संकटग्रस्त लोगों के लिए वरदान है संजीवनी एक्सप्रेस : डॉ. रमन सिंह
अब कोरबा जिले की जनता को भी चौबीसों घण्टे मिलेगी संकटकालीन चिकित्सा सेवा
मुख्यमंत्री ने किया बीस करोड़ से अधिक लागत के विभिन्न सेवा प्रकल्पों का भूमि पूजन
जिला अस्पताल में आठ करोड़ की लागत से बनेगा प्रदेश का पहला अत्याधुनिक ट्रामा यूनिट
रायपुर, 30 नवम्बर 2011
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा है कि आकस्मिक हादसों में घायल होने और गंभीर बीमारियों से पीड़ित होने पर ऐसे संकटग्रस्त लोगों के लिए छत्तीसगढ़ में संजीवनी एक्सप्रेस एम्बुलेंस सेवा सचमुच वरदान साबित हो रही है। मुख्यमंत्री ने आज जिला मुख्यालय कोरबा के प्रियदर्शिनी शासकीय जिला अस्पताल परिसर में कोरबा जिले के लिए इस महत्वपूर्ण नि:शुल्क एम्बुलेंस सेवा का शुभारंभ करते हुए इस आशय के विचार व्यक्त किए। उन्होंने हरी झण्डी दिखाकर संजीवनी एक्सप्रेस वाहनों का लोकार्पण करते हुए इस योजना का शुभारंभ किया। नि:शुल्क टेलीफोन नम्बर 108 पर आधारित इस सेवा के शुरू होने पर अब कोरबा जिले की जनता को भी गंभीर बीमारियों और दुर्घटनाओं की स्थिति में चौबीसों घण्टे त्वरित चिकित्सा सेवा मिलेगी। डॉ. रमन सिंह ने इस अवसर पर लगभग 20 करोड़ रूपए से अधिक लागत के विभिन्न प्रकल्पों का भूमि पूजन और शिलान्यास किया, जिनमें प्रियदर्शिनी जिला अस्पताल के लिए करीब आठ करोड़ रूपए की लागत से बनने वाले 51 बिस्तरों वाले छत्तीसगढ़ का प्रथम अत्याधुनिक ट्रामा यूनिट भी शामिल है। उन्होंने इसके अलावा वहां राष्ट्रीय ताप विद्युत निगम के सहयोग से बनने वाले बीस लाख रूपए लागत के प्रसूति कक्ष और लेबर रूम तथा राज्य शासन की ओर से ग्राम छुरी में स्वीकृत 12 करोड़ रूपए की लागत वाले एकलव्य विद्यालय भवन का भी शिलान्यास किया।
कार्यक्रम में गृह, जेल और सहकारिता मंत्री श्री ननकी राम कंवर, कृषि और श्रम मंत्री श्री चन्द्रशेखर साहू, स्कूल शिक्षा और लोकनिर्माण मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल, पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री श्री राम विचार नेताम और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री अमर अग्रवाल, विधायक श्री जयसिंह अग्रवाल, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती शकुन्तला कंवर तथा महापौर नगर निगम कोरबा श्री जोगेश लाम्बा, सहित अनेक जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने समारोह को सम्बोधित करते हुए कहा कि राज्य में एक वर्ष से भी कम समय में 18 में से दस जिलों में संजीवनी एक्सप्रेस के रूप में यह आपातकालीन एम्बूलेंस सेवा शुरू हो चुकी है। इस सेवा के लिए कोरबा ग्यारहवां जिला है। उन्होंने इस सेवा का संचालन करने के लिए संबंधितों को एम्बुलेंस वाहनों की चाबी सौंपकर शुभकामनाएं दी। डॉ. रमन सिंह ने कहा कि अब संजीवनी एक्सप्रेस' कोरबा जिले की सड़कों पर भी आम जनता को किसी भी संकटकालीन परिस्थिति में चिकित्सा सहायता पहुंचाने के लिए दौड़ने लगेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार छत्तीसगढ़ के गांवों और शहरों में समाज के सर्वाधिक जरूरतमंद और सबसे अंतिम पंक्ति के लोगों तक स्वास्थ्य और चिकित्सा सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने का हर संभव प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि गांव, गरीब और किसानों के जीवन में परिवर्तन तभी आएगा, जब उन्हें अच्छी सड़क, पर्याप्त बिजली, स्वच्छ पेयजल, सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी, फसलों के लिए उचित मूल्य, हर व्यक्ति को कम से कम दो वक्त का भरपेट भोजन और बच्चों के लिए शिक्षा तथा बीमार होने पर प्रत्येक व्यक्ति को इलाज की बेहतर सुविधा मिले। मुख्यमंत्री ने समारोह में स्वास्थ्य विभाग की मितानिनों के