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राज्य सरकार का ऐतिहासिक फैसला : बुनकरों को मजदूरी के साथ-साथ लाभांश की 50 प्रतिशत राशि भी मिलेगी

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When Nov 19, 2011
from 09:55 PM to 09:55 PM
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मुख्यमंत्री द्वारा 'राष्ट्रीय हैण्डलूम एक्सपो-2011' का शुभारंभ
दो बुनकरों को स्वर्गीय श्री बिसाहूदास महंत सर्वश्रेष्ठ बुनकर पुरस्कार

रायपुर 19 नवम्बर 2011
3753-191111
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा है कि तेन्दूपत्त संग्राहकों की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में हाथ करघा सहकारी समितियों से संबंधित बुनकरों को भी वस्त्रों की बुनाई की मजदूरी के साथ अब वस्त्रों के विक्रय से मिलने वाली लाभ की 50 प्रतिशत राशि भी दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने आज शाम शंकर नगर बी.टी.आई. मैदान में 'राष्ट्रीय हैण्डलूम एक्सपो-2011' के उदघाटन समारोह को सम्बोधित करते हुए की। उन्होंने कहा कि हाथ करघा वस्त्रों के विक्रय पर मिलने वाले लाभांश की 50 प्रतिशत राशि सीधे संबंधित बुनकर को दी जाएगी। यह व्यवस्था चालू वित्तीय वर्ष में विगत एक अप्रैल से लागू होगी। बुनकरों के हित में यह व्यवस्था करने वाला छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बन गया है। हाथ करघा बुनकरों द्वारा निर्मित कलात्मक वस्त्रों की यह विक्रय प्रदर्शनी आगामी 11 दिसम्बर तक चलेगी।
    मुख्यमंत्री ने प्रदर्शनी का शुभारंभ करते हुए कहा कि शासकीय वस्त्र प्रदाय योजना के अन्तर्गत 300 मीटर से अधिक वस्त्र की बुनाई करने वाले बुनकरों को बुनाई मजदूरों के अतिरिक्त बोनस राशि भी दी जाएगी। बुनकरों द्वारा तैयार कपड़ों में उन्हें बनाने वाले बुनकरों के नाम भी छापे जाएंगे। उन्होंने इंजीनियरिंग और मेडिकल की पढ़ाई में प्रवेश लेने वाले बुनकरों के बच्चों को प्रवेश के समय 25 हजार रूपए की राशि प्रदान करने तथा शासकीय वस्त्र प्रदाय योजना के तहत वस्त्र की गुणवत्ता के आधार पर बुनकरों की मजदूरी की दर में 20 से 55 प्रतिशत तक वृध्दि की घोषणा की। यह वृध्दि इस वर्ष एक अक्टूबर से लागू होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वृध्दि के माध्यम से यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है कि दस मीटर प्रतिदिन की बुनाई करने वाले बुनकरों को न्यूनतम दो सौ रूपए मजदूरी प्राप्त हो सके। प्रदर्शनी का आयोजन छत्तीसगढ़ राज्य हाथ करघा विकास एवं विपणन सहकारी संघ द्वारा विकास आयुक्त हाथ करघा भारत सरकार और राज्य सरकार के ग्रामोद्योग विभाग के सहयोग से किया गया।
    ग्रामोद्योग मंत्री श्री पुन्नूलाल मोहले ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। विशेष अतिथि के रूप में रायपुर के लोकसभा सांसद श्री रमेश बैस, ग्रामोद्योग विभाग के संसदीय सचिव डॉ. सियाराम साहू, महापौर नगर निगम रायपुर डॉ. (श्रीमती) किरणमयी नायक, अध्यक्ष छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड श्री गिरधर गुप्ता, अध्यक्ष छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड मेजर अनिल सिंह, सभापति नगर निगम रायपुर श्री 3753A-191111संजय श्रीवास्तव और नगर निगम पार्षद श्रीमती सीमा संतोष साहू भी उपस्थित थीं। अतिथियों ने इस अवसर पर एक्सपो के विभिन्न स्टालों का अवलोकन भी किया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर लगभग छह लाख रूपए की राशि के पुरस्कार भी वितरित किए। उन्होंने बुनकरों के स्कूलों में अध्ययनरत एक सौ प्रतिभावान बच्चों को दो लाख रूपए से अधिक रािश के पुरस्कार, स्वर्गीय बिसाहूदास महंत सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार के तहत जांजगीर-चांपा के श्री