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राष्ट्रीय बागवानी मिशन के लिए 115 करोड़ रूपए का बजट: छत्तीसगढ़ के 11 जिले शामिल

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When Nov 29, 2010
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दुर्ग-सरगुजा में थोक बाजारों सहित सभी चयनित जिलों में होगी 42 ग्रामीण बाजारों की स्थापना

    रायपुर, 29 नवंबर 2010

राज्य शासन द्वारा केन्द्र के सहयोग से संचालित राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत छत्तीसगढ़ में उद्यानिकी फसलों को बढ़वा देने के लिए चालू वित्तीय वर्ष 2010-11 में 115 करोड़ रूपए का बजट प्रावधान किया गया है। उल्लेखनीय है कि यह वर्ष 2005-06 से राज्य के 11 जिलों - रायगढ़, सरगुजा, बिलासपुर, कोरबा, दुर्ग, रायपुर, राजनांदगांव, कोरिया, जशपुर, बस्तर और कबीरधाम (कवर्धा) में संचालित किया जा रहा हैं। राष्ट्रीय बागवानी मिशन द्वारा प्रदेश के किसानों को उद्यानिकी विकास से संबंधित सभी आवश्यक आदान सामग्रियों की पूर्ति की जा रही है। इस वर्ष स्वीकृत कार्य-योजना में प्रदेश में उद्यानिकी फसलों के उत्पादन के उपरांत उनका उचित प्रबंधन और विपणन के लिए आधारभूत संरचनाओं के विकास हेतु विशेष प्रावधान किये गये हैं।
    उद्यानिकी विभाग के अधिकरियों ने आज यहां बताया कि राष्ट्रीय बागवानी मिशन द्वारा प्रदेश में उद्यानिकी उत्पादों के विपणन हेतु विशेष बाजारों की स्थापना भी की जा रही है। इस वर्ष दुर्ग और सरगुजा जिले में थोक बाजारों सहित चयनित सभी 11 जिलों में 42 ग्रामीण बाजारों की स्थापना की जायेगी। इसके लिए तीन करोड़ 92 लाख रूपये का प्रावधान भी किया गया है। रायपुर एवं बिलासपुर जिले में बागवानी फसलों के विपणन हेतु मंडी बोर्ड के माध्यम से होलसेल मार्केट की स्थापना भी की जाएगी। इसके लिए 12 करोड़ 45 लाख रूपये के अनुदान का प्रस्ताव भारत सरकार के कृषि मंत्रालय को भेजा गया है। राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत प्रदेश में वर्ष 2005-06 में एक करोड़ 26 लाख रूपये से शासकीय क्षेत्र की सात रोपणियों का विकास किया गया है । इसी तरह वर्ष 2009-10 में चार करोड़ 11 लाख रूपये से शासकीय क्षेत्र की 21 रोपणी एवं निजी क्षेत्र की चार रोपणियों को विकसित किया गया है। प्रदेश में केले की फसल हेतु उपयुक्त वातावरण होने के कारण तेजी से इसका क्षेत्र बढ़ रहा है। किसानों को केले की फसल से अच्छी आमदनी की संभावना को देखते हुए राज्य सरकार द्वारा टिशु कल्चर तकनीक से पौधें तैयार कर किसानों को प्रदान करने की योजना बनाई गई है। इसके लिए चालू वर्ष में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के सहयोग से एक टिशु कल्चर लैब स्थापित करने हेतु एक करोड़ रूपये का वित्तीय प्रावधान भी किया गया है। वर्तमान में प्रदेश में शासकीय स्तर पर टिशु कल्चर लैब संचालित नहीं है। इसी तरह निजी क्षेत्र में भी एक टिशु कल्चर लैब स्थापित करने हेतु 50 लाख रूपये का वित्तीय प्रावधान किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय बागवानी मिशन द्वारा सब्जी बीज उत्पादन कार्यक्रम के तहत प्रदेश के किसानों को उन्नत किस्म के प्रमाणित सब्जी बीज उपलब्ध कराया जा रहा है। वर्ष 2009-10 में 25 लाख रूपये व्यय कर 50 हेक्टेयर क्षेत्र में सब्जी बीज उत्पादन हेतु 32 किसानों को लाभान्वित किया गया है।
