सुशासन वही जो गरीबों के जीवन को बनाए आसान : डॉ. रमन सिंह
हिन्दुस्तान टाईम्स लीडरशिप समिट में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह का उद्बोधन
रायपुर 3 दिसम्बर 2011
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा कि सुशासन वही है, जो गरीबों की जिदंगी को आसान बनाये। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में हमने राजकाज की नीतियों को बनाने के लिए गांवों में जाकर ग्रामीणों से इनपुट लिये और उनकी आवश्यकताओं को लक्षित कर नीतियां बनायी। यही कारण है कि दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाली गरीब जनता हमारी हर नीति से जुड़ी है और इसे खुद की बनायी नीति मानती है। इसी के परिणामस्वरूप आज हमारी नीतियों और कार्यक्रमों ने देश के सामने सुशासन का एक
उदाहरण प्रस्तुत किया है। मुख्यमंत्री आज नई दिल्ली में हिन्दुस्तान टाईम्स समाचार पत्र द्वारा आयोजित हिन्दुस्तान टाईम्स लीडरशिप समिट में संबोधित कर रहे थे। चर्चा में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री पृथ्वीराज चव्हाण और दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती शीला दीक्षित ने भी भाग लिया।
डॉ. सिंह ने कहा कि जब 8 वर्ष पहले उन्होंने छत्तीसगढ़ की बागडोर सम्हाली और गांवों में जाकर देखा तो उनके सामने भीषण चुनौतियां थी। यह चुनौती थी कि राज्य में राशन दुकानें तो हैं, लेकिन राशन कही नहीं मिलता। कुपोषण का स्तर भयावह था। स्वास्थ्य के सूचकांक, शिशु मृत्यु दर और मातृ मृत्यु दर निचले स्तर पर थे और राज्य से हर साल 20 लाख से अधिक लोग मजदूरी के लिए दूसरे राज्यों को जाते थे। उन्होंने लोगों से मिलकर उनकी सलाह के आधार पर उत्पादन, उपार्जन और वितरण का एक ऐसा तंत्र स्थापित किया जिससे लोगो ने जुड़ाव महसूस किया, जो उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप था और इसलिए यह सफलतापूर्वक काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ किस तरह अपनी आबादी के 50 प्रतिशत से अधिक हिस्से को एक और दो रू प्रति किलोग्राम की दर पर चावल प्रदान कर रहा है। उन्होंने आदिवासी इलाकों में कुपोषण को दूर करने के लिए 5 रू किलोग्राम पर चने का वितरण, नि:शुल्क नमक और तेंदुपत्ता तोड़ने वालों को जूते प्रदान करने की योजना का जिक्र करते हुए कहा कि इन योजनाओं के परिणाम अद्भुद थे और एक राजनैतिक नेतृत्व के रूप में संतुष्टि प्रदान करने वाले थे। उन्होंने कहा कि हमारा जोर एक व्यवस्थित तंत्र स्थापित करने पर था, ताकि राज्य के लोगों को स्थायी रूप से इसका लाभ मिले और यह सरकार के आने-जाने से प्रभावित न हो।
मुख्यमंत्री ने बताया की किस तरह से विद्युत आपूर्ति के क्षेत्र में राज्य में दीर्घकालीन हितों को ध्यान में रखकर नीतियां बनायी गयी और उन्हें विश्वास है कि राज्य में अगले 20 वर्षो तक किसी भी सेक्टर में पॉवर कट की आवश्यकता नहीं होगी। उन्होंने कृषि के क्षेत्र में भी राज्य द्वारा किये गये उपायों की ओर ध्यान दिलाते हुए बताया कि राज्य में किसानों को 3 प्रतिषत की दर से ऋण प्रदान किया जा रहा है और इसके बहुत अच्छे परिणाम आये है। आज हमारी कृषि विकास की दर तेजी से बढ़ी है। उन्होंने कहा कि यह सुशासन का ही परिणाम है कि आज राज्य की प्रति व्यक्ति आय बढ़कर चार गुनी हो गयी है। उन्होंने कहा कि उनका पूरा विश्वास है कि सुशासन के इन प्रयासों से छत्तीसगढ़ बहुत जल्दी ही विकास के हर क्षेत्र मेंदेष के प्रथम तीन राज्यों में अपना स्थान बना लेगा।
