लियेंडर पेस ने राज्यपाल से मुलाकात की लगभग दो दशक बाद फिर शुरू हुआ गोंडवाना कप राष्ट्रीय टेनिस टूर्नामेंट:मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने किया शुभारंभ मंत्रिपरिषद की बैठक : छत्तीसगढ़ में गौ हत्या पर अब और अधिक कठोर कारावास हीरानार नल-जल योजना के लिए 19.42 लाख रूपए स्वीकृत ग्राम कुथुर के लिए नल-जल योजना स्वीकृत उर्दू अकादमी में अध्यक्ष-उपाध्यक्ष सहित सदस्यों का मनोनयन मुख्यमंत्री ग्राम उत्कर्ष योजना : अब तक 153.40 करोड़ की लागत के सात हजार से ज्यादा विकास कार्य पूर्ण सक्षम योजना : राज्य की 284 महिलाओं को स्वरोजगार के लिए मिला 1.62 करोड़ रूपए का ऋण ग्राम पंचायतें अब दस लाख रूपये तक के निर्माण कार्य कर सकेंगे कमरौद स्कूल का नामकरण अहिल्या बाई त्रेतानाथ के नाम पर गलफुल्ला और चनान नदी पर बनेंगे उच्च स्तरीय पुल मुख्यमंत्री से मध्यप्रदेश के कृषि मंत्री श्री बिसेन की सौजन्य मुलाकात मुख्यमंत्री से अभनपुर नगर पंचायत के प्रतिनिधि मण्डल की मुलाकात श्री केदार कश्यप से पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य श्री शिव चन्द्राकर ने सौजन्य मुलाकात की उपार्जन केन्द्रों में तेजी से हो रही धान की आवक श्रम मंत्री श्री साहू की अध्यक्षता में असंगठित श्री केदार कश्यप के नेतृत्व में प्रतिनिधि मंडल नई दिल्ली प्रवास पर आज करेंगे केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री से मुलाकात कृषि मंत्री श्री साहू ने किया खारून नदी पर एनीकट सह रपटे का भूमिपूजन राज्यपाल से सीमा सुरक्षा बल के महानिदेशक ने सौजन्य मुलाकात की मुख्यमंत्री के समक्ष जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन पर प्रस्तुतिकरण मुख्यमंत्री से सीमा सुरक्षा बल के महानिदेशक ने सौजन्य मुलाकात की

Personal tools
You are here: Home समाचार अन्य समाचार मगरमच्छों का गांव कोटमीसोनार

मगरमच्छों का गांव कोटमीसोनार

What
When Aug 28, 2011
from 07:45 PM to 07:45 PM
Add event to calendar vCal
iCal

रायपुर 28 अगस्त 2011

    मगरमच्छ देखने के लिए आम तौर पर व्यक्ति को किसी चिड़ियाघर में जाना पड़ता है, लेकिन हमारे छत्तीसगढ़ में ही एक ऐसा गांव है, जहां मगरमच्छों को उनके प्राकृतिक वातावरण में सहज रूप से देखा जा सकता है। जांजगीर-चांपा जिले के अकलतरा विकासखंड का गांव कोटमीसोनार आज केवल मगरमच्छों के 2489-280811कारण प्रसिध्द हुआ है। कुछ वर्ष पहले तक यहां मगरमच्छों का स्वछंद विचरण होता था, इससे कभी-कभी ग्रामीणों की जान पर भी बन आती थी।
    राज्य सरकार ने इस गांव में मगरमच्छों की बहुलता और ग्रामीणों की सुरक्षा को देखते हुए वर्ष 2007 में इसे मगरमच्छ संरक्षण केन्द्र के रूप में विकसित किया गया। दरअसल इस गांव में बाईस बड़े तालाबों की एक श्रंखृला है, जो मगरमच्छों के रहवास और प्रजनन की दृष्टि से उपयुक्त है। जब ये मगरमच्छ तालाब से निकलकर खेतों और छोटे-छोटे जलाशयों में पहुंच जाते थे, तो मानव, मवेशियों और खुद मगरमच्छ के लिए भी खतरा उत्पन्न हो जाता था। इसलिए राज्य सरकार द्वारा मगरमच्छों को उनके प्राकृतिक वातावरण में पूरी सुरक्षा प्रदान करने के लिए गांव के मूड़ा तालाब को मगरमच्छ संरक्षण परियोजना के लिए चुना गया। लगभग 29 एकड़ क्षेत्र में फैले इस तालाब को और गहरा करके उसमें आसपास के तालाबों और जलस्रोतों में रह रहे मगरमच्छों को रखा गया है। इस तालाब को चारों ओर से इस तरह फेंसिंग की गई है कि मगरमच्छ तालाब के मेड़ को पार कर बाहर ना जा सके। वर्तमान में इस तालाब में मगरमच्छों की संख्या सौ से ज्यादा है और इनकी लगातार संख्या बढ़ती जा रही है।
    राज्य सरकार द्वारा मगरमच्छों के हमले से बचने और उन्हें पकड़ने के लिए गांव के युवाओं को उड़ीसा और चेन्नई क्रोकोडाईल पार्क से प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। प्रशिक्षण के बाद इन्हीं युवाओं द्वारा गांव के दूसरे तालाबों से 96 मगरमच्छों को पकड़कर मूड़ा तालाब में स्थानांतरित किया गया है। राज्य सरकार द्वारा कोटमीसोनार को पर्यटन केन्द्र के रूप में भी विकसित किया जा रहा है। पर्यटक पूरी सुरक्षा के साथ मगरमच्छों को देख सकें, इसके लिए तालाब चारो ओर मेंड पर पक्का रास्ता बनाया गया है। मेड़ पर मजबूत फेंसिंग होने के कारण पर्यटक बिना किसी भय के मगरमच्छों को सहज रूप से देख सकते हैं। यहां बाईस तालाबों की विहंगम श्रृखंला को देखने के लिए तीन ऊंचे टॉवर बनाए गए हैं। पर्यटकों के विश्राम के लिए पैगोड़ा और बच्चों के मनोरंजन के लिए चिल्ड्रन पार्क भी यहां विकसित किया गया है।

क्रमांक-2489/कुशराम
« May 2012 »
May
MoTuWeThFrSaSu
123456
78910111213
14151617181920
21222324252627
28293031