में 1.77 लाख से अधिक मछुआरों का नि:शुल्क दुर्घटना बीमा
रायपुर, 19 जून 2010
छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय मछुआ कल्याण कार्यक्रम के तहत पिछले तीन वर्षों में एक लाख 77 हजार 441 मछुआरों का नि:शुल्क दुर्घटना बीमा कराया गया है। मत्स्यजीव दुर्घटना बीमा योजना के तहत वर्ष 2007-08 में 42 हजार 299, 2008-09 में 63 हजार 142 और वर्ष 2009-10 में 72 हजार मछुआरों का दुर्घटना बीमा कराया गया है। योजना के तहत पिछले वर्ष दिसम्बर माह में राष्ट्रीय मत्स्य जीवी सहकारी संघ द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य को मछुआरों के दुर्घटना बीमा कराने में विशेष उपलब्धि हासिल करने पर तीसरा पुरस्कार भी प्रदान किया गया है।
मछलीपालन विभाग के अधिकारियों ने यहां बताया कि मत्स्य कृषकों और मछुआरों की मछलीपालन करते अथवा मछली पकड़ते समय दुर्घटना होने पर मृत्यु हो जाने या अपंगता हो जाने पर क्षतिपूर्ति दिलाने के लिए दुर्घटना बीमा योजना के तहत बीमा कराया जाता है। यह दुर्घटना बीमा राज्य और केन्द्र सरकार के बराबर अंशदान से कराया जाता है। अधिकारियों ने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष 2010-11 से मत्स्य जीवी दुर्घटना बीमा योजना के प्रावधानों में संशोधन कर दिया गया है। अब मछुआरों की बीमा की वार्षिक प्रीमियम राशि तीस रूपए निर्धारित की गयी है, जिसमें पन्द्रह रूपए राज्य सरकार द्वारा तथा पन्द्रह रूपए केन्द्र सरकार द्वारा उपलब्ध कराए जाएंगे। इस प्रकार मछुआरों को दुर्घटना बीमा कराने के लिए कोई राशि नहीं देनी होती है। योजना के तहत चालू वित्तीय वर्ष 2010-11 से बीमित मछुआरों की मछलीपालन करते या मछली पकड़ते समय दुर्घटनावश मृत्यु होने उसके नामित व्यक्ति को और स्थाई अपंगता होने पर स्वयं पीड़ित व्यक्ति को अब एक लाख रूपए की क्षतिपूर्ति राशि प्रदान की जाएगी। इसी प्रकार अस्थाई अपंगता पर बीमित हितग्राही को पचास हजार रूपए की सहायता मिलेगी। इस दुर्घटना बीमा योजना में लीज पर तालाब और जलाशय लेकर मछलीपालन करने वाले सभी मछुआरों को शामिल किया जाता है। मछुआरों का बीमा एक वर्ष की अवधि के लिए किया जाता है। मछुआरें दुर्घटना बीमा कराने के लिए विकासखंड स्तर पर मत्स्य निरीक्षकों और जिला स्तर पर जिला मत्स्योद्योग अधिकारी से सम्पर्क कर सकते हैं।

