छत्तीसगढ़ में फलों की पैदावार में दस गुना से अधिक वृध्दि
फलदार बाग-बगीचों का रकबा भी लगभग नौ गुना बढ़ा
फलदार बगीचों के लिए किसानों को अनुदान की सुविधा
रायपुर, 24 जून 2010
छत्तीसगढ़ में स्वादिष्ट और स्वास्थ्य वर्धक फलों के बाग-बगीचों का रकबा और उत्पादन तेजी से बढ़ता जा रहा है। राज्य शासन की लाभदायक योजनाओं के चलते अब किसान फलों के बाग लगाने में भी रूचि ले रहे हैं। पिछले छह वर्षो में राज्य सरकार ने उद्यानिकी विभाग के माध्यम से फलोद्यान विकास के लिए संचालित योजनाओं द्वारा प्रदेश में फलोद्यानों के रकबे में लगभग नौ गुना एवं फलों के उत्पादन में साढ़े दस गुना वृध्दि दर्ज की है। वर्ष 2003-04 में फलोद्यानों का रकबा सोलह हजार 803 हेक्टेयर एवं उत्पादन एक लाख 17 हजार मीटरिक टन था जबकि वर्ष 2009-10 में प्रदेश में फलोद्यानों का रकबा एक लाख 46 हजार 705 हेक्टेयर तथा फलों का उत्पादन बारह लाख 14 हजार 552 मीटरिक टन तक पहुंच गया है। किसान अपनी सीमित भूमि में आम, नीबू, लीची, संतरा, अंगूर, बेल, केला, पपीता आदि के बगीचे लगाकर खेती के साथ-साथ अतिरिक्त आमदनी भी हासिल कर रहे हैं। राज्य शासन द्वारा विभिन्न योजनाओं के तहत फलदार बगीचे लगाने के लिए किसानों को दस हजार रूपए से लेकर साढ़े 22 हजार रूपए तक की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इसके साथ ही 11 जिलों में राष्ट्रीय बागवानी मिशन और सात जिलों में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत किसानों को फलों के बगीचें लगाने के साथ-साथ उद्यानिकी फसलों की खेती के लिए आकर्षक अनुदान पैकेज भी उपलब्ध कराया जा रहा है।
उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि फलोद्यान विकास योजना के तहत किसानों को राज्य पोषित योजना के अन्तर्गत आम के बगीचे लगाने के लिए किसानों को दस हजार 938 रूपए तक की आर्थिक सहायता अनुदान के रूप में दिया जा रहा है। आम के बगीचे लगाने वाले किसानों को यह सहायता पांच वर्षों में दी जाती है। बगीचे लगाने के लिए बैंक से ऋण लेने पर भी किसानों को लागत के 25 प्रतिशत तक का अनुदान राज्य शासन द्वारा उपलब्ध कराया जाता है। निश्चित सिंचाई के साधन वाले किसानों को ही योजना का लाभ दिया जाता है। एक किसान को कम से कम आधा एकड़ और अधिकतम दो हेक्टेयर तक फलोद्यान लगाने के लिए अनुदान दिया जाता है। किसानों को पहले साल अनुदान की 25 प्रतिशत राशि दो किश्तों में दी जाती है। प्रथम किश्त की 50 प्रतिशत राशि किसान द्वारा किए गए कार्य एवं पौध रोपण का सत्यापन करने के बाद सितम्बर माह में तथा शेष 50 प्रतिशत राशि कम से कम 90 प्रतिशत पौधे जीवित पाए जाने पर जनवरी माह में उपलब्ध कराई जाती है। दूसरे वर्ष से पांचवें वर्ष तक हर जनवरी माह में किए गए कार्य और पौधों के जीवित प्रतिशत के सत्यापन के बाद 25 प्रतिशत अनुदान की राशि स्वीकृत की जाती है। ऐसे कृषक जो समय पर कार्य कराने एवं सामग्री जुटाने में असमर्थता व्यक्त करते हैं, उनसे लिखित आवेदन लेकर विभागीय तौर पर यह व्यवस्था कराई जाती है।
अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में संचालित राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत ग्यारह जिलों के किसानों को आम, लीची, नीबू आदि के बगीचे लगाने के लिए अधिकतम 22 हजार 500 रूपए प्रति हेक्टेयर की दर से आर्थिक सहायता दी जाती है। यह सहायता लगातार तीन सालों तक 50, 20 एवं 30 प्रतिशत के हिसाब से दी जाती है।