जिला स्तरीय सम्मेलन को भी संबोधित करते हुए दो हजार से अधिक मितानिनों के लिए दवा पेटी वितरण कार्य का भी शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि गांवों में जनता को विभिन्न सामान्य और संक्रामक बीमारियों के प्राथमिक उपचार की सुविधा देने में मितानिनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। डॉ. रमन सिंह ने कोरबा जिले के लिए आज से प्रारंभ संजीवनी एक्सप्रेस योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि निकट भविष्य में प्रदेश के अन्य जिलों में भी इसका विस्तार किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री ने इस वर्ष विगत 25 जनवरी को रायपुर और बस्तर (जगदलपुर) जिले के लिए इस योजना का शुभारंभ किया था। डॉ. रमन सिंह दो दिन पहले 27 नवम्बर को जिला मुख्यालय नारायणपुर में भी 'संजीवनी एक्सप्रेस' का लोकार्पण कर चुके हैं। इस अवधि में यह सेवा धमतरी, जशपुर, रायगढ, बिलासपुर, कोरिया, राजनांदगांव और कबीरधाम (कवर्धा) जिलों में भी शुरू हो चुकी है। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ सरकार देश की प्रसिध्द समाजसेवी संस्था 'जी..व्ही.के. मैनेजमेन्ट एण्ड रिसर्च इंस्टीटयूट' के सहयोग से इस सेवा का संचालन कर रही है। राज्य सरकार के सहयोग से छत्तीसगढ़ में संजीवनी एक्सप्रेस सेवा का संचालन कर रहे 'जी..व्ही.के. मैनेजमेन्ट एण्ड रिसर्च इंस्टीटयूट' के अधिकारियों ने बताया कि इस सेवा के तहत पूर्णत: नि:शुल्क टेलीफोन नम्बर 108 पर कोई भी व्यक्ति किसी भी संकटकालीन परिस्थिति में चिकित्सा सहायता के लिए बिना कोई अतिरिक्त कोड डायल किए सीधे मोबाईल अथवा लैण्डलाईन पर फोन करके एम्बुलेंस सहायता प्राप्त कर सकता है। यह सेवा सप्ताह के सभी सातों दिन और चौबीसों घंटे उपलब्ध है। शासकीय जिला अस्पताल सहित कोरबा जिले के आठ प्रमुख स्थानों पर संजीवनी एक्सप्रेस वाहन तैनात रहेंगे, जिनमें सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पाली और कटघोरा तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र हरदी बाजार, चोटिया, लेमरू, जटगा और पसान शामिल है। इस योजना के तहत टेलीफोन कॉल रिसीव करने के बाद शहरी क्षेत्रों में 15 मिनट और ग्रामीण क्षेत्रों में 25 मिनट के भीतर पीड़ित व्यक्ति के पास एम्बुलेंस पहुंच जाता है। यह एम्बुलेंस सभी आधुनिक चिकित्सा उपकरणों और दवाईयों से सुसज्जित रहता है। एम्बुलेंस में प्राथमिक इलाज प्रदान करने और घायल अथवा मरीज को अस्पताल पहुंचाने की सम्पूर्ण सेवा नि:शुल्क दी जा रही है। सड़क दुर्घटना, प्रसव, हृदय से संबंधित आकस्मिक बीमारी जैसे हृदयाघात, इसके अलावा सर्पदंश, आत्महत्या की कौशिश, मलेरिया और गंभीर मधुमेह जैसी परिस्थितियों में प्रभावित व्यक्ति को यह सेवा मिल सकती है। इसके अलावा हिंसा, हत्या, चोरी, डकैती, रैगिंग, अग्नि दुर्घटना और घरेलू हिंसा जैसी आपात स्थिति में भी लोग यह सेवा प्राप्त कर सकते हैं।
छत्तीसगढ़ में इस योजना के तहत राज्य सरकार ने 'जी..व्ही.के. मैनेजमेन्ट एण्ड रिसर्च इंस्टीटयूट' के साथ अनुबंध किया है। पीड़ित व्यक्तियों से टेलीफोन कॉल्स रिसीव करने के लिए राजधानी रायपुर में इमरजेंसी रिस्पॉन्स सेन्टर और अत्याधुनिक उपकरणों से सुसज्जित कॉल सेन्टर संचालित किया जा रहा है। योजना के तहत पूरे प्रदेश में कुल 172 एम्बुलेंस वाहनों की संचालन करने का लक्ष्य है। अब तक रायपुर जिले में 25, बस्तर (जगदलपुर) जिले में 11, धमतरी जिले में 05, जशपुर जिले में 07, रायगढ़ जिले में 09, बिलासपुर जिले में 16, कोरिया जिले में 05, राजनांदगांव जिले में 10 और कबीरधाम (कवर्धा) जिले में 04 संजीवनी एक्सप्रेस वाहनों के जरिए लोगों को लगातार आपात कालीन चिकित्सा सेवा मिल रही है। इस सेवा के जरिए एक वर्ष से भी कम समय में लगभग 47 हजार जरूरतमंद मरीजों को तत्परता से अस्पतालों में पहुंचाया गया है, जिनमें प्रसव से संबंधित 18 हजार 772, सड़क दुर्घटनाओं से संबंधित छह हजार 636, आत्महत्या की कोशिश और जहरखुरानी से संबंधित एक हजार 277, सांस लेने में तकलीफ से संबंधित एक हजार 153 तथा हृदयाघात से संबंधित 918 प्रकरण भी शामिल हैं। इन प्रकरणों में पीड़ितों की मदद के लिए राजधानी रायपुर स्थित इस योजना के कॉल सेन्टर में अब तक 13 लाख 75 हजार से ज्यादा टेलीफोन कॉल्स रिसीव किए गए। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री श्री अमर अग्रवाल ने संजीवनी एक्सप्रेस योजना सहित प्रदेश में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं के विकास और विस्तार के लिए चल रहे कार्यो की जानकारी दी। कलेक्टर श्री आर.पी.एस. त्यागी ने संजीवनी एक्सप्रेस योजना के लिए जिले में किए गए इंतजामों के बारे में बताया।
कार्यक्रम में गृह, जेल और सहकारिता मंत्री श्री ननकी राम कंवर, कृषि और श्रम मंत्री श्री चन्द्रशेखर साहू, स्कूल शिक्षा और लोकनिर्माण मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल, पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री श्री राम विचार नेताम और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री अमर अग्रवाल, विधायक श्री जयसिंह अग्रवाल, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती शकुन्तला कंवर तथा महापौर नगर निगम कोरबा श्री जोगेश लाम्बा, सहित अनेक जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने समारोह को सम्बोधित करते हुए कहा कि राज्य में एक वर्ष से भी कम समय में 18 में से दस जिलों में संजीवनी एक्सप्रेस के रूप में यह आपातकालीन एम्बूलेंस सेवा शुरू हो चुकी है। इस सेवा के लिए कोरबा ग्यारहवां जिला है। उन्होंने इस सेवा का संचालन करने के लिए संबंधितों को एम्बुलेंस वाहनों की चाबी सौंपकर शुभकामनाएं दी। डॉ. रमन सिंह ने कहा कि अब संजीवनी एक्सप्रेस' कोरबा जिले की सड़कों पर भी आम जनता को किसी भी संकटकालीन परिस्थिति में चिकित्सा सहायता पहुंचाने के लिए दौड़ने लगेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार छत्तीसगढ़ के गांवों और शहरों में समाज के सर्वाधिक जरूरतमंद और सबसे अंतिम पंक्ति के लोगों तक स्वास्थ्य और चिकित्सा सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने का हर संभव प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि गांव, गरीब और किसानों के जीवन में परिवर्तन तभी आएगा, जब उन्हें अच्छी सड़क, पर्याप्त बिजली, स्वच्छ पेयजल, सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी, फसलों के लिए उचित मूल्य, हर व्यक्ति को कम से कम दो वक्त का भरपेट भोजन और बच्चों के लिए शिक्षा तथा बीमार होने पर प्रत्येक व्यक्ति को इलाज की बेहतर सुविधा मिले। मुख्यमंत्री ने समारोह में स्वास्थ्य विभाग की मितानिनों के जिला स्तरीय सम्मेलन को भी संबोधित करते हुए दो हजार से अधिक मितानिनों के लिए दवा पेटी वितरण कार्य का भी शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि गांवों में जनता को विभिन्न सामान्य और संक्रामक बीमारियों के प्राथमिक उपचार की सुविधा देने में मितानिनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। डॉ. रमन सिंह ने कोरबा जिले के लिए आज से प्रारंभ संजीवनी एक्सप्रेस योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि निकट भविष्य में प्रदेश के अन्य जिलों में भी इसका विस्तार किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री ने इस वर्ष विगत 25 जनवरी को रायपुर और बस्तर (जगदलपुर) जिले के लिए इस योजना का शुभारंभ किया था। डॉ. रमन सिंह दो दिन पहले 27 नवम्बर को जिला मुख्यालय नारायणपुर में भी 'संजीवनी एक्सप्रेस' का लोकार्पण कर चुके हैं। इस अवधि में यह सेवा धमतरी, जशपुर, रायगढ, बिलासपुर, कोरिया, राजनांदगांव और कबीरधाम (कवर्धा) जिलों में भी शुरू हो चुकी है। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ सरकार देश की प्रसिध्द समाजसेवी संस्था 'जी..व्ही.के. मैनेजमेन्ट एण्ड रिसर्च इंस्टीटयूट' के सहयोग से इस सेवा का संचालन कर रही है। राज्य सरकार के सहयोग से छत्तीसगढ़ में संजीवनी एक्सप्रेस सेवा का संचालन कर रहे 'जी..व्ही.के. मैनेजमेन्ट एण्ड रिसर्च इंस्टीटयूट' के अधिकारियों ने बताया कि इस सेवा के तहत पूर्णत: नि:शुल्क टेलीफोन नम्बर 108 पर कोई भी व्यक्ति किसी भी संकटकालीन परिस्थिति में चिकित्सा सहायता के लिए बिना कोई अतिरिक्त कोड डायल किए सीधे मोबाईल अथवा लैण्डलाईन पर फोन करके एम्बुलेंस सहायता प्राप्त कर सकता है। यह सेवा सप्ताह के सभी सातों दिन और चौबीसों घंटे उपलब्ध है। शासकीय जिला अस्पताल सहित कोरबा जिले के आठ प्रमुख स्थानों पर संजीवनी एक्सप्रेस वाहन तैनात रहेंगे, जिनमें सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पाली और कटघोरा तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र हरदी बाजार, चोटिया, लेमरू, जटगा और पसान शामिल है। इस योजना के तहत टेलीफोन कॉल रिसीव करने के बाद शहरी क्षेत्रों में 15 मिनट और ग्रामीण क्षेत्रों में 25 मिनट के भीतर पीड़ित व्यक्ति के पास एम्बुलेंस पहुंच जाता है। यह एम्बुलेंस सभी आधुनिक चिकित्सा उपकरणों और दवाईयों से सुसज्जित रहता है। एम्बुलेंस में प्राथमिक इलाज प्रदान करने और घायल अथवा मरीज को अस्पताल पहुंचाने की सम्पूर्ण सेवा नि:शुल्क दी जा रही है। सड़क दुर्घटना, प्रसव, हृदय से संबंधित आकस्मिक बीमारी जैसे हृदयाघात, इसके अलावा सर्पदंश, आत्महत्या की कौशिश, मलेरिया और गंभीर मधुमेह जैसी परिस्थितियों में प्रभावित व्यक्ति को यह सेवा मिल सकती है। इसके अलावा हिंसा, हत्या, चोरी, डकैती, रैगिंग, अग्नि दुर्घटना और घरेलू हिंसा जैसी आपात स्थिति में भी लोग यह सेवा प्राप्त कर सकते हैं।
छत्तीसगढ़ में इस योजना के तहत राज्य सरकार ने 'जी..व्ही.के. मैनेजमेन्ट एण्ड रिसर्च इंस्टीटयूट' के साथ अनुबंध किया है। पीड़ित व्यक्तियों से टेलीफोन कॉल्स रिसीव करने के लिए राजधानी रायपुर में इमरजेंसी रिस्पॉन्स सेन्टर और अत्याधुनिक उपकरणों से सुसज्जित कॉल सेन्टर संचालित किया जा रहा है। योजना के तहत पूरे प्रदेश में कुल 172 एम्बुलेंस वाहनों की संचालन करने का लक्ष्य है। अब तक रायपुर जिले में 25, बस्तर (जगदलपुर) जिले में 11, धमतरी जिले में 05, जशपुर जिले में 07, रायगढ़ जिले में 09, बिलासपुर जिले में 16, कोरिया जिले में 05, राजनांदगांव जिले में 10 और कबीरधाम (कवर्धा) जिले में 04 संजीवनी एक्सप्रेस वाहनों के जरिए लोगों को लगातार आपात कालीन चिकित्सा सेवा मिल रही है। इस सेवा के जरिए एक वर्ष से भी कम समय में लगभग 47 हजार जरूरतमंद मरीजों को तत्परता से अस्पतालों में पहुंचाया गया है, जिनमें प्रसव से संबंधित 18 हजार 772, सड़क दुर्घटनाओं से संबंधित छह हजार 636, आत्महत्या की कोशिश और जहरखुरानी से संबंधित एक हजार 277, सांस लेने में तकलीफ से संबंधित एक हजार 153 तथा हृदयाघात से संबंधित 918 प्रकरण भी शामिल हैं। इन प्रकरणों में पीड़ितों की मदद के लिए राजधानी रायपुर स्थित इस योजना के कॉल सेन्टर में अब तक 13 लाख 75 हजार से ज्यादा टेलीफोन कॉल्स रिसीव किए गए। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री श्री अमर अग्रवाल ने संजीवनी एक्सप्रेस योजना सहित प्रदेश में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं के विकास और विस्तार के लिए चल रहे कार्यो की जानकारी दी। कलेक्टर श्री आर.पी.एस. त्यागी ने संजीवनी एक्सप्रेस योजना के लिए जिले में किए गए इंतजामों के बारे में बताया।
क्रमांक- 3903/स्वराज्य