टिकेश्वर देवांगन और रायगढ़ जिले के कोतरी ग्राम निवासी श्री हरिकिशन देवांगन को एक-एक लाख रूपए की नगद राशि तथा शॉल एवं श्रीफल और ताम्र पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। बुनाई कार्य में निपुण साठ वर्ष से अधिक उम्र के छह बुनकरों सर्वश्री बैसाखू राम देवांगन कुंवरगढ़ जिला रायपुर, ललित कुमार देवांगन रामटोला जिला राजनांदगांव, नेतराम देवांगन रानीगांव जिला बिलासपुर, लखमू जिला बस्तर, दीनालाल भरदाटटेंगा जिला दुर्ग और बाबूलाल देवांगन दुरपा जिला जांजगीर-चांपा को पांच हजार पांच सौ रूपए शॉल एवं श्रीफल प्रदान कर सम्मानित किया। बुनकर कर्मशाला हेतु बस्तर के छह बुनकरों को 15-15 हजार रूपए की अनुदान राशि की पहली किश्त प्रदान की। इन बुनकरों को 25-25 हजार रूपए प्रति बुनकर के मान से एक लाख 50 हजार रूपए की राशि स्वीकृत की गयी है। इनमें बस्तर जिले के ग्राम कलचा की श्रीमती महदेई, श्रीमती पदमनी, श्रीमती सोनादई, ग्राम सिरमुड़ के सर्वश्री दयाराम, पदम और जोगो शामिल थे। उन्होंने इस अवसर पर दुर्ग जिले की बुनकर सहकारी समितियों की ओर से अधिक बुनाई करने वाले दस बुनकरों को पांच-पांच हजार रूपए की पुरस्कार राशि भी प्रदान की।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2004-05 में छत्तीसगढ़ की बुनकर सहकारी समितियों द्वारा लगभग चार से पांच करोड़ रूपए का व्यवसाय किया जाता था। राज्य शासन ने निर्णय लेकर प्रदेश की लगभग 117 बुनकर सहकारी समितियों के कर्ज माफ कर उन्हें पुनर्जीवित किया। राज्य शासन के इस फैसले और बुनकरों की मेहनत और लगन से हाथ करघा के व्यवसाय में छत्तीसगढ़ की बुनकर सहकारी समितियों ने एक लम्बी छलांग लगायी है। वर्ष 2011 में इनका व्यवसाय बढ़कर लगभग 130 करोड़ रूपए का हो गया है। यह एक अदभुद उपलब्धि है। उन्होंने इस अवसर पर पुरस्कृत सभी बुनकरों को बधाई और शुभकामनाएं दी। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए ग्रामोद्योग मंत्री श्री पुन्नूलाल मोहले ने कहा कि छत्तीसगढ़ के बुनकरों ने अपनी मेहनत और लगन से हाथ करघा व्यवसाय में अच्छी प्रगति की है। उन्होंने कहा कि राज्य विभाजन के समय प्रदेश के 117 बुनकर समितियों पर लगभग साढ़े चार करोड़ रूपए का ऋण था, जिसे राज्य सरकार ने माफ कर दिया। उन्होंने स्वास्थ्य बीमा योजना और महात्मा गांधी बुनकर योजना सहित बुनकरों के लिए संचालित योजनाओं की भी विस्तृत जानकारी प्रदान करते हुए इस राष्ट्रीय मेले में आए बुनकरों का स्वागत किया। सांसद श्री रमेश बैस ने हाथ करघा वस्त्र तैयार करने की कला छत्तीसगढ़ की पहचान है। चांपा के कोसा वस्त्रों की देश में अच्छी मांग है और उन्हें विदेशों में निर्यात किया जा रहा है। श्री बैस ने प्रदेश की बुनकर सहकारी समितियों को पुनर्जीवित करने के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में किए गए कार्यो की प्रशंसा करते हुए कहा कि बुनकर समितियों के लिए राज्य सरकार की ऋण माफी योजना ने इन समितियों को जीने की राह दिखायी। संसदीय सचिव डॉ. सियाराम साहू ने भी समारोह को संबोधित किया। समारोह में मुख्यमंत्री ने शासकीय वस्त्र प्रदाय योजना के अन्तर्गत नवीन दर सूची का विमोचन भी किया। ग्रामोद्योग विभाग के प्रमुख सचिव श्री पी. रमेश कुमार ने अतिथियों का आत्मीय स्वागत किया। स्वागत भाषण अपेक्स हैण्डलूम के प्रबंध संचालक श्री एन.एस. मण्डावी ने दिया। इस अवसर पर अनेक जनप्रतिनिधि, बुनकर समितियों के पदाधिकारी और सदस्य तथा बड़ी संख्या में प्रबुध्द नागरिक उपस्थित थे। प्रदर्शनी में छत्तीसगढ़ सहित गुजरात, राजस्थान, बिहार, कश्मीर, हरियाणा, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और आन्ध्रप्रदेश आदि राज्यों के बुनकरों ने भी स्टाल लगाए हैं।
क्रमांक-3753/सोलंकी
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