उदाहरण प्रस्तुत किया है। मुख्यमंत्री आज नई दिल्ली में हिन्दुस्तान टाईम्स समाचार पत्र द्वारा आयोजित हिन्दुस्तान टाईम्स लीडरशिप समिट में संबोधित कर रहे थे। चर्चा में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री पृथ्वीराज चव्हाण और दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती शीला दीक्षित ने भी भाग लिया। डॉ. सिंह ने कहा कि जब 8 वर्ष पहले उन्होंने छत्तीसगढ़ की बागडोर सम्हाली और गांवों में जाकर देखा तो उनके सामने भीषण चुनौतियां थी। यह चुनौती थी कि राज्य में राशन दुकानें तो हैं, लेकिन राशन कही नहीं मिलता। कुपोषण का स्तर भयावह था। स्वास्थ्य के सूचकांक, शिशु मृत्यु दर और मातृ मृत्यु दर निचले स्तर पर थे और राज्य से हर साल 20 लाख से अधिक लोग मजदूरी के लिए दूसरे राज्यों को जाते थे। उन्होंने लोगों से मिलकर उनकी सलाह के आधार पर उत्पादन, उपार्जन और वितरण का एक ऐसा तंत्र स्थापित किया जिससे लोगो ने जुड़ाव महसूस किया, जो उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप था और इसलिए यह सफलतापूर्वक काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ किस तरह अपनी आबादी के 50 प्रतिशत से अधिक हिस्से को एक और दो रू प्रति किलोग्राम की दर पर चावल प्रदान कर रहा है। उन्होंने आदिवासी इलाकों में कुपोषण को दूर करने के लिए 5 रू किलोग्राम पर चने का वितरण, नि:शुल्क नमक और तेंदुपत्ता तोड़ने वालों को जूते प्रदान करने की योजना का जिक्र करते हुए कहा कि इन योजनाओं के परिणाम अद्भुद थे और एक राजनैतिक नेतृत्व के रूप में संतुष्टि प्रदान करने वाले थे। उन्होंने कहा कि हमारा जोर एक व्यवस्थित तंत्र स्थापित करने पर था, ताकि राज्य के लोगों को स्थायी रूप से इसका लाभ मिले और यह सरकार के आने-जाने से प्रभावित न हो।
मुख्यमंत्री ने बताया की किस तरह से विद्युत आपूर्ति के क्षेत्र में राज्य में दीर्घकालीन हितों को ध्यान में रखकर नीतियां बनायी गयी और उन्हें विश्वास है कि राज्य में अगले 20 वर्षो तक किसी भी सेक्टर में पॉवर कट की आवश्यकता नहीं होगी। उन्होंने कृषि के क्षेत्र में भी राज्य द्वारा किये गये उपायों की ओर ध्यान दिलाते हुए बताया कि राज्य में किसानों को 3 प्रतिषत की दर से ऋण प्रदान किया जा रहा है और इसके बहुत अच्छे परिणाम आये है। आज हमारी कृषि विकास की दर तेजी से बढ़ी है। उन्होंने कहा कि यह सुशासन का ही परिणाम है कि आज राज्य की प्रति व्यक्ति आय बढ़कर चार गुनी हो गयी है। उन्होंने कहा कि उनका पूरा विश्वास है कि सुशासन के इन प्रयासों से छत्तीसगढ़ बहुत जल्दी ही विकास के हर क्षेत्र मेंदेष के प्रथम तीन राज्यों में अपना स्थान बना लेगा।
क्रमांक-3966/कुशराम

