मुख्यमंत्री द्वारा रायपुर जिले के भू-अभिलेखों के डिजिटल स्वरूप का लोकार्पण
भूमि स्वामियों को आसानी से मिलेंगे भू-अभिलेख और छात्र-छात्राओं को स्थायी जाति और निवास प्रमाण पत्र
सूचना प्रौद्योगिकी से बड़ी समस्या का आसान हल : डॉ. रमन सिंह
स्थायी जाति एवं निवास प्रमाण पत्र जारी करने की एकीकृत प्रणाली का भी शुभारंभ
स्थायी जाति एवं निवास प्रमाण पत्र एक माह में
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने आज यहां अपने निवास पर रायपुर जिले के सभी गांवों के भू-अभिलेखों के डिजिटल स्वरूप और छात्र-छात्राओं को एक माह की अवधि में स्थायी जाति एवं निवास प्रमाण पत्र जारी करने की एकीकृत प्रणाली का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने इन दोनों परियोजनाओं की प्रशंसा करते हुए कहा कि इन्हें पूरे प्रदेश में मॉडल के रूप में लागू किया जाना चाहिए। इसके लिए एक समयबध्द कार्यक्रम भी निर्धारित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इन दोनों परियोजनाओं से आम जनता और छात्र-
छात्राओं को काफी सहूलियत होगी। इन परियोजनाओं के लिए पैसों की कमी नहीं होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि भू-अभिलेखों को प्राप्त करना और स्थायी जाति एवं निवास प्रमाण पत्र बनवाना लोगों के लिए एक बड़ी समस्या रही है। सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग करके इस परेशानी का आसान समाधान निकाला गया है, जो सराहनीय है। आदिम जाति अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग विकास मंत्री श्री केदार कश्यप, प्रमुख सचिव राजस्व श्री एम.के. राउत, प्रमुख सचिव वित्त श्री अजय सिंह, कमिश्नर रायपुर श्री के.डी.पी. राव, आदिम जाति कल्याण विभाग के सचिव श्री मनोज कुमार पिंगुआ और मुख्यमंत्री के विशेष सचिव श्री सुबोध सिंह सहित राजस्व एवं संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग से मिसल बंदोबस्त, चकबंदी रिकार्ड, अधिकार अभिलेख, निस्तार पत्रक और नक्शों को आम जनता तक आसानी से पहुंचाने के प्रयास में रायपुर जिले में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की गयी है। रायपुर कलेक्टोरेट कार्यालय में स्थित रिकार्ड रूम में जिले के दो हजार 119 गांवों के भूमि संबंधी इन अभिलेखों को स्केन कर डिजिटाइस कर लिया गया है, डिजिटल स्वरूप में उपलब्ध इन भू-अभिलेखों को टे्रजरी सहित एन.आई.सी. के जिला और राज्य स्तर के कार्यालयों में सुरक्षित रखा गया है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने आज यहां अपने निवास पर कलेक्टोरेट रायपुर के डिजिटल स्वरूप में उपलब्ध भू-अभिलेखों का कम्प्यूटर पर माउस दबाकर लोकार्पण किया।
रायपुर जिले में कक्षा आठवीं से कक्षा बारहवीं तक के छात्र-छात्राओं को सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग से अपेक्षाकृत कम समय में और सुविधाजनक रूप से स्थायी जाति और निवास प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने की परियोजना को भी सफलता पूर्वक लागू किया गया है। तहसील कार्यालय, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), कलेक्टोरेट के डिजिटल रिकार्ड रूम और छानबीन समिति कार्यालय की एकीकृत व्यवस्था के तहत छात्र-छात्राओं को एक माह की अवधि में ये प्रमाण पत्र उपलब्ध कराए जाएंगे। इस परियोजना के तहत स्कूलों में छात्र-छात्राओं से एक फार्म में जानकारियां दर्ज करायी जाएंगी और राजस्व विभाग के
अमले के द्वारा संबंधित कार्यालयों के सहयोग और समन्वय से छात्र-छात्राओं के स्थायी जाति एवं निवास प्रमाण पत्र स्कूलों को उपलब्ध कराए जाएंगे। छात्र-छात्राओं को प्रमाण पत्रों के लिए कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। मुख्यमंत्री ने रायपुर जिले के डूमरतराई स्थिति शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के पांच छात्र-छात्राओं को स्थायी जाति एवं निवास प्रमाण पत्र वितरित कर इस परियोजना का भी शुभारंभ किया।
कलेक्टर रायपुर डॉ. रोहित यादव ने बताया कि भू-अभिलेखों के डिजिटल स्वरूप में ऑन लाइन उपलब्ध होने से रिकार्ड सुरक्षित एवं छेड़खानी रहित हो गए हैं। रिकार्ड का अनुरेखण आसान हो गया है। इस व्यवस्था से लोगों को कार्यालयों के चक्कर लगाने से मुक्ति मिलेगी। लोगों के समय और पैसों की बचत हो सकेगी। डॉ. यादव ने बताया कि जल्द ही भू-अभिलेख वेबसाइट पर ऑन लाइन उपलब्ध कराए जाएंगे। जिससे लोग अपने लेपटाप पर या किसी साइबर कैफे से अपने भू-अभिलेखों की जानकारी देख सकेंगे और प्रिन्ट आउट भी प्राप्त कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि प्रिन्ट आउट के बाद इन्हें संबंधित तहसीलदार से सत्यापित कराना होगा। तहसीलदार अपने कम्प्यूटर पर संबंधित अभिलेख देखकर सत्यापन करेंगे। डॉ. रोहित यादव ने बताया कि एकीकृत प्रणाली के तहत जिले में दस हजार छात्र-छात्राओं के स्थायी जाति और निवास प्रमाण पत्र तैयार कर लिए गए हैं, जिनमें से साढ़े पांच हजार प्रमाण पत्र संबंधित स्कूलों में पहुंचा दिए गए हैं, जिनका कल से छात्र-छात्राओं को वितरण प्रारंभ कर दिया जाएगा।