    छत्तीसगढ़ मेें विभिन्न जलवायु क्षेत्रों के अनुरूप उपयुक्त किस्मों के फलदार पौधे जैसे- आम, केला, नीबू, आंवला, लीची और सीताफल के उद्यान रोपण के लिए भी वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। वर्ष 2006-07 में चार हजार हेक्टेयर क्षेत्र में फलोद्यान हेतु छह करोड़ 13 लाख रूपये की वित्तीय सहायता किसानों को मुहैया करायी गयी है। इसी तरह गत वर्ष 4 हजार 725 हेक्टेयर क्षेत्र में फलोद्यान के लिए आठ हजार 134 किसानों को दस करोड़ रूपये से अधिक की वित्तीय सहायता उपलब्ध करायी गयी है। प्रदेश के गठन के साथ ही राज्य में फूलों का व्यवसाय भी तेजी से बढ़ा है। दिनों-दिन फूलों की बढ़ती मांग को देखते हुए मिशन द्वारा प्रदेश के किसानों को फूलों की फसल उत्पादन हेतु प्रोत्साहित किया जा रहा है। वर्ष 2005-06 में जहां 400 हेक्टेयर क्षेत्र में विभिन्न किस्म के फूलों के उत्पादन हेतु किसानों को 40 लाख रूपये की सहायता राशि दी गयी वहीं वर्ष 2009-10 में इसे बढ़ाकर दो हजार 297 हेक्टेयर क्षेत्र में फूलों के उत्पादन हेतु आठ करोड़ 13 लाख रूपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई है। इससे चार हजार 184 किसान लाभान्वित हुए हैं। छत्तीसगढ़ को मसाले के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने भी विशेष प्रयास किये जा रहे हैं। प्रदेश में मिर्च, धनिया, मेथी एवं हल्दी जैसे प्रमुख मसालों के क्षेत्र विस्तार हेतु बागवानी मिशन द्वारा वर्ष 2005-06 में दो हजार हेक्टेयर क्षेत्र में मसाला उत्पादन हेतु एक करोड़ 44 लाख रूपए की सहायता प्रदान की गई है, जिससे 10 हजार 500 किसान लाभान्वित हुए है। वहीं वर्ष 2009-10 में छह हजार 325 हेक्टेयर क्षेत्र में मसाला फसलों के उत्पादन हेतु सात करोड़ 11 लाख रूपये की वित्तीय सहायता कृषकों को प्रदान की गयी है।
    अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में अधिक कीमत वाली सब्जियों और पुष्पीय फसलों की संरक्षित खेती को बढ़ावा देने विभिन्न प्रकार के ग्रीन हाउस, शेडनेट हाउस, प्लास्टिक मल्चिंग और प्लास्टिक टनल जैसी गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। वर्ष 2005-06 में संरक्षित खेती हेतु 51 हेक्टेयर क्षेत्र में 21 लाख रूपये का प्रावधान रखा गया था, वहीं वर्ष 2009-10 में दो हजार 69 किसानों को 5 करोड़ 16 लाख रूपये की सहायता प्रदान की गयी है। प्रदेश में उद्यानिकी फसलों की लागत घटाने और उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से उद्यानिकी में शक्ति चलित यंत्रों और उपकरण के उपयोग को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके लिए वर्ष 2010-11 की कार्य-योजना में तीन करोड़ 42 लाख रूपये का प्रावधान किया गया है। उद्यानिकी फसलों के उत्पादन के उपरांत उन्हें उपभोक्ताओं तक सही रूप में पहुंचाने तथा उनके उचित प्रबंधन के अभाव के कारण होने वाली क्षति को रोकने हेतु पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट के तहत विभिन्न गतिविधियां भी संचालित की जा रही है। इसके तहत पैक हाउस, प्री कूलिंग इकाई, कोल्ड स्टोरेज, प्रसंस्करण इकाई रेफ्रिजेरेटेड वेन, राइप्रेनिंग चेम्बर, लो एनर्जी चेम्बर और पूसा जीरो एनर्जी चेम्बरों की स्थापना भी की जा रही है। इसके लिए 40 से 55 प्रतिशत तक अनुदान का प्रावधान भी किया गया है। वर्ष 2010-11 में इन ईकाईयों के क्रियान्वयन हेतु 19 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है।

